जोधपुर नगर निगम चुनाव को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मियां और चुनावी गतिविधियां काफी तेज हो चुकी हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव मैदान में उतरकर अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। हालांकि, इन तमाम चुनावी बैठकों, रैलियों और नारों के बीच स्थानीय नागरिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि वे आखिर किस आधार पर अपना भावी प्रतिनिधि चुनेंगे। पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान विभिन्न नगर निगम वार्डों में कितना वास्तविक विकास कार्य पूरा हुआ और कौन-कौन सी मूलभूत नागरिक समस्याएं आज भी अधूरी पड़ी हैं, इसे लेकर आम जनता के बीच व्यापक मंथन चल रहा है। स्थानीय मतदाता पुराने वादों का हिसाब मांग रहे हैं और आने वाले पांच साल के कार्यकाल के लिए अपनी प्राथमिकताओं को पूरी तरह स्पष्ट कर रहे हैं।
शास्त्री नगर और वार्ड 20 में नागरिक सुविधाओं का संकट
वार्ड नंबर 20 के अंतर्गत आने वाले शास्त्री नगर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर स्थानीय निवासी और समाजसेविका निरूपा पटवा ने विस्तृत रूप से प्रकाश डाला है। उनके अनुसार, क्षेत्र के नागरिक लंबे समय से कई मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनका समय पर समाधान नहीं किया गया। क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या सफाई व्यवस्था की बदहाली और कचरा निस्तारण की विफलता बनी हुई है। शास्त्री नगर के जी सेक्टर में जगह-जगह कचरे के बड़े ढेर जमा रहते हैं, जिससे आसपास के रहवासियों का आवागमन मुश्किल हो गया है और बदबू के कारण स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं। इसके साथ ही, क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या भी स्थानीय लोगों और छोटे बच्चों के लिए रोजाना की एक गंभीर परेशानी बन चुकी है।
सफाई के अलावा जल निकासी और सीवरेज तंत्र की लगातार विफलता ने नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। निरूपा पटवा का कहना है कि मानसून के दौरान ही नहीं, बल्कि हल्की सी बारिश होने पर भी मुख्य सड़कों और गलियों में भारी जलभराव हो जाता है। इससे यातायात पूरी तरह बाधित होता है और जलजनित बीमारियों का प्रसार होता है। स्थानीय रहवासियों का स्पष्ट मानना है कि चुनाव के समय राजनीतिक दलों के झंडों और पोस्टरों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण वार्ड का संतुलित विकास और स्वच्छता व्यवस्था है। जनता इस बार किसी राजनीतिक दल विशेष के बजाय एक ऐसे उम्मीदवार को चुनना चाहती है जो पूरी तरह जिम्मेदार, कर्मठ और निष्पक्ष हो। नागरिकों की मुख्य शर्त यही है कि चुनाव जीतने के बाद पार्षद पूरे पांच साल तक वार्ड के लोगों के बीच उपस्थित रहकर उनकी समस्याएं सुने और हल कराए।
चुनावी अभियानों में युवाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
नगर निगम चुनाव के प्रचार तरीकों में भी इस बार बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। चुनावी अभियानों को डिजिटल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए युवाओं और जेनरेशन-जेड को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल युवाओं की विशेष टीमें और कमेटियां गठित कर रहे हैं ताकि प्रचार अभियान को जमीनी स्तर के साथ-साथ सोशल मीडिया मंचों पर तेजी दी जा सके।
इसी के साथ चुनावी गतिविधियों में महिलाओं की सक्रियता और भागीदारी भी पहले के मुकाबलों की तुलना में काफी अधिक नजर आ रही है। स्थानीय प्रत्याशियों के समर्थन में महिलाओं की टोलियां लगातार घर-घर जाकर जनसंपर्क कर रही हैं। घर-घर जाकर सीधे संवाद करने के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ सोशल मीडिया मंचों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल इस बार के चुनावी माहौल को काफी अलग, प्रतिस्पर्धी और आधुनिक बना रहा है।
वार्ड 75 में जनप्रतिनिधि की जवाबदेही और 5 साल की उपलब्धता
दूसरी ओर, वार्ड नंबर 75 के निवासी कार्तिक ने स्थानीय मतदाताओं की जनभावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि नागरिक इस बार किसी ऐसे पार्षद का चयन करना चाहते हैं जो केवल चुनाव के दिनों में नजर न आए। चुनाव के समय सभी प्रत्याशी हाथ जोड़कर घर-घर जाकर वोट मांगते हैं, लेकिन जीत हासिल करने के बाद वे अक्सर क्षेत्र से गायब हो जाते हैं और जनता की सुध नहीं लेते। जनता चाहती है कि उनका चुना हुआ प्रतिनिधि पूरे पांच साल तक उसी तत्परता के साथ वार्ड की समस्याओं के निस्तारण में सक्रिय रहे। कार्तिक के अनुसार, लोगों को एक ऐसे जनप्रतिनिधि से उम्मीदें हैं जो आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं को समझे और बिना किसी देरी के उनका प्रशासनिक समाधान करवाए।
कच्ची बस्ती और इंफ्रास्ट्रक्चर के अधूरे पड़े विकास कार्य
वार्ड नंबर 75 की बुनियादी स्थितियों का ब्योरा देते हुए कार्तिक ने बताया कि उनके क्षेत्र में साफ-सफाई, सड़कों की खस्ताहाली, नए सड़क निर्माण कार्य, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें और बिजली के जर्जर पोल जैसी कई गंभीर समस्याएं काफी समय से बनी हुई हैं। इस वार्ड का एक बड़ा हिस्सा कच्ची बस्ती क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां मूलभूत नागरिक सुविधाओं और ढांचागत विकास की अत्यधिक आवश्यकता महसूस की जा रही है। लंबे समय से इन उपेक्षित इलाकों की मांगों और समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है।
चुनाव में नए प्रत्याशियों की मौजूदगी और सोशल मीडिया के जरिए अभियानों के विस्तार के बीच मतदाताओं की सोच बिल्कुल स्पष्ट है। कार्तिक का कहना है कि चाहे भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार चुनाव जीते या फिर कांग्रेस का प्रत्याशी, जनता के लिए पार्टी से ज्यादा महत्वपूर्ण विकास कार्य हैं। नागरिकों की एकमात्र मांग यही है कि जो भी प्रत्याशी नगर निगम में पहुंचे, वह वार्ड के तमाम अधूरे पड़े कार्यों को समय पर पूरा कराए और क्षेत्र में वास्तविक तथा स्थाई विकास लेकर आए।



















