भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर देश भर में उन्हें कृतज्ञतापूर्वक याद किया गया। दो अक्टूबर को महात्मा गांधी के साथ ही शास्त्री जी की जयंती भी पूरे सम्मान के साथ मनाई जा रही है। नई दिल्ली में समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाने के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और सामाजिक संगठनों ने पूर्व प्रधानमंत्री के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।
राजनाथ सिंह ने शास्त्री जी के दृढ़ संकल्प को सराहा
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन। उन्होंने शास्त्री जी के जीवन मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि वे उच्च आदर्शों, असाधारण कर्तव्यबोध और अटूट ईमानदारी के सच्चे प्रतीक थे। राजनाथ सिंह के अनुसार, शास्त्री जी का समग्र जीवन सादगी और अटूट संकल्प शक्ति का एक अनुपम उदाहरण था, जिसमें स्वभाव की स्वाभाविक विनम्रता के साथ देश हित में कड़े फैसले लेने का अद्भुत साहस भी समाहित था।
देशभर में जयंती पर कार्यक्रमों का तांता
गांधी और शास्त्री जयंती के मौके पर देशभर के विभिन्न हिस्सों में अनेक गरिमामय आयोजनों का सिलसिला देखा गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों महान विभूतियों के विचारों को आज के दौर में भी बेहद प्रासंगिक बताया। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नागरिकों से शास्त्री जी और गांधी जी के बताए सिद्धांतों पर चलने का आह्वान किया। राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समाधि स्थलों पर जाकर देश के इन अमर नायकों को नमन किया। इसके अलावा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक मंचों पर संगोष्ठियों तथा व्याख्यानों के जरिए उनके द्वारा स्थापित उच्च नैतिक मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कौन थे लाल बहादुर शास्त्री
लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने नौ जून उन्नीस सौ चौंसठ से ग्यारह जनवरी उन्नीस सौ छियासठ तक देश का नेतृत्व किया। अपने लगभग अठारह महीने के संक्षिप्त कार्यकाल में उन्होंने गंभीर चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया। शास्त्री जी ने अपनी उच्च शिक्षा काशी विद्यापीठ से पूरी की, जहाँ से उन्हें शास्त्री की उपाधि प्राप्त हुई थी। स्वतंत्रता के उपरांत उत्तर प्रदेश सरकार में गोविंद बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में वे पुलिस और परिवहन मंत्री बने। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक सेवा में पहली बार महिला बस कंडक्टरों की नियुक्ति की और भीड़ नियंत्रण के लिए लाठीचार्ज के विकल्प के रूप में पानी की बौछार तकनीक की शुरुआत की। उन्नीस सौ इक्यावन में वे कांग्रेस पार्टी के महासचिव बने और उन्नीस सौ बावन, उन्नीस सौ सत्तावन तथा उन्नीस सौ बासठ के आम चुनावों में पार्टी को संगठनात्मक मजबूती प्रदान करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
जनता की प्रतिक्रिया
राजनाथ सिंह के इस संदेश पर आम लोगों ने उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। नागरिकों ने पूर्व प्रधानमंत्री के अमर उद्घोष जय जवान जय किसान को याद करते हुए उनकी निस्वार्थ देशसेवा और जीवन की सादगी के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।



























