भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में श्रीलंका के सत्तारूढ़ दल जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेवीपी के महासचिव टिल्विन सिल्वा कर रहे थे। बैठक में दोनों पड़ोसी देशों के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने के तौर-तरीकों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद के जरिए दोनों पक्षों ने आपसी विश्वास और क्षेत्रीय सहयोग की नई रूपरेखा को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
विदेश मंत्री ने सहयोग और प्रगति का दिया भरोसा
बैठक के बाद विदेश मंत्री ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि टिल्विन सिल्वा और श्रीलंकाई प्रतिनिधियों से मिलना उनके लिए बेहद सुखद रहा। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता के संबंधों को प्रगाढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में श्रीलंका के निरंतर विकास और समृद्धि के लिए हमेशा उसके साथ खड़ा रहेगा।
भारत यात्रा और राजनीतिक संपर्क का विस्तार
जेवीपी का यह प्रतिनिधिमंडल भारतीय जनता पार्टी के 'नो बीजेपी' पहल के तहत मिले आमंत्रण पर भारत दौरे पर आया था। अपनी इस बहुपक्षीय यात्रा के दौरान श्रीलंकाई दल ने दिल्ली में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बातचीत की। इसमें बीजेपी नेतृत्व के साथ संपर्क के अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री से मुलाकात भी शामिल रही, जहां इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और नागरिक कल्याणकारी योजनाओं के अनुभवों को साझा किया गया। इस दौरे का प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के राजनीतिक संगठनों के बीच संवाद बढ़ाना और व्यावहारिक शासन व्यवस्था से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस उच्चस्तरीय मुलाकात को लेकर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। जहां कई नागरिकों ने पड़ोसी प्रथम की नीति और दोनों मुल्कों के प्रगाढ़ होते संबंधों की सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने श्रीलंका में पूर्व के विदेशी बुनियादी ढांचा निवेशों की आर्थिक पारदर्शिता पर सवाल भी उठाए।



























