फसलों की समुचित बढ़वार और खेत से भरपूर पैदावार लेने के लिए समय पर सिंचाई करना किसानों की सबसे पहली प्राथमिकता होती है। ग्रामीण और कृषि इलाकों में खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर किसान इलेक्ट्रिक टुल्लू पंप पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, लगातार संचालन और समय पर बुनियादी रखरखाव न किए जाने के चलते इन पंपों में अक्सर तकनीकी दिक्कतें पैदा हो जाती हैं। समय के साथ पानी का बहाव धीमा पड़ जाता है या मशीन से अजीब आवाजें आने लगती हैं। इस तरह की परेशानियों को दूर करने के सिलसिले में बोकारो के टुल्लू पंप एक्सपर्ट विकास ने इलेक्ट्रिक पंप में आने वाली पांच मुख्य समस्याओं और उनके समाधान की पूरी जानकारी दी है।
कंपन और तेज आवाज से निपटने के उपाय
इलेक्ट्रिक मोटर में अत्यधिक कंपन, थरथराहट और तेज आवाज की समस्या अक्सर पंप या उसकी सक्शन पाइप में पानी की कमी की वजह से सामने आती है। जब पाइप में पानी पर्याप्त नहीं होता, तो अंदर हवा का दबाव असंतुलित हो जाता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए पंप और सक्शन पाइप को चालू करने से पहले पूरी तरह पानी से भरना बेहद जरूरी होता है।
यदि पानी खींचने की दूरी यानी सक्शन लिफ्ट काफी ज्यादा है, तो पंप पर अतिरिक्त जोर पड़ता है। इस समस्या से बचने के लिए पंप को थोड़ा नीचे खिसकाकर पानी के जलस्रोत के अधिक से अधिक करीब स्थापित करना चाहिए। इसके अलावा मोटर के अंदर मौजूद बेयरिंग के अत्यधिक घिस जाने से भी पूरी मशीन जोर-जोर से हिलने लगती है। किसानों को समय-समय पर बेयरिंग की स्थिति जांचनी चाहिए और घिसावट दिखने पर फौरन नई बेयरिंग लगवा लेनी चाहिए।
पानी का दबाव कम होने के कारण और सुधार
अक्सर देखा जाता है कि मोटर चलने पर पानी तो बाहर आता है लेकिन उसका प्रेशर बहुत कमजोर रहता है। इस परेशानी की एक मुख्य वजह पंप के इंजन की घूमने वाली रफ्तार में गिरावट आना हो सकती है। इसके साथ ही अगर सक्शन लाइन में कहीं भी हल्का सा भी लीकेज मौजूद है, तो सिस्टम में हवा घुस जाती है और पानी का दबाव अचानक गिर जाता है।
प्रेशर कम होने का एक अन्य बड़ा कारण इंपेलर का खराब होना या उसमें किसी तरह की गंदगी और कचरे का फंसना है। इंपेलर वास्तव में पंप के भीतर घूमने वाला पंखे अथवा चक्के जैसा पुर्जा होता है, जिसका काम पानी को पूरी ताकत और दबाव के साथ आगे की ओर धकेलना होता है। यदि पानी का दबाव धीमा हो जाए, तो सबसे पहले इंपेलर को खोलकर अच्छी तरह साफ करना चाहिए और अगर वह घिसकर क्षतिग्रस्त हो चुका है, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए।
पर्याप्त पानी बाहर न फेंकने की स्थिति में क्या करें
यदि पंप चालू रहने के बाद भी जरूरत के मुताबिक पानी बाहर नहीं फेंक रहा है, तो इसका एक बड़ा कारण सक्शन लिफ्ट का जरूरत से ज्यादा ऊंचा होना हो सकता है। ऐसे हालात में भी पंप को पानी के स्रोत के जितना मुमकिन हो सके नजदीक रखना सबसे मुफीद साबित होता है।
इसके अलावा पानी के स्रोत में डूबे रहने वाले फुटवॉल्व की स्थिति भी बेहद अहम होती है। फुटवॉल्व का पूरी तरह से पानी के भीतर डूबा रहना अनिवार्य है। अगर फुटवॉल्व पानी की सतह से ऊपर आ जाए या आंशिक रूप से बाहर रह जाए, तो पंप पानी उठाने में विफल रहता है। मोटर को ऑन करने से पहले उसकी केसिंग और सक्शन पाइप को पूरी तरह पानी से भरकर प्राइमर तैयार करना चाहिए। ऐसा करने से आंतरिक प्रणाली में उचित दबाव निर्मित होता है और पानी का निकास सुचारू बना रहता है। पंप को कभी भी सूखा यानी बिना पानी भरे नहीं चलाना चाहिए, क्योंकि सूखी मशीन चलाने से उसके पुर्जे जलने या खराब होने का भारी जोखिम रहता है।
लगातार घंटों चलाने से बचें और दें जरूरी ब्रेक
टुल्लू पंप को लंबे समय तक सुरक्षित और कार्यकुशल बनाए रखने के लिए लगातार कई-कई घंटों तक चालू रखने की आदत से बचना चाहिए। विकास के अनुसार करीब चार घंटे तक निरंतर सिंचाई करने के बाद मोटर को बंद करके कम से कम आधे घंटे का आराम देना जरूरी होता है, ताकि इंजन सामान्य स्थिति में रह सके।
काम के दौरान यदि पंप छूने पर असामान्य रूप से बहुत ज्यादा गर्म महसूस हो या उससे कोई अजीब खड़खड़ाहट की आवाज सुनाई दे, तो बिना किसी देरी के तुरंत बिजली बंद कर देनी चाहिए। ऐसी स्थिति में मोटर को पूरी तरह ठंडा होकर सामान्य तापमान पर आने देना चाहिए और उसके बाद ही दोबारा स्विच ऑन करना चाहिए।
नियमित देखभाल और निगरानी के जरूरी नियम
सिंचाई के वक्त किसान हमेशा इस बात पर नजर रखें कि मशीन बिना किसी झटके के सुचारू रूप से घूम रही हो। इसके साथ ही कुएं, तालाब या बोरवेल में जलस्तर की घट-बढ़ पर लगातार नजर रखना जरूरी है। सक्शन पाइप का निचला सिरा हर हाल में पर्याप्त पानी के अंदर डूबा रहना चाहिए, जिससे पानी का प्रवाह बिना बाधा के जारी रहे।
पंप की लंबी उम्र सुनिश्चित करने के लिए उसकी नियमित रूप से धूल-मिट्टी साफ करनी चाहिए, पाइपलाइनों के जोड़ों पर लीकेज की निरंतर जांच करनी चाहिए और इंपेलर व बेयरिंग की समयबद्ध पड़ताल कराते रहना चाहिए। छोटी-मोटी तकनीकी कमियों को शुरुआत में ही सुधार लेने से बड़ी खराबी का खतरा टल जाता है और पंप कई सालों तक बेहतरीन क्षमता के साथ काम करता रहता है।



















