आर्य समाज के संस्थापक और महान समाज सुधारक महर्षि दयानंद सरस्वती की पुण्यतिथि के अवसर पर देश के प्रमुख नेतृत्व ने उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया है। वेदों के संदेश को आम नागरिकों तक पहुंचाने और समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कड़ा प्रहार करने वाले इस महान चिंतक के विचारों को आधुनिक भारत के निर्माण में आज भी बेहद प्रासंगिक माना जाता है।
राजनाथ सिंह का संदेश और विचार
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि महर्षि दयानंद सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद ने वेदों के गहरे ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया। इसके साथ ही उन्होंने समाज में फैली रूढ़ियों और कुरीतियों के विरुद्ध दृढ़ता से आवाज उठाई।
राजनाथ सिंह ने आगे रेखांकित किया कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता की दिशा में स्वामी जी के चिंतन ने पूरे भारतीय समाज को एक नई दिशा प्रदान की। आर्य समाज की स्थापना कर उन्होंने वैदिक मूल्यों की पुनर्स्थापना और शिक्षा के प्रसार को सामाजिक क्रांति का मुख्य आधार बनाया था।
सामाजिक सुधार और 200वीं जयंती का राष्ट्रीय संदर्भ
महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने जीवनकाल में मूर्ति पूजा, अंधविश्वास और भेदभावपूर्ण रीति-रिवाजों का प्रखर विरोध किया था। उनकी 200वीं जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में व्यापक राष्ट्रीय समारोह का आयोजन किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री समेत देश के शीर्ष नेतृत्व ने बार-बार यह रेखांकित किया है कि स्वामी जी के सामाजिक सुधार के प्रयास देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज बने रहेंगे।
महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर का परिचय
महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों और शैक्षिक दृष्टिकोण के सम्मान में राजस्थान के अजमेर में महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1987 में की गई थी। यह संस्थान उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। वर्ष 2004 में नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) बेंगलुरु द्वारा इस विश्वविद्यालय को बी++ ग्रेड प्रदान किया गया था। वर्तमान में इस विश्वविद्यालय से 200 से अधिक महाविद्यालय संबद्ध हैं, जो व्यापक स्तर पर विद्यार्थियों को शैक्षणिक सेवाएं दे रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के इस संदेश पर नागरिकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। अधिकांश लोगों ने स्वामी जी के सिद्धांतों को याद करते हुए पाखंड से दूर रहने और उनके समाज सुधार के मार्ग पर चलने की आवश्यकता पर बल दिया।


























