प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अगस्त 2026 को कर्नाटक के मैसूर में विवेक स्मारक और स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र का औपचारिक उद्घाटन किया। अपनी इस मैसूर यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने विवेक स्मारक परिसर में बने प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन कर विशेष पूजा अर्चना की। इसके साथ ही उन्होंने उस ऐतिहासिक स्थान का भ्रमण भी किया, जहां स्वामी विवेकानंद ने साल 1892 में अपनी परिव्राजक यात्रा के दौरान विश्राम किया था। इस आध्यात्मिक स्थल के दर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने इस अनुभव को देशवासियों के साथ साझा किया।
1892 की परिव्राजक यात्रा और निरंजन मठ का इतिहास
मैसूर के एन.एस. रोड पर स्थित यह परिसर ऐतिहासिक रूप से निरंजन मठ के नाम से जाना जाता था। साल 1892 में जब स्वामी विवेकानंद एक अज्ञात परिव्राजक संन्यासी के रूप में पूरे भारत की यात्रा पर निकले थे, तब वे मैसूर पहुंचे थे और इसी मठ में ठहरे थे। इस ऐतिहासिक प्रवास के दौरान ही उन्हें अपने भावी जीवन और शिकागो धर्म संसद में भारत का प्रतिनिधित्व करने के विचारों की स्पष्टता मिली थी। इसी स्मृति को अमर बनाने के लिए इस स्थान को विवेक स्मारक के रूप में पुनर्विकसित किया गया है, ताकि भावी पीढ़ियां भारत के इस महान दार्शनिक के पदचिह्नों से प्रेरणा ले सकें।
रामकृष्ण मिशन का प्रभाव और प्रधानमंत्री का संदेश
अपने इस दौरे की तस्वीरें और भावनाएं साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मैसूर में शिव मंदिर में प्रार्थना करना और स्वामी जी के विश्राम स्थल को देखना एक अविस्मरणीय अवसर था। उद्घाटन समारोह के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि रामकृष्ण मिशन ने उनके अपने जीवन को गढ़ने और विचार प्रक्रिया को दिशा देने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार, राष्ट्र निर्माण का संदेश, सेवा भाव और आत्मनिर्भरता का संकल्प आज भी भारत के करोड़ों युवाओं के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शन हैं।
सांस्कृतिक युवा केंद्र और कड़े सुरक्षा इंतजाम
मैसूर में निर्मित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना है। प्रधानमंत्री के इस उच्चस्तरीय दौरे को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक शहर मैसूर को एक अभेद्य सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया था। संपूर्ण शहर में व्यापक पुलिस बल तैनात किया गया था और कड़े सुरक्षा प्रबंध लागू किए गए थे। स्थानीय नागरिकों और युवाओं ने इस नए केंद्र की स्थापना पर अपार प्रसन्नता व्यक्त की।
जनता की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के इस दौरे पर सोशल मीडिया पर आम जनता की ओर से मिली-जुली और उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अधिकांश लोगों ने देश की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक धरोहर को सहेजने के इस कदम की सराहना की और इसे युवा सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया, जबकि कुछ लोगों ने समाज में स्वामी जी के शांति और एकता के संदेश को अपनाने पर बल दिया।



























