प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विषयों पर अपने विचार साझा किए। वार्ता का मुख्य केंद्र भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान हासिल की गई उपलब्धियां, वैश्विक स्तर पर बहुपक्षवाद को मजबूती देना और संयुक्त राष्ट्र में अविलंब संरचनात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता रहा।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ब्रिक्स की भूमिका
इस बैठक के दौरान भारत द्वारा ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालते समय उठाए गए विभिन्न कदमों और हासिल की गई प्रगति की व्यापक समीक्षा की गई। भारत ने हमेशा वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज को प्रखरता से उठाने की वकालत की है। प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का एकजुट होना आवश्यक है। भारत बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक समावेशी, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र संरचना में बदलाव की मांग
वैश्विक मंचों पर संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा लंबे समय से प्रमुखता से उठाया जा रहा है। भारत का यह स्पष्ट मानना है कि 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक सुधार बेहद जरूरी हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग लगातार उठाते रहे हैं ताकि विकासशील राष्ट्रों को इसमें उचित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिल सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा
बैठक संपन्न होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए इस मुलाकात को बेहद सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत बहुपक्षवाद को मजबूत करने के अपने संकल्प पर पूरी तरह कायम है और संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं में समयबद्ध सुधार अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए बेहद जरूरी हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
इस मुलाकात और प्रधानमंत्री के बयान पर डिजिटल मंचों पर आम जनता की ओर से विविध प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई नागरिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव और वैश्विक सुधारों के लिए उठाई जा रही आवाज का समर्थन किया, वहीं कुछ विश्लेषकों ने यह सवाल भी उठाया कि सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन को लेकर लंबे समय से चल रही इन बैठकों का ठोस परिणाम कब तक सामने आएगा।


























