ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजनों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुलाकात में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ द्विपक्षीय चर्चा की। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों एशियाई देशों के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत रहे रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और आपसी सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश करना था। दोनों नेताओं ने वैश्विक मंच पर बदलते समीकरणों के बीच आपसी साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूती
बैठक के दौरान दोनों नेताओं की बातचीत का एक बड़ा केंद्र रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र रहा। आपसी सामरिक साझेदारी को और गहराई देने के लिए दोनों पक्षों ने प्रस्तावित 2+2 व्यवस्था को लागू करने की दिशा में तेजी से काम करने पर सहमति जताई। रक्षा उपकरणों, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सूझबूझ को साझा करने के मामलों में दोनों देश लगातार अपने संबंधों को मजबूत कर रहे हैं, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा मिल सके।
ऊर्जा, दुर्लभ खनिज और अंतरिक्ष साझेदारी
पारंपरिक रक्षा के अलावा दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, दुर्लभ खनिजों यानी रेयर अर्थ्स के खनन और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया। आधुनिक तकनीकी जरूरतों और औद्योगिक विकास के लिहाज से इन क्षेत्रों में वियतनाम और भारत की साझेदारी बेहद अहम मानी जा रही है। अंतरिक्ष तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में साझा प्रयासों से दोनों देशों की तकनीकी क्षमताओं को नया आयाम मिलेगा।
व्यापारिक लक्ष्य और आर्थिक साझेदारी
आर्थिक मोर्चे पर दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक 25 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने के लिए ठोस कदम उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वाणिज्यिक समझौतों, निवेश के अवसरों और बाजार तक पहुंच को आसान बनाने पर जोर दिया गया, जिससे दोनों देशों के व्यावसायिक घरानों को सीधा लाभ मिल सके।
जनता की प्रतिक्रिया
इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली, जहां कई लोगों ने भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों का स्वागत किया, वहीं कुछ ने इन समझौतों के जमीनी क्रियान्वयन और समयबद्ध परिणामों को लेकर अपनी राय रखी।

























