भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिलीपींस के मनीला शहर में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अपने समकक्षों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। आसियान सम्मेलनों के साथ हुई इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए समूह के साझा दृष्टिकोण को फिर से मजबूत करना था।
इंडो-पैसिफिक परिदृश्य की समीक्षा
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एस. जयशंकर ने इस कूटनीतिक कार्यक्रम से जुड़ी जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के मौजूदा राजनीतिक और भौगोलिक हालात की व्यापक समीक्षा की। यह चर्चा मुख्य रूप से क्षेत्र में हाल ही में हुए घटनाक्रमों पर केंद्रित रही, जिसमें स्थिरता बनाए रखने और सभी देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर खास जोर दिया गया।
नई दिल्ली बैठक के फैसलों पर चर्चा
मनीला में हुई बातचीत का एक बड़ा हिस्सा पिछली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के फैसलों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहा। याद रहे कि मई 2026 के अंत में नई दिल्ली ने उस अहम शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। भारत की राजधानी में वह बैठक दुनिया में हुए कई बड़े कूटनीतिक बदलावों के ठीक बाद हुई थी, और अब फिलीपींस में नेताओं ने उस समय तय की गई रणनीतिक और आर्थिक पहलों की प्रगति का जायजा लिया।
आसियान की भूमिका और क्षेत्रीय एकता
क्वाड देशों के सदस्यों ने आसियान की एकता और क्षेत्रीय मामलों में इसकी मुख्य भूमिका के लिए अपना मजबूत समर्थन दोहराया। एस. जयशंकर ने इस बात पर खास तौर से प्रकाश डाला कि एक स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति प्रतिबद्धता आसियान के महत्व को स्वीकार करने से गहराई से जुड़ी है। माना जा रहा है कि मनीला में तय किए गए व्यापक एजेंडे के तहत महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर भी गहराई से चर्चा हुई।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पूरी बातचीत पर इंटरनेट पर आम जनता की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां कुछ लोगों ने भारत के इन कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की, वहीं कुछ अन्य लोगों ने घरेलू राजनीतिक मुद्दों पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के एक वर्ग ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह चल रहे वैश्विक संघर्षों में शांति समझौते कराने के लिए अपनी कूटनीतिक स्थिति का इस्तेमाल करे, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के मामले में।



























