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मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, कथा सम्राट के सामाजिक योगदान को किया यादनेता जी
31 जुल॰ 2026, 12:14 pm (49 दिन पहले)· 0

मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, कथा सम्राट के सामाजिक योगदान को किया याद

मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर अमित शाह ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सजीव लेखन और सामाजिक योगदान को याद किया। प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं और उनके जीवन संघर्षों ने भारतीय साहित्य को एक नई दिशा दी।

अमित शाह ने महान साहित्यकार और कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी। अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में सामाजिक घटनाओं और जनजीवन का इतना सजीव चित्रण किया है कि उनकी लिखी कहानियां और उपन्यास आज भी उतने ही प्रासंगिक और जीवंत प्रतीत होते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रेमचंद की लेखनी ने समाज में फैले शोषण, विषमता और आम आदमी की पीड़ा को बेबाकी से उजागर किया और हर भारतीय को सच्चाई, ईमानदारी तथा अपनी माटी से जुड़े रहने की सीख दी।

अमित शाह का संदेश और कथा सम्राट की अमर लेखनी

अमित शाह ने अपनी पोस्ट में मुंशी प्रेमचंद के साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए लिखा कि वे हिंदी साहित्य के एक ऐसे युगांतरकारी रचनाकार थे, जिन्होंने शोषित और पीड़ित वर्ग की भावनाओं को अपनी कृतियों का आधार बनाया। समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की तकलीफों को उन्होंने जिस संवेदनशीलता के साथ पन्नों पर उतारा, उसने भारतीय साहित्य को एक नया धरातल प्रदान किया। अमित शाह के अनुसार, प्रेमचंद की रचनाएं आज के युग में भी पाठक को विचार करने और सामाजिक यथार्थ से रूबरू होने का अवसर प्रदान करती हैं।

कौन थे धनपत राय श्रीवास्तव उर्फ मुंशी प्रेमचंद

हिंदी और उर्दू साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित रचनाकारों में शामिल मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक नगर वाराणसी के समीप स्थित लमही गांव में हुआ था। साहित्य जगत में उन्हें उपन्यास सम्राट और कलम का जादूगर जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से नवाजा गया। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में किसी काल्पनिक दुनिया को रचने के बजाय अपने आसपास के ग्रामीण और शहरी जीवन के कड़वे यथार्थ को पेश किया। यही कारण है कि उनकी रचनाएं हर वर्ग के पाठक के दिल को सीधे छूती हैं।

अपने साहित्यिक जीवन के दौरान प्रेमचंद ने लगभग डेढ़ दर्जन कालजयी उपन्यासों की रचना की। इनमें सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि और गोदान जैसे उपन्यास शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय समाज की संरचना, दहेज प्रथा, आर्थिक तंगी और किसान जीवन के दर्द को गहराई से सामने रखा। इसके अतिरिक्त उन्होंने 300 से अधिक कहानियों का सृजन किया, जिनमें कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी और दो बैलों की कथा जैसी रचनाएं कालजयी बन चुकी हैं। उनकी अधिकांश कृतियां हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित होकर लोकप्रिय हुईं।

पत्रकारिता, प्रकाशन और मुंबई का अनुभव

मुंशी प्रेमचंद केवल एक कथाकार ही नहीं थे, बल्कि एक निर्भीक पत्रकार और संपादक भी थे। उन्होंने अपने समय की प्रतिष्ठित उर्दू और हिंदी पत्रिकाओं जैसे जमाना, सरस्वती, माधुरी, मर्यादा, चाँद और सुधा में नियमित रूप से लेखन किया। सामाजिक और राजनीतिक चेतना को जागृत करने के उद्देश्य से उन्होंने हिंदी समाचार पत्र जागरण तथा प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन भी संभाला। अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत करने के लिए उन्होंने सरस्वती प्रेस भी खरीदा था, हालांकि बाद में वित्तीय घाटे के कारण इस प्रेस को बंद करना पड़ा था।

साहित्यिक गतिविधियों के साथ-साथ मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय सिनेमा में भी अपना योगदान दिया। वे फिल्मों की पटकथा लिखने के उद्देश्य से मुंबई पहुंचे और वहां लगभग तीन वर्षों तक रहे। मुंबई के इस दौर में उन्होंने सिनेमाई माध्यम को समझा, लेकिन उनका मुख्य सरोकार हमेशा साहित्य और आम जनता की आवाज बनने से ही जुड़ा रहा। जीवन के अंतिम क्षणों तक वे साहित्य सृजन में निरत रहे।

अंतिम कृतियां और अक्षुण्ण विरासत

मुंशी प्रेमचंद ने जीवन के अंतिम दिनों तक लिखना जारी रखा। उनका अंतिम निबंध महाजनी सभ्यता था, जिसमें उन्होंने आधुनिक पूंजीवादी व्यवस्था और शोषणकारी प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार किया। उनका अंतिम व्याख्यान साहित्य का उद्देश्य था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि साहित्य का मुख्य कार्य समाज में चेतना जगाना और मानव मूल्यों की रक्षा करना है। वहीं कफन उनकी अंतिम कहानी मानी जाती है, जो गरीबी और सामाजिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाती है।

जनता की प्रतिक्रिया

अमित शाह की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भी अपनी व्यापक प्रतिक्रियाएं दीं। लोगों ने मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध रचनाओं गोदान और निर्मला को याद करते हुए कथा सम्राट को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कई उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी की कि प्रेमचंद द्वारा उजागर किए गए किसानों के मुद्दे, गरीबी और सामाजिक आडंबर आज भी उतने ही विचारणीय हैं जितने उनके दौर में थे।

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सवाल-जवाब

मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर अमित शाह ने क्या संदेश दिया?
अमित शाह ने मुंशी प्रेमचंद को नमन करते हुए उनके सजीव लेखन की तारीफ की और कहा कि उनकी रचनाओं ने समाज की पीड़ा और शोषण को प्रमुखता से आवाज दी।
मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था और उनका जन्म कहाँ हुआ था?
मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था और उनका जन्म उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास स्थित लमही गांव में हुआ था।
मुंशी प्रेमचंद के प्रमुख उपन्यास कौन-कौन से हैं?
उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में गोदान, गबन, सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला और कर्मभूमि शामिल हैं।
मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों में से कुछ नाम क्या हैं?
उनकी लोकप्रिय कहानियों में कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी और दो बैलों की कथा शामिल हैं।
मुंशी प्रेमचंद ने किन प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया था?
उन्होंने दैनिक समाचार पत्र जागरण और साहित्यिक पत्रिका हंस का संपादन और प्रकाशन किया था।
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