राजधानी में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत, दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव सहित विपक्ष के कई नेताओं को जबरन हिरासत में ले लिया है। ये नेता नीट परीक्षा को लेकर प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे थे। खबरों के मुताबिक, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने नेताओं को विरोध स्थल से खींचकर हटाया।
राहुल गांधी ने संघर्ष जारी रखने का किया ऐलान
विरोध स्थल से जबरन हटाए जाने के बावजूद नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि चाहे जितना भी दबाव डाल लिया जाए, यह लड़ाई नहीं रुकेगी। यह प्रदर्शन नीट मुद्दे को लेकर चल रहे विरोध का हिस्सा था। इसी बीच, AAP ने दावा किया है कि इस धरने ने CJP के एक महीने लंबे विरोध प्रदर्शन को कमजोर कर दिया है।
शशि थरूर ने की पुलिस कार्रवाई की निंदा
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस के भीतर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने सहयोगियों के साथ हुए व्यवहार की निंदा की। उन्होंने विपक्षी नेताओं की इस गिरफ्तारी को "हमारे लोकतंत्र का घोर अपमान" बताया। थरूर ने तर्क दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ शारीरिक आक्रामकता पूरी तरह से अनुचित है और एक जवाबदेह सरकार हमेशा बात सुनती है।
जनता की प्रतिक्रिया और दूतावास का अलर्ट
इस पूरी घटना ने ऑनलाइन माध्यमों पर व्यापक चर्चाओं को जन्म दिया है। जहां कई लोगों ने नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर गुस्सा जाहिर किया, वहीं कुछ अन्य लोगों ने एक लीक हुए दस्तावेज को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विशेष रूप से, जनता ने 17 जुलाई के एक अमेरिकी दूतावास के अलर्ट की ओर इशारा किया, जिसमें 20 जुलाई की हिंसा से चार दिन पहले अमेरिकी नागरिकों को दिल्ली में भीड़-भाड़ से बचने के लिए कहा गया था। इससे कुछ लोग यह सवाल पूछने लगे हैं कि क्या इस अशांति में कोई विदेशी भूमिका थी।



























