देश की राजधानी में सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त और सड़कों पर भारी पुलिस बल की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। देर रात शहर में दाखिल होने के बाद सड़क मार्ग पर बने सुरक्षा तंत्र को देखकर जनप्रतिनिधियों ने शहर के मौजूदा हालात पर हैरानी जताई है। जगह-जगह स्थापित निगरानी चौकियों और सख्त पाबंदियों के कारण दिल्ली का सामान्य जनजीवन और आवागमन प्रभावित नजर आ रहा है।
राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी बंदोबस्त
राष्ट्रीय राजधानी की प्रमुख सड़कों और सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत सख्त कर दिया गया है। हर कुछ सौ मीटर की दूरी पर सघन जांच चौकियां बनाई गई हैं। सड़कों के बीचों-बीच वाहनों की गति नियंत्रित करने और आवाजाही रोकने के लिए कंक्रीट के बड़े अवरोधक खड़े किए गए हैं। इसके अतिरिक्त कई स्थानों पर सड़क की सतह पर नुकीली पट्टियां भी बिछाई गई हैं, जिससे सुरक्षा घेरे को पूरी तरह अभेद्य बनाया जा सके। कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लगभग 22,000 जवानों को विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है।
शशि थरूर ने जताई गहरी चिंता
इस अप्रत्याशित सुरक्षा व्यवस्था पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शशि थरूर ने X पर लिखा कि देर रात दो बजे के बाद राजधानी लौटने पर उन्हें जो दृश्य दिखा, वैसा उन्होंने पहले शायद ही कभी देखा हो। उन्होंने सड़कों पर हर तरफ कंक्रीट बैरियर, नुकीली पट्टियों और 22,000 पुलिस व अर्धसैनिक बलों की तैनाती का उल्लेख करते हुए इसे युद्ध जैसी स्थिति करार दिया। उनका कहना था कि शहर के भीतर इतने बड़े पैमाने पर घेराबंदी आम तौर पर सामान्य दिनों में देखने को नहीं मिलती है।
जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर आम नागरिकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने राजधानी में शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित अशांति को रोकने के लिए प्रशासन के इन कड़े कदमों का समर्थन किया, जबकि अन्य उपयोगकर्ताओं ने लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के अधिकार और अत्यधिक पाबंदियों के चलते आम जनता को होने वाली असुविधा को लेकर सवाल खड़े किए।



























