राजस्थान के जोधपुर में भारतीय वायु सेना के बहुपक्षीय युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति' का परिचालन चरण शुरू हो गया है, जिसमें दुनिया की प्रमुख वायु सेनाएं एक साथ अभ्यास कर रही हैं। इस अंतरराष्ट्रीय अभ्यास के दौरान आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मित्र देशों के बीच परिचालन तालमेल को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
जोधपुर में वैश्विक वायु सेनाओं का साझा अभ्यास
सात विदेशी वायु सेनाओं के साथ शुरू हुए इस विशाल युद्धाभ्यास में विभिन्न देशों की सामरिक क्षमताओं और साझा कार्यप्रणाली को परखा जा रहा है। इस तरह के आयोजनों का मुख्य मकसद विभिन्न सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग और अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ावा देना है, जिससे जटिल हवाई अभियानों में संयुक्त तालमेल को साधा जा सके।
रक्षा मंत्री का संबोधन
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रतिनिधियों और सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य सहयोगी देशों के मध्य परिचालन समन्वय को बढ़ावा देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के संयुक्त मंच विभिन्न देशों की वायु सेनाओं को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करने में सक्षम बनाते हैं।
उन्नत लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन
इस युद्धाभ्यास में अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-35 लाइटनिंग II पहली बार भारत में अभ्यास का हिस्सा बना है, जिसे दोनों देशों के बीच समन्वय और तत्परता के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा, फ्रांस की वायु और अंतरिक्ष सेना के मिशन पेगास 26 के तहत राफेल विमान, एमआरटीटी और ए400एम विमान जोधपुर पहुंचे हैं। जर्मनी का ए400एम सैन्य परिवहन विमान और भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस भी इस युद्धाभ्यास के जरिए अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस आयोजन और रक्षा मंत्री के बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने जहां वैश्विक ताकतों के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक संबंधों की सराहना की, वहीं कुछ अन्य उपयोगकर्ताओं ने अमेरिका जैसे देशों के साथ इस तरह की सैन्य साझेदारी की प्रकृति पर सवाल उठाए।


























