समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने सिक्किम के नवनियुक्त राज्यपाल को लेकर चल रहे विवाद पर मुख्यमंत्री की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए। अपने बयान में उन्होंने उत्तराखंड से जुड़े संदर्भों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री से जवाबदेही की मांग की।
सिक्किम के राज्यपाल को लेकर मुख्यमंत्री को घेरा
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि राज्यसभा की चर्चा करने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को केंद्र की सत्ताधारी पार्टी द्वारा सिक्किम में बनाए गए विवादित राज्यपाल के मसले पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती भरे लहजे में संबोधित करते हुए कहा कि अगर उनमें थोड़ी भी संकोच या शर्म बाकी है, तो उन्हें इस नियुक्ति पर अपना पक्ष साफ करना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का उत्तराखंड की बेटी के प्रति भी कोई कर्तव्य बनता है या नहीं, इस पर स्पष्टता होनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि क्या उत्तराखंड छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री की वहां की समस्याओं और वहां की बेटियों के प्रति कोई जवाबदेही बाकी नहीं रह जाती है।
राज्यसभा चुनाव और राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है जब राज्यसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर व्यापक स्तर पर संगठनात्मक मंथन चल रहा है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सीटों के प्रत्याशियों की सूची तय करने को लेकर हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वरिष्ठ नेता बीएल संतोष के बीच करीब डेढ़ घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई थी। इसके अलावा राष्ट्रीय राजनीति में भी राज्यसभा चुनावों को लेकर गतिविधियां तेज रही हैं, जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा की शपथ लेने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बधाई संदेश दिया जाना और अन्य नेताओं की मुलाकातें भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही हैं।
इसी चुनावी और राजनीतिक सरगर्मी के बीच अखिलेश यादव ने राज्यपाल के पद पर हुई नियुक्ति को लेकर सत्तारूढ़ दल के नेतृत्व और उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया पर दबाव बनाने की कोशिश की है। विपक्षी दल इस नियुक्ति को नैतिक और राजनीतिक दृष्टि से अनुचित ठहराने का प्रयास कर रहे हैं।
अंकिता भंडारी प्रकरण और राज्यपाल पद से जुड़ा विवाद
इस पूरे मामले की जड़ें उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड और उससे जुड़े विवादों से जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2022 में हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पुलकित आर्य के पिता को उस समय भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित भी कर दिया गया था।
सिक्किम के राज्यपाल बनाए गए दुष्यंत गौतम का नाम भी इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक चर्चाओं में घसीटा जाता रहा है। हालांकि, दुष्यंत गौतम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इस मामले में उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी या आरोप पत्र दर्ज नहीं हुआ है और केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा मामले की जांच प्रक्रियाधीन बताई गई है। इसके बावजूद विपक्षी दलों का तर्क है कि ऐसे विवादों में घिरे व्यक्ति को संवैधानिक पद पर बैठाना गलत है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि बिना किसी कानूनी साक्ष्य या अदालती निष्कर्ष के किसी भी नेता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
भारतीय जनता पार्टी के बारे में
भारतीय जनता पार्टी भारत के दो प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दलों में से एक है। वर्ष 2014 से यह दल चौदहवें और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की केंद्र सरकार में सत्तारूढ़ है। यह पार्टी दक्षिणपंथी राजनीति और पारंपरिक हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़ी हुई है, जिसके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ गहरे वैचारिक संबंध हैं। अठारह दिसंबर 2023 के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में पार्टी के कुल 1435 विधायक हैं और यह संसद तथा राज्य विधानसभाओं में देश का सबसे बड़ा दल है। अक्टूबर 2022 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 17 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाती है।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस सोशल मीडिया पोस्ट पर आम लोगों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई उपयोगकर्ताओं ने महिलाओं की सुरक्षा और संवैधानिक पदों की मर्यादा के मुद्दे को उठाने के लिए अखिलेश यादव का समर्थन किया, वहीं कई अन्य लोगों ने अदालत के फैसले के बिना किसी पर आरोप लगाने को अनुचित राजनीति बताते हुए समाजवादी पार्टी के पिछले शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।



























