धार्मिक उत्सवों के मंच से राष्ट्र के प्रहरियों को नमन करने की एक अनूठी मिसाल हरियाणा के फरीदाबाद में देखने को मिल रही है। गांधी कॉलोनी में आयोजित इस बार के गणेश उत्सव में आस्था और राष्ट्रप्रेम का गहरा तालमेल नजर आ रहा है। यहां स्थापित गणेश पंडाल को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की विषयवस्तु पर तैयार किया गया है। यह पूरी परिकल्पना 6 मई को सीमा पार आतंकी ठिकानों के विरुद्ध भारतीय सेना द्वारा संचालित सटीक और प्रभावी कार्रवाई से प्रेरित होकर तैयार की गई है, जिसे देखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं।
सैन्य साजो-सामान के मॉडल्स और सुरक्षा बलों के कटआउट्स
पंडाल के भीतर प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को सैन्य शक्ति और अनुशासन की झलक दिखाई देती है। सजावट में सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टर, रॉकेट लांचर, मिसाइल और बख्तरबंद टैंकों के विस्तृत मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं। आयोजन स्थल की दीवारों पर आधुनिक हथियारों से लैस सैनिकों के बड़े पोस्टर लगाए गए हैं, जबकि मुख्य प्रवेश द्वार पर एनएसजी कमांडो के चित्रों को प्रमुखता दी गई है। पूरे परिसर में राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत नारों के माध्यम से सुरक्षा बलों के पराक्रम को रेखांकित किया गया है।
चौबीस वर्षों की परंपरा में विशेष सैन्य सम्मान
इस आयोजन का संयोजन संभाल रही संस्था महाराष्ट्र मित्र मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र पांचाल ने बताया कि उनकी संस्था बीते 24 वर्षों से नियमित रूप से गणेश उत्सव मनाती आ रही है। इस वर्ष के विशेष विचार के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “हम सेना को कुछ नहीं दे सकते, लेकिन उनके साहस को सलाम कर सकते हैं।” इसी सोच के तहत पूरे परिसर का खाका सेना की बहादुरी को समर्पित किया गया। ग्वालियर से पहुंचे पंडित रविकांत गोस्वामी ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “हम सीमा पर जाकर लड़ नहीं सकते, लेकिन देश में रहकर अपने सैनिकों के प्रति सम्मान दिखा सकते हैं।”
सामाजिक सरोकार, विविधता और पर्यावरण सुरक्षा
यह धार्मिक आयोजन सामाजिक एकजुटता और पर्यावरण संरक्षण का भी सशक्त माध्यम बना है। उत्सव समिति में लगभग 100 से 125 सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हैं, जिनमें महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के मूल निवासी मिलकर काम कर रहे हैं। पंडाल परिसर में आम लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिए चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, जल प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए इस बार भगवान गणेश की साढ़े तीन फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण पूर्णतः प्राकृतिक मिट्टी से कराया गया है, जिससे विसर्जन के दौरान स्थानीय जलस्रोतों और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।

















