उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा करते हुए प्रदेशवासियों को संबोधित किया। अपने आधिकारिक अकाउंट से की गई इस पोस्ट में उन्होंने शिक्षा को लेकर राज्य की प्राथमिकताओं पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि जुलाई का महीना न केवल एक नए कैलेंडर माह की शुरुआत है, बल्कि यह लाखों बच्चों के भविष्य को संवारने और उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए विद्यालयों तक पहुंचाने के नए संकल्प का प्रतीक भी है।
स्कूल चलो अभियान की रूपरेखा
योगी आदित्यनाथ के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 01 जुलाई से 'स्कूल चलो अभियान' का दूसरा चरण अधिकारिक रूप से शुरू हो रहा है। इस अभियान का मूल लक्ष्य राज्य के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजना है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत स्तर पर यह सुनिश्चित करें कि बच्चे स्कूल को अपने दैनिक रूटीन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाएं। शिक्षा की गुणवत्ता और छात्र उपस्थिति को लेकर राज्य सरकार का यह प्रयास बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के बारे में
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है और क्षेत्रफल की दृष्टि से यह देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य माना जाता है। लखनऊ इस राज्य की प्रशासनिक और विधायी राजधानी है, जबकि प्रयागराज को इसकी न्यायिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। राज्य के प्रमुख शहरों में आगरा, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर शामिल हैं। भौगोलिक रूप से, यह राज्य उत्तर में नेपाल, उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, तथा पूर्व में बिहार और झारखंड के साथ अपनी सीमाएं साझा करता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। जहां कई उपयोगकर्ताओं ने इस शैक्षिक पहल की सराहना की है और इसे बच्चों के भविष्य के लिए जरूरी बताया है, वहीं कुछ लोगों ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती की कमी और अभिभावकों की निजी स्कूलों के प्रति बढ़ती प्राथमिकता जैसे मुद्दों पर अपनी चिंताएं और सुझाव भी व्यक्त किए हैं।




















