सोराब के गदार-गोंधन क्षेत्र में पाकिस्तानी वायुसेना की ओर से किए गए भारी हवाई हमलों के बाद रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान संगठन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि इन ताबड़तोड़ हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित करीब 30 आम नागरिकों की जान चली गई है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस बमबारी के बाद सामने आई तबाही की तस्वीरों ने गाजा में बने मानवीय संकट की याद दिला दी है, जिसे लेकर दुनिया भर में चिंता जताई जा रही है।
11 अगस्त को F-16 फाइटर जेट्स से बमबारी
संगठन के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई 11 अगस्त को की गई, जिसे स्थानीय बलूच समुदाय बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाता है। आरोपों में कहा गया है कि पाकिस्तानी वायुसेना ने इस हमले को अंजाम देने के लिए अमेरिका निर्मित F-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। इससे पहले इन आधुनिक लड़ाकू विमानों का प्रयोग खैबर-पख्तूनख्वा इलाके में सैन्य अभियानों के दौरान किया जाता रहा था, लेकिन इस बार उनका रुख बलूचिस्तान की आम आबादी की तरफ कर दिया गया।
अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से गुहार
इस घटना के तुरंत बाद बलूच नेतृत्व ने अमेरिका से पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य और रक्षा सहायता की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की है। मीर यार बलूच ने आरोप लगाया है कि वाशिंगटन से मिलने वाली सैन्य क्षमताओं का उपयोग निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा है। उन्होंने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से विशेष अपील करते हुए कहा कि अमेरिकी हथियारों और F-16 विमानों का इस्तेमाल बलूच नागरिकों के विरुद्ध तुरंत रोका जाना चाहिए।
स्पेयर पार्ट्स और इंजन सपोर्ट रोकने की मांग
मीर यार बलूच ने अमेरिका से पाकिस्तान को मिलने वाले रक्षा उपकरणों और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से F-16 फाइटर जेट्स के इंजन सपोर्ट, अपग्रेड कार्यक्रमों और मरम्मत सुविधाओं को बंद करने पर जोर दिया है। बलूच नेतृत्व का कहना है कि इस तरह की तकनीकी और रखरखाव सहायता मिलने से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता लगातार बनी रहती है, जिसका इस्तेमाल स्थानीय आबादी पर हमले करने के लिए किया जाता है।
युद्ध अपराध और आतंकवाद के प्रायोजक देश का दर्जा देने की मांग
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराने की मांग उठाई है। संगठन ने पाकिस्तान पर पूर्ण हथियार प्रतिबंध लगाने और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, बलूच नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से मांग की है कि पाकिस्तान को आतंकवाद का केंद्र और आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश घोषित किया जाए।
अफगानिस्तान और अंतरराष्ट्रीय अदालतों से मदद की आस
बलूच नेतृत्व ने अमेरिका के अलावा पड़ोसी देश अफगानिस्तान और अन्य वैश्विक शक्तियों से भी समर्थन मांगा है। संगठन का मानना है कि अफगानिस्तान एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त देश है, इसलिए वह और उसके सहयोगी बलूचिस्तान के मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालतों तथा वैश्विक संस्थाओं के समक्ष मजबूती से उठा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की नई रणनीति और पाकिस्तान का रुख
यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि बलूच नेतृत्व अब केवल पाकिस्तान के भीतर राजनीतिक विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाकर सीधी कार्रवाई की मांग कर रहा है। अमेरिका से सैन्य मदद बंद कराने की अपील इसी वैश्विक रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान की सरकार बलूचिस्तान की आजादी के दावों को पूरी तरह खारिज करती आई है और बलूचिस्तान को अपने देश का अभिन्न अंग मानती है।






















