शंघाई सहयोग संगठन का नेतृत्व अब औपचारिक रूप से पाकिस्तान के पास चला गया है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन के संपन्न होने के साथ ही यह जिम्मेदारी हस्तांतरित की गई। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने संगठन की कमान सौंपने का औपचारिक ऐलान करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही पाकिस्तान वर्ष 2026-27 के कार्यकाल के लिए इस प्रभावशाली क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष बन गया है। इस नए दायित्व के बाद अब 2027 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एससीओ का अगला राष्ट्राध्यक्ष शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
बिश्केक से इस्लामाबाद तक नेतृत्व का हस्तांतरण
बिश्केक में आयोजित शिखर सम्मेलन के साथ ही किर्गिस्तान का अध्यक्षीय कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा हो गया। किर्गिस्तान ने वर्ष 2025-26 के दौरान स्थायी शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ मिलकर विषय के तहत इस संगठन का नेतृत्व किया था। यह कार्यकाल इसलिए भी बेहद खास रहा क्योंकि इसी दौरान एससीओ की स्थापना के 25 वर्ष पूरे हुए थे। सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों ने बिश्केक घोषणापत्र समेत कुल 28 महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर अपनी सहमति जताई और हस्ताक्षर किए। इन दस्तावेजों में सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और आर्थिक सहयोग के कई महत्वपूर्ण रास्ते तय किए गए हैं।
सुरक्षा, तकनीक और जलवायु पर ऐतिहासिक समझौते
बिश्केक सम्मेलन में पास किए गए 28 समझौतों में क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अतिरिक्त, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग, साइबर सुरक्षा तथा सूचना सुरक्षा जैसे आधुनिक विषयों पर गहन मंथन हुआ। सदस्य देशों ने ऊर्जा सहयोग, परिवहन नेटवर्क के विस्तार, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों और जैव विविधता के संरक्षण पर भी एक मजबूत ढांचा तैयार करने का संकल्प लिया। पाकिस्तान अब इन्हीं तय प्राथमिकताओं को अगले एक साल के दौरान आगे बढ़ाएगा।
पाकिस्तान में बैठकों का दौर और इस्लामाबाद सम्मेलन
एससीओ की अध्यक्षता मिलने के बाद अब अगले एक साल तक विभिन्न उच्चस्तरीय और मंत्रीस्तरीय कार्यक्रमों की मेजबानी की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर होगी। इसके तहत सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों, व्यापार प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। हालांकि, सबसे बड़ा आयोजन सितंबर 2027 में इस्लामाबाद में प्रस्तावित राष्ट्राध्यक्षों का वार्षिक शिखर सम्मेलन होगा। पाकिस्तान की ओर से सभी सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से राष्ट्राध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से इस सम्मेलन में हिस्सा लेने इस्लामाबाद पहुंचते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा पर कूटनीतिक कयास
इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन की घोषणा के बाद से ही यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर 2027 में पाकिस्तान का दौरा करेंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच बने मौजूदा द्विपक्षीय तनाव को देखते हुए इस संभावित यात्रा पर वैश्विक कूटनीतिक विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं। भारत एससीओ को एक अत्यंत महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच स्वीकार करता है और इसकी बैठकों में निरंतर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। हालांकि, एससीओ के स्थापित नियमों के अनुसार किसी सदस्य देश में होने वाले सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व स्वयं प्रधानमंत्री करें, यह अनिवार्य नहीं होता है।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया भारत का आधिकारिक रुख
भारत सरकार अपनी प्राथमिकताओं और तत्कालीन कूटनीतिक परिस्थितियों के अनुसार ही अपने प्रतिनिधित्व का स्तर तय करती है। यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस्लामाबाद जाने का फैसला नहीं करते हैं, तो भारत किसी अन्य वरिष्ठ मंत्री या शीर्ष अधिकारी को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेज सकता है। पाकिस्तान को मिली अध्यक्षता पर भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान एससीओ की अध्यक्षता ग्रहण कर रहा है। भारत एससीओ को एक इकाई, एक महत्वपूर्ण संगठन के रूप में देखता है। जहां तक अलग-अलग देशों के साथ हमारे जुड़ाव का सवाल है, उचित समय पर उचित प्राधिकरण द्वारा निर्णय लिया जाएगा और हमारी भागीदारी उसी के अनुसार तय की जाएगी।”
व्लादिमीर पुतिन के पहले पाकिस्तान दौरे की संभावना
2027 के इस्लामाबाद सम्मेलन को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भागीदारी पर भी व्यापक चर्चा हो रही है। व्लादिमीर पुतिन ने अपने लंबे कार्यकाल में अब तक पाकिस्तान का कोई आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा नहीं किया है। चूंकि एससीओ एक बहुपक्षीय मंच है और द्विपक्षीय यात्राओं से अलग होता है, इसलिए यदि रूसी राष्ट्रपति इस सम्मेलन में भाग लेते हैं तो यह उनका पहला पाकिस्तान दौरा साबित होगा। यद्यपि हाल के वर्षों में रूस और पाकिस्तान के बीच आर्थिक व व्यापारिक संपर्क बढ़े हैं, लेकिन राष्ट्रपति पुतिन की संभावित यात्रा के संबंध में मास्को द्वारा अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।


















