इस्लामाबाद में सत्तारूढ़ शासन की स्थिरता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सार्वजनिक बयान जारी किया है। सरकार गिरने की खबरों को खारिज करते हुए मोहसिन नकवी ने कहा, "सरकार के कहीं जाने का कोई सवाल ही नहीं है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपना पूरा पांच साल का संवैधानिक कार्यकाल पूरा करेंगे।" हालांकि, इस तरह के बयानों और सफाई की जरूरत पड़ने से साफ संकेत मिलता है कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर स्थितियां पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों से देश में जगह-जगह हो रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उठापटक के बीच सरकार के भविष्य पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।
बयानों और राजनीतिक बयानबाजी से क्यों बढ़ीं सरकार गिरने की अटकलों की रफ्तार
राजनीतिक गलियारों में शहबाज शरीफ सरकार के भविष्य को लेकर तब हलचल बढ़ गई, जब खुद गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने शासन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। उन्होंने पिछले हफ्ते मौजूदा प्रशासनिक ढांचे को बुरी तरह विफल करार देते हुए व्यापक सुधारों और नए प्रांत बनाने की वकालत की थी। इसके तुरंत बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने एक बयान में कहा था कि शहबाज सरकार का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में सिस्टम के फेल होने और सरकार की विदाई को लेकर तरह-तरह के दावे किए जाने लगे।
मंत्रालयों की स्वतंत्र जांच और जवाबदेही पर गृह मंत्री का प्रस्ताव
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मोहसिन नकवी ने स्पष्ट किया कि वह अपने कामकाज के लिए केवल प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रति जवाबदेह हैं। उन्होंने सभी संघीय मंत्रालयों के कामकाज का स्वतंत्र एजेंसियों से ऑडिट कराने का प्रस्ताव रखा। नकवी ने कहा कि वह अपने गृह मंत्रालय समेत सभी सरकारी विभागों की समीक्षा कराने और उसकी रिपोर्ट जनता के सामने सार्वजनिक करने की मांग प्रधानमंत्री से करेंगे। गृह मंत्री होने के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन का पद संभाल रहे नकवी ने कहा कि उनके काम का आकलन करने का अधिकार सिर्फ देश के प्रधानमंत्री के पास है।
आठ दशक पुराने प्रशासनिक ढांचे और आर्थिक प्रगति पर उठाए गए सवाल
देश की प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों पर बात करते हुए मोहसिन नकवी ने कहा कि करीब 80 साल पुराना ढांचा देश को वह प्रगति नहीं दिला सका जिसकी जरूरत थी। अगर यह व्यवस्था सुचारू रूप से काम करती, तो आज देश आर्थिक और संस्थागत स्तर पर काफी आगे होता। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि वह रोजाना 14 से 16 घंटे तक काम करते हैं। यदि प्रशासनिक व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएं तो यही सरकार मौजूदा नतीजों की तुलना में हजार गुना बेहतर परिणाम दे सकती है।
पांच साल का कार्यकाल और पाकिस्तान का राजनीतिक इतिहास
शहबाज शरीफ सरकार के कार्यकाल को लेकर संशय इसलिए भी गहरा रहा है क्योंकि देश के राजनीतिक इतिहास में आज तक किसी भी निर्वाचित प्रधानमंत्री ने अपना 5 साल का संवैधानिक कार्यकाल पूरा नहीं किया है। हर बार सरकार के बीच में गिरने या हटाए जाने के पीछे सैन्य हस्तक्षेप और राजनीतिक अस्थिरता की भूमिका रही है। पिछले कुछ महीनों से जगह-जगह हो रहे प्रदर्शनों और आर्थिक संकट के बीच गृह मंत्री के सफाई देने के बावजूद राजनीतिक हलकों में सरकार के टिके रहने पर चर्चाएं जारी हैं।



















