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पिता की रिहाई के लिए सरकारी समझौते के पक्ष में हैं कासिम खान, जेल की परिस्थितियों पर उठाए गंभीर सवालपाकिस्तान
29 सित॰ 2026, 10:00 am (30 दिन पहले)· 1

पिता की रिहाई के लिए सरकारी समझौते के पक्ष में हैं कासिम खान, जेल की परिस्थितियों पर उठाए गंभीर सवाल

कासिम खान ने कहा है कि वह अपने पिता इमरान खान की जेल से रिहाई के लिए सरकारी समझौते के समर्थन में हैं, हालांकि उनका मानना है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बंद रहते उनके पिता ऐसी डील आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे कासिम खान ने अपने पिता की रिहाई के संबंध में बातचीत और समझौते की संभावना पर बड़ा बयान दिया है। कासिम खान का कहना है कि एक पुत्र के नाते वह निश्चित रूप से चाहेंगे कि उनके पिता जेल से सुरक्षित बाहर आ जाएं, भले ही इसके लिए मौजूदा सत्ता पक्ष के साथ कोई सहमति या समझौता करना पड़े। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पिछले सात महीनों से अपने पिता से संपर्क नहीं कर पाए हैं और उन्हें देश के भीतर चल रहे जमीनी राजनीतिक हालात की बारीक समझ भी नहीं है।

एक हालिया बातचीत के दौरान कासिम ने अपने पारिवारिक दर्द को साझा करते हुए कहा कि उनके लिए अपने पिता से दोबारा मुलाकात कर पाना दिनों-दिन बेहद मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे अत्यंत तनावपूर्ण माहौल में वह अपने पिता को सलाखों के पीछे से निकालने के लिए किसी भी व्यावहारिक विकल्प के पक्ष में खड़े होने को तैयार हैं। उनके अनुसार व्यक्तिगत स्तर पर वह इस बात से संतुष्ट होंगे यदि इमरान खान सत्ताधारी व्यवस्था के साथ किसी समझौते पर सहमत होकर अपनी रिहाई का मार्ग प्रशस्त कर लें।

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पिता के कड़े रुख और साथियों की कैद का पेच

कासिम खान ने साफ शब्दों में कहा कि यद्यपि वह व्यक्तिगत रूप से ऐसी किसी डील का स्वागत करेंगे, लेकिन उनके पिता के लिए इसे स्वीकार कर पाना कतई सरल नहीं होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इमरान खान के दृष्टिकोण से यह लड़ाई केवल उनकी अपनी व्यक्तिगत रिहाई या आराम की नहीं है। पाकिस्तान में इस समय कई अन्य राजनीतिक बंदी भी जेलों में बंद हैं और उनके अपने परिवार के कई सदस्य भी हिरासत का सामना कर रहे हैं। ऐसे व्यापक संकट के बीच अपने साथियों को पीछे छोड़कर केवल अपने लिए कोई विशेष रियायत हासिल करना उनके पिता के स्वभाव के बिल्कुल विपरीत है।

कासिम ने अपने पिता के दृढ़ संकल्प का उल्लेख करते हुए बताया कि इमरान खान असाधारण इच्छाशक्ति वाले नेता हैं। वह इस बात से भली-भांति अवगत हैं कि उनके साथ-साथ उनके राजनीतिक दल के तमाम कार्यकर्ता और सहयोगी भी सलाखों के पीछे संघर्ष कर रहे हैं। इसी सामूहिक जिम्मेदारी के भाव के चलते इमरान खान के लिए किसी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार करना लगभग नामुमकिन सा लगता है जो केवल उनके अपने हित तक सीमित हो।

न्यायिक आदेशों के उल्लंघन और संपर्क पर पाबंदी का आरोप

परिवार की पीड़ा को बयां करते हुए कासिम ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि देश की सर्वोच्च अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्हें अपने पिता से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने औपचारिक रूप से यह आदेश दिया था कि परिवार के सदस्यों को इमरान खान से संवाद करने की पूरी सुविधा दी जाए। इसके बावजूद अदालती फैसलों और दिशा-निर्देशों की निरंतर अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते पिछले सात महीनों से बातचीत का कोई भी सीधा माध्यम नहीं बन सका है।

कासिम के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा को दोबारा गरमा दिया है कि क्या शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के बीच किसी प्रकार का गुप्त समझौता प्रस्ताव मौजूद है। हालांकि इस तरह के किसी औपचारिक प्रस्ताव की स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि नहीं हो सकी है। इस विषय पर जब पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो उन्होंने भी तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

जेल में गिरती सेहत और कठिन परिस्थितियों पर चिंता

लंबे समय से कारागार में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य को लेकर उनके परिवार, वकीलों और समर्थकों में भारी चिंता बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों के दौरान उनकी सेहत लगातार बिगड़ने की बातें सामने आती रही हैं। ऐसी जानकारियां भी सार्वजनिक हुई हैं कि उनकी एक आंख की देखने की क्षमता पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ा है, जिसके चलते उन्हें विशेषज्ञ जांच के लिए कई बार अस्पताल ले जाना पड़ा है।

इसके अलावा उनके कानूनी सलाहकारों और परिजनों ने जेल के भीतर अमानवीय और अत्यंत सख्त व्यवहार का आरोप लगाया है। उनके अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री को बेहद संकरे और सीमित दायरे में बंद रखा गया है, जहां वह दिन के करीब 23 घंटे एक छोटी सी कोठरी में बिताने को विवश हैं। उस जगह पर न तो प्राकृतिक रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही उन्हें अन्य बंदियों से किसी भी तरह के मानवीय संपर्क की इजाजत है। दूसरी तरफ पाकिस्तानी प्रशासन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज किया है।

विरोध प्रदर्शन का टलना और भविष्य की कानूनी राह

इन तमाम राजनीतिक और पारिवारिक घटनाक्रमों के बीच इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने देशव्यापी स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की थी। लेकिन सरकार के साथ संवाद और संभावित बातचीत की संभावनाओं को देखते हुए इस प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

इमरान खान इस समय भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में कारावास की सजा भुगत रहे हैं। उन्हें पिछले वर्ष एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में चौदह वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। ऐसी स्थिति में उनके पुत्र द्वारा समझौते की संभावना पर दिया गया यह बयान पाकिस्तान के राजनीतिक परिदृश्य में बंद दरवाजों के पीछे चल रही बातचीत की अटकलों को नई दिशा दे रहा है।

सवाल-जवाब

कासिम खान ने अपने पिता की रिहाई के बारे में क्या कहा?
कासिम खान ने कहा कि एक बेटे के तौर पर वह चाहेंगे कि उनके पिता सरकार से समझौता करके जेल से बाहर आ जाएं।
क्या इमरान खान सरकार के साथ कोई डील आसानी से स्वीकार करेंगे?
कासिम के अनुसार, उनके पिता के लिए यह आसान नहीं होगा क्योंकि कई अन्य राजनीतिक कार्यकर्ता और रिश्तेदार भी जेलों में बंद हैं।
कासिम खान की अपने पिता से आखिरी बार कब बात हुई थी?
कासिम खान ने बताया कि पिछले सात महीनों से उनकी अपने पिता से कोई बातचीत नहीं हो पाई है।
इमरान खान की जेल की परिस्थितियों को लेकर क्या आरोप लगाए गए हैं?
आरोप है कि उन्हें दिन के 23 घंटे एक छोटी कोठरी में बिना प्राकृतिक रोशनी और मानवीय संपर्क के रखा जा रहा है, हालांकि अधिकारियों ने इसे नकारा है।
इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर क्या जानकारी सामने आई है?
रिपोर्टों के अनुसार उनकी एक आंख की रोशनी काफी प्रभावित हुई है और उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए कई बार अस्पताल ले जाया गया है।
इमरान खान को किस मामले में 14 साल की जेल की सजा मिली थी?
उन्हें पिछले साल भ्रष्टाचार के एक मामले में 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।
क्या पाकिस्तान सरकार ने किसी समझौते के प्रस्ताव की पुष्टि की है?
नहीं, समझौते के प्रस्ताव की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी इस पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
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टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·29 दिन पहले

एक बेटे का दर्द साफ़ झलक रहा है, जो अपने पिता को हर हाल में बाहर देखना चाहता है। लेकिन इमरान खान का जो मिजाज है, लगता नहीं कि वो अपने साथियों को छोड़कर अकेले कोई डील मानेंगे।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·29 दिन पहले

सात महीने से पिता से बात तक नहीं हुई, यह सोचकर ही सिहरन होती है।

Sophie Laurent@sophie-laurent·29 दिन पहले

कार्लोस, सात महीने तक परिवार से बात न होने देना तो बहुत क्रूर है, राजनीति अपनी जगह है पर इंसानी रिश्ते तो उससे ऊपर होने चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

सात महीने से पिता से बात न होना और ऊपर से अदालत के आदेशों का ऐसा खुला उल्लंघन, परिवार के लिए वाकई बहुत कष्टदायक होगा।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·29 दिन पहले

रविकेश जी, बात तो सही है आपकी, पर क्या वाकई कोई बेटा सात महीने तक पिता से मिलने की कोशिश न करे? थोड़ा अजीब लगता है।

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