फरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगाकोडरमा में बैग का कारोबार कैसे शुरू करें, जानिए निवेश से लेकर संभावित मुनाफे का पूरा गणितरॉबिनहुड के साथ रिपल की नई साझेदारी के बीच 1.33 डॉलर पर थमी एक्सआरपी की बढ़तसेबू में रक्षा सहयोग मजबूत करने पर भारत और फिलीपींस के बीच बनी सहमतिनागौर में मूंछों वाले नाचते बालाजी से लेकर एक आंख वाली प्रतिमा तक, जानिए इन प्रसिद्ध धामों का इतिहासराजौरी में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामदब्रिटिश पाउंड में लगातार चौथे दिन फिसलन, 1.3300 के स्तर पर टिका स्टर्लिंगसर्दियों में दुधारू मवेशियों के घटते दूध से बचाएंगे ये जरूरी उपाय, जाने बचाव और खानपान की सही तकनीकझुंझुनू में तेज रफ्तार थार ने बरपाया कहर, तीन राहगीरों को कुचलने के बाद चालक फरार
सऊदी अरब की हिफाजत के लिए हूतियों से टकराने को तैयार पाकिस्तानी सेना, असीम मुनीर के प्रवक्ता ने साफ किया रुखपाकिस्तान
20 अक्तू॰ 2026, 12:00 am (9 दिन पहले)· 0

सऊदी अरब की हिफाजत के लिए हूतियों से टकराने को तैयार पाकिस्तानी सेना, असीम मुनीर के प्रवक्ता ने साफ किया रुख

पाकिस्तानी सेना ने सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए यमन के हूतियों के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखने का संकेत दिया है।

यमन की तरफ से हूतियों के बढ़ते हुए हमलों के मद्देनजर इस्लामाबाद ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को बहुत मजबूती से दोहराया है। पाकिस्तानी सेना से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सऊदी धरती की क्षेत्रीय अखंडता, वहां की संप्रभुता और देश के पवित्र धार्मिक स्थलों की हिफाजत करने के लिए हर मुमकिन सहायता दी जा रही है और भविष्य में भी यह सिलसिला पूरी तत्परता के साथ जारी रखा जाएगा। हालांकि, इस बात का कोई विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है कि यह मदद तकनीकी रूप से किस प्रकार की होगी और इसका दायरा कितना व्यापक रहने वाला है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक डिजिटल समाचार पत्र को दिए गए साक्षात्कार के दौरान इन तमाम रणनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सऊदी अरब की हिफाजत और इस्लाम के दो सबसे बड़े पवित्र स्थलों की सुरक्षा इस्लामाबाद के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संवेदनशील मसले पर किसी भी तरह के समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बन सकती है। इसके साथ ही उन्होंने इस संभावना से भी इनकार नहीं किया कि यमन की आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त सरकार की तरफ से यदि प्रत्यक्ष रूप से सैन्य मदद की कोई औपचारिक मांग रखी जाती है, तो उस पर गंभीरता के साथ विचार किया जा सकता है। इस प्रकार के संकेतों से यह स्पष्ट रूप से जाहिर होता है कि पाकिस्तानी सेना यमन के विद्रोही गुटों के खिलाफ सीधी जंग के मैदान में उतरने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

सऊदी सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव पर इस्लामाबाद का रुख

सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर पाकिस्तानी सेना की तरफ से काफी सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से यह बताया कि खाड़ी देश की सुरक्षा के लिए जिस भी तरह के सहयोग की आवश्यकता महसूस होगी, वह बिना किसी हिचकिचाहट के मुहैया कराया जाएगा। हालांकि, जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या यह मदद सैनिकों की तैनाती के रूप में होगी या फिर केवल रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने तक सीमित रहेगी, तो उन्होंने किसी विशिष्ट रणनीति का खुलासा करने से परहेज किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि इस पूरे मामले में सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी सवाल या संशय स्वीकार्य नहीं है। हूतियों की तरफ से हो रही कार्यवाहियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने दोहराया कि पवित्र स्थलों की हिफाजत के लिए देश पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ये भी पढ़ें

त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के मायने

इसी साल अगस्त के महीने में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच एक महत्वपूर्ण संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते की बुनियादी शर्त के अनुसार यदि तीनों में से किसी भी एक सदस्य देश के ऊपर बाहरी हमला होता है, तो उसे गठबंधन में शामिल बाकी सभी देशों पर हुआ हमला माना जाएगा। इस व्यवस्था को लेकर पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने स्थिति साफ करते हुए यह बताया कि इस सैन्य साझेदारी का मुख्य उद्देश्य किसी अन्य देश के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना बिल्कुल नहीं है। उन्होंने इसे पूरी तरह से एक रक्षात्मक गठबंधन करार दिया जिसका मकसद केवल सदस्य देशों की सीमाओं और संप्रभुता की सुरक्षा करना है। जब उनसे यह पूछा गया कि सऊदी धरती पर हमले जारी रहने की स्थिति में क्या पाकिस्तान का समर्थन केवल रक्षात्मक उपायों तक ही सीमित रहेगा, तो उन्होंने इसी रक्षात्मक रुख को फिर से दोहराया।

ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क और बातचीत

हूतियों को ईरान की तरफ से मिल रहे समर्थन के परिप्रेक्ष्य में जब यह सवाल किया गया कि क्या इस्लामाबाद ने तेहरान के सामने इस मुद्दे पर कोई कड़ी चेतावनी पेश की है, तो प्रवक्ता ने बताया कि पाकिस्तान इस वक्त सभी संबंधित पक्षों के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए है। इस कूटनीतिक दायरे में ईरान भी पूरी तरह से शामिल है। उनका यह कहना था कि पाकिस्तान की तरफ से तमाम पक्षों को लगातार यही संदेश दिया जा रहा है कि वे संयम से काम लें और क्षेत्र में सुलग रहे तनाव को शांत करने की दिशा में कदम बढ़ाएं। क्षेत्रीय संघर्ष को बेवजह बढ़ावा देने से किसी भी मुल्क का भला नहीं होने वाला है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तमाम प्रकार के आपसी विवादों का निपटारा केवल और केवल शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए। इसके अलावा उन तमाम चर्चाओं का भी खंडन किया गया जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि इस नए रक्षा गठबंधन को विशेष रूप से ईरान या इजराइल के खिलाफ घेराबंदी करने के लिए तैयार किया गया है।

भविष्य के गठबंधन विस्तार और कूटनीतिक भविष्य की रूपरेखा

आने वाले समय में इस रक्षा समझौते के दायरे को और अधिक बढ़ाने को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। जब पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता से यह जानने की कोशिश की गई कि क्या मिस्र और सीरिया जैसे अन्य बड़े देश भी इस त्रिपक्षीय गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का कोई भी अंतिम निर्णय तीनों मौजूदा सदस्य देशों के राजनीतिक, रणनीतिक और सैन्य नेतृत्व की सहमति पर पूरी तरह निर्भर करेगा। उन्होंने एक बार फिर से इस बात पर बल दिया कि इस्लामिक दुनिया के तमाम देशों के बीच आपसी एकजुटता कायम रहना बेहद जरूरी है। क्षेत्रीय अस्थिरता को हवा देने के बजाय कूटनीतिक मंचों पर बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान खोजना ही एकमात्र स्थाई रास्ता है। कुल मिलाकर यह स्थिति बनती दिखाई दे रही है कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन तो दे दिया है, लेकिन उस मदद की वास्तविक सीमाओं और तौर-तरीकों को लेकर अभी भी रणनीतिक अस्पष्टता बनी हुई है।

सवाल-जवाब

पाकिस्तानी सेना के किस अधिकारी ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर बयान दिया है?
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने यह बयान दिया है।
यह बयान किस मीडिया संस्थान को दिया गया था?
यह साक्षात्कार डिजिटल समाचार पत्र 'इंडिपेंडेंट अरबिया' को रविवार को दिया गया था।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच रक्षा समझौता कब हुआ था?
इन तीनों देशों के बीच अगस्त के महीने में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
क्या पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई का संकेत दिया है?
हाँ, पाकिस्तान ने यमन की मान्यता प्राप्त सरकार से अनुरोध मिलने पर प्रत्यक्ष सैन्य सहायता पर विचार करने की बात कही है।
क्या इस गठबंधन का उद्देश्य ईरान या इजराइल के खिलाफ है?
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता किसी खास देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·8 दिन पहले

सऊदी अरब की हिफाजत के लिए पाकिस्तानी सेना का हूतियों से टकराने का संकेत बड़ा कदम है। क्या तुर्किये भी इस संभावित सैन्य कार्रवाई में साथ देगा?

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·8 दिन पहले

पाकिस्तान और सऊदी अरब का ये पैचअप तो समझ आता है, पर इसमें तुर्किये का क्या रोल होगा अगर यमन में बात सचमुच बिगड़ गई?

Li Wei@li-wei·8 दिन पहले

ओमर, तुर्किये सचमुच इसमें कूदेगा या बस कागजी समझौता बनकर रह जाएगा?

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·8 दिन पहले

पाकिस्तानी सेना का हूतियों के खिलाफ सीधे उतरने का संकेत मिडिल ईस्ट में तनाव को बहुत खतरनाक स्तर पर ले जा सकता है। वाशिंगटन में भी इस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते और इसके क्षेत्रीय प्रभावों पर गहरी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इसका असर अमेरिकी रणनीतिक हितों पर भी पड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

कार्लोस, सही कहा आपने, मिडिल ईस्ट के शेयर बाजारों और कमोडिटी मार्केट पर इसका असर पड़ना तय है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp