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तिब्बत पर चीन का कसता शिकंजा, निर्वासित सरकार को मजबूत समर्थन देने की उठी जोरदार मांगदुनिया
22 अग॰ 2026, 3:23 pm (1 दिन पहले)· 2

तिब्बत पर चीन का कसता शिकंजा, निर्वासित सरकार को मजबूत समर्थन देने की उठी जोरदार मांग

वाशिंगटन के एक संगठन की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन तिब्बत पर अपना राजनीतिक नियंत्रण लगातार मजबूत कर रहा है। इसके बाद अमेरिकी संसद से तिब्बती निर्वासित सरकार के समर्थन और मानवीय सहायता बहाल करने की अपील की गई है।

तिब्बत के क्षेत्रीय भूभाग पर चीन का बढ़ता शिकंजा वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बनता जा रहा है। शासन प्रणाली और प्रशासनिक महकमों में तिब्बती मूल के लोगों की भागीदारी को लगातार कम किया जा रहा है, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हो रही है। वाशिंगटन स्थित प्रमुख मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (ICT) की ताजा रिपोर्ट में इस बात का बड़ा खुलासा किया गया है कि किस प्रकार सुनियोजित रणनीतियों के तहत महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों से तिब्बतियों को किनारे किया जा रहा है।

प्रशासनिक पदों पर घटती हिस्सेदारी और आंकड़े

संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन विभिन्न कानूनों, पार्टी के निर्देशों और शीर्ष नियुक्तियों के जरिए तिब्बत पर अपनी पकड़ को और अधिक कसता जा रहा है। इस बात के पुख्ता आंकड़े पेश किए गए हैं कि साल 2026 में प्रांतीय और काउंटी स्तर की विभिन्न संस्थाओं जैसे कि पार्टी कार्यालय, सरकारी महकमे, सुरक्षा विभाग और न्यायपालिका से जुड़ी कुल 10 प्रमुख संस्थाओं के 240 वरिष्ठ नेतृत्व पदों में से महज 62 पदों पर ही तिब्बती अधिकारी काबिज थे। इसका सीधा अर्थ यह है कि इन महत्वपूर्ण पदों पर तिब्बतियों की कुल हिस्सेदारी गिरकर मात्र 25.8 प्रतिशत रह गई है, जबकि बाकी बचे 178 यानी 74.2 प्रतिशत पदों पर गैर-तिब्बती अधिकारियों की नियुक्तियां की गई हैं।

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धर्मशाला स्थित निर्वासित सरकार और भारत की भूमिका

इस पूरी रिपोर्ट के सामने आने के बाद इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत ने अमेरिकी संसद के समक्ष कई अहम मांगें रखी हैं। संगठन ने विशेष रूप से आग्रह किया है कि भारत और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में शरण लिए हुए तिब्बती समुदायों के लिए मानवीय सहायता और अन्य सभी प्रकार के वित्तीय सहयोग का पूरा पोषण तुरंत बहाल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) की कार्यक्षमता को बढ़ाने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करने की अपील भी की गई है। सीटीए मूल रूप से तिब्बत की निर्वासित सरकार है जिसका केंद्रीय मुख्यालय भारत के धर्मशाला शहर में स्थित है। यह संस्था दुनिया भर में फैले तिब्बती प्रवासियों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है और उनके लिए स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा तथा सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण जैसी जरूरी सामुदायिक सेवाएं संचालित करती है। तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु के रूप में 14वें दलाई लामा जाने जाते हैं, जबकि सिक्योंग यानी राष्ट्रपति इस निर्वासित सरकार के राजनीतिक प्रमुख होते हैं।

अमरीकी संसद से कानून पारित करने की पुरजोर अपील

इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के अनुसंधान एवं निगरानी प्रमुख भुचुंग त्सेरिंग ने मंगलवार को अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत तिब्बतियों को वह जरूरी आधार और जमीन उपलब्ध कराता है जिसके जरिए वे अपनी मर्जी और इच्छा के अनुसार कार्य कर सकते हैं। इसी मजबूत आधार की वजह से संगठन वहां अपनी पहुंच बना पाया है और उसका जमीनी स्तर पर उपयोग कर रहा है। त्सेरिंग ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका में तिब्बत के इस संवेदनशील मुद्दे को देश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का एक समान समर्थन हासिल है। अमेरिकी संसद के भीतर 'अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट' यानी तिब्बत के भविष्य को सुनिश्चित करने संबंधी अधिनियम पेश किया जा चुका है, जिसे अभी विधिवत मंजूरी मिलना बाकी है।

भुचुंग त्सेरिंग ने अमेरिकी संसद से पुरजोर आग्रह किया है कि दोनों दलों द्वारा समर्थित इस महत्वपूर्ण अधिनियम को जल्द से जल्द पारित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस अधिनियम के लागू हो जाने से सीटीए यानी केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को तिब्बती नागरिकों के लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए एकमात्र प्रतिनिधि के तौर पर आधिकारिक मान्यता मिल जाएगी, जिससे इस निर्वासित सरकार को वैश्विक मंच पर और अधिक कानूनी व राजनीतिक वैधता प्राप्त होगी।

सवाल-जवाब

तिब्बत पर नियंत्रण को लेकर हालिया रिपोर्ट किस संगठन ने जारी की है?
यह रिपोर्ट वाशिंगटन स्थित अधिकार संगठन 'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत' (ICT) द्वारा जारी की गई है।
तिब्बत की निर्वासित सरकार (CTA) का मुख्यालय कहां स्थित है?
तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय भारत के धर्मशाला शहर में स्थित है।
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता कौन हैं और सीटीए के राजनीतिक प्रमुख को क्या कहा जाता है?
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता 14वें दलाई लामा हैं, जबकि सीटीए के राजनीतिक प्रमुख को सिक्योंग यानी राष्ट्रपति कहा जाता है।
वर्ष 2026 में तिब्बत के वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर तिब्बतियों की हिस्सेदारी कितनी दर्ज की गई?
रिपोर्ट के अनुसार 2026 में वरिष्ठ नेतृत्व के 240 पदों में से केवल तिब्बतियों के पास 62 पद थे, जो कुल हिस्सेदारी का 25.8 प्रतिशत है।
अमेरिकी संसद में तिब्बत को लेकर कौन सा अधिनियम पेश किया गया है?
अमेरिकी संसद में 'अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट' पेश किया गया है जिसे दोनों दलों का समर्थन प्राप्त है।
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टिप्पणियाँ 2

Li Wei@li-wei·1 दिन पहले

यह रिपोर्ट बीजिंग की उस सुनियोजित रणनीति को उजागर करती है जिसके तहत तिब्बत के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे में स्थानीय प्रतिनिधित्व को घटाकर गैर-तिब्बती अधिकारियों को प्रमुख पदों पर बैठाया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि 2026 तक वरिष्ठ नेतृत्व के दो-तिहाई से अधिक पदों पर बाहरी अधिकारियों का कब्जा हो चुका है। अमेरिका और भारत जैसे देशों में सक्रिय निर्वासित संगठनों को मिलने वाले कूटनीतिक और मानवीय समर्थन से आने वाले समय में वैश्विक मंचों पर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·1 दिन पहले

इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि बीजिंग प्रशासन जनसांख्यिकी और प्रशासनिक नियंत्रण के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। धर्मशाला स्थित निर्वासित सरकार के लिए वाशिंगटन और नई दिल्ली का समर्थन तिब्बत के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करने में एक अहम कूटनीतिक कारक बनेगा। आने वाले समय में वैश्विक मंचों पर यह मुद्दा महाशक्तियों के बीच तनाव का एक नया केंद्र बन सकता है।

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