शहजाद पूनावाला ने विपक्षी दलों के आपसी तालमेल और कांग्रेस की कार्यशैली को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने क्षेत्रीय पार्टियों के भविष्य को लेकर चेतावनी देते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को खास सलाह दी है। उनका कहना है कि विपक्षी खेमे में असल चुनौती भारतीय जनता पार्टी से कहीं ज्यादा खुद कांग्रेस पार्टी की तरफ से आ रही है, जिसे क्षेत्रीय नेताओं को वक्त रहते समझना होगा।
सपा प्रमुख को सलाह और विपक्षी दलों में सीट का घमासान
शहजाद पूनावाला के अनुसार, समाजवादी पार्टी नेतृत्व को अपनी प्राथमिकताओं की समीक्षा करनी चाहिए। उनका कहना है कि अखिलेश यादव की असली राजनीतिक जंग बीजेपी से नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी से है। दोनों दल भीतर ही भीतर सीटों के बंटवारे और प्रभाव को लेकर खींचतान कर रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता जैसे मल्लिकार्जुन खड़गे अन्य नेताओं को क्षेत्रीय दलों के खिलाफ सक्रिय रहने के लिए आगे बढ़ाते हैं, जबकि उनका ध्यान सत्तारूढ़ पार्टी को घेरने पर बिल्कुल नहीं रहता।
क्षेत्रीय छत्रपों को कमजोर करने की रणनीति का आरोप
विपक्षी गठबंधन के मौजूदा हालात पर बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी गठबंधन के अन्य मजबूत नेताओं के जनाधार को समेटने में जुटे हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं के प्रभाव को सीमित किया गया और अब यही रुख अखिलेश यादव के प्रति अपनाया जा रहा है।
बिहार के विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वहां तेजस्वी यादव सही रास्ते पर बढ़ रहे थे, लेकिन राहुल गांधी उन्हें वोट चोरी के विमर्श में उलझा ले गए, जिससे उनकी चुनावी संभावनाओं को भारी नुकसान पहुंचा। उनका यह भी तर्क है कि कांग्रेस की रणनीति छोटी पार्टियों के राजनीतिक वजूद को खत्म कर उनके मूल वोट बैंक पर काबिज होने की है, भले ही केंद्र में किसी भी पार्टी की सरकार बनती रहे।
बीजेपी के नेतृत्व और यूट्यूबर की टिप्पणी पर जवाब
पार्टी नेतृत्व के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। जब उनसे पूछा गया कि नरेंद्र मोदी के बाद सबसे प्रमुख चेहरा कौन होगा, तो उन्होंने कहा कि संगठन की असली ताकत और सबसे बड़ा चेहरा उसका जमीनी कार्यकर्ता ही होता है। जब तक कार्यकर्ता किसी को आगे न बढ़ाए, तब तक कोई अकेला चेहरा तय नहीं होता।
एक चर्चा के दौरान जब 28 साल की यूट्यूबर रिया द्वारा उन्हें अंकल कहे जाने का मुद्दा उठा, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग 56 साल के नेताओं के नाम के आगे सम्मान से संबोधन जोड़ते हैं, वे 38 साल के व्यक्ति को अंकल बुला रहे हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए साफ किया कि वह केवल ज़ुवान के ही अंकल हैं।
पारिवारिक रिश्तों के अनुभव और विवाह न करने की वजह
गांधी और वाड्रा परिवार के साथ अपने भाई के ताल्लुकात पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे अप्रत्यक्ष संबंधों की वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस तरह के संपर्कों का दुरुपयोग होता है और उनके नाम पर कई तरह की झूठी अफवाहें फैलाई गईं। शीर्ष नेतृत्व के पास लगातार यह शिकायतें पहुंचाई जाती थीं कि वे नाम का अनुचित लाभ ले रहे हैं या दूसरों को धमका रहे हैं, जबकि उनका स्वभाव ऐसा कभी नहीं रहा।
38 वर्ष की उम्र में अब तक अविवाहित रहने को लेकर उन्होंने मजाकिया लहजे में जवाब दिया कि उनके सिर पर बाल जरूर अच्छे हैं लेकिन वे बाल-बच्चे नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि वे कभी शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहते क्योंकि उनकी दोनों जेबों में हमेशा दो फोन रहते हैं, जिन पर लगातार काम या वीडियो चलते रहते हैं। जब सारा समय डिजिटल व्यस्तताओं और काम में ही चला जाता है, तो किसी रिश्ते के लिए समय कहां बचता है।





















