संयुक्त राज्य अमेरिका के विधायी इतिहास में मिशिगन राज्य से एक नया अध्याय जुड़ गया है। वर्ष 2026 के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी अब्दुल अल-सयद ने सीनेट सीट पर शानदार सफलता दर्ज की। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी के माइक रोजर्स को चुनावी मुकाबले में शिकस्त दी। इस महत्वपूर्ण परिणाम के साथ वह अमेरिकी सीनेट की सदस्यता हासिल करने वाले पहले मुस्लिम नेता बन गए हैं। इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा, दोनों प्रमुख सदनों में अपना पूर्ण बहुमत भी सुनिश्चित कर लिया है।
हैदराबाद सांसद ने भारतीय सियासत से जोड़ा नतीजा
अब्दुल अल-सयद की इस अप्रत्याशित चुनावी कामयाबी पर भारत में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख तथा हैदराबाद के लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी राय जाहिर की। सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश साझा करते हुए उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम की तुलना सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश की आंतरिक राजनीति से कर दी। उन्होंने रेखांकित किया कि जिस तरह मिशिगन में यह चुनावी उपलब्धि हासिल की गई, उसी तर्ज पर भारत के सबसे बड़े सूबे में भी अल्पसंख्यक वर्ग को अपनी स्वतंत्र राजनैतिक जमीन तलाशनी चाहिए।
राजनीतिक हिस्सेदारी और आत्मसम्मान पर जोर
हैदराबाद के सांसद ने दशकों से चली आ रही पारंपरिक दलीय व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समय आ चुका है जब लोग केवल दूसरी पार्टियों के राजनीतिक मंच सजाने का काम बंद करें। अपनी बात रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया,
"अब दरी नहीं बिछाएंगे।"असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े संगठनों ने एक खास नाम को उपहास और कटाक्ष का जरिया बनाने का निरंतर प्रयास किया है। उनका मानना है कि अब अपनी स्वतंत्र लोकतांत्रिक ताकत दिखाने का दौर शुरू हो चुका है।



















