महाराष्ट्र की सियासत में विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने हालिया सुरक्षा हालात, बॉलीवुड कलाकारों को मिल रही चेतावनियों और मुंबई के प्रशासनिक कामकाज को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को राष्ट्रीय मुद्दों और लोकतंत्र के भविष्य पर खुली चर्चा करने का आह्वान भी किया है।
राष्ट्रीय मुद्दों और लोकतंत्र पर खुली बहस का आह्वान
संजय राउत ने स्पष्ट किया कि विपक्ष लोकतंत्र और देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर किसी भी स्थान पर बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरफ से सरकार को लगातार कई मामलों और लोकतंत्र के विषय पर चर्चा की चुनौती दी जा रही है। राउत का कहना है कि सरकार की तरफ से जो भी मंच तय किया जाएगा, वहां आकर बहस की जा सकती है।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो दल केंद्र और राज्य की सत्ता संभाल रहे हैं, वही लोकतंत्र बचाने के नाम पर सड़कों पर उतर रहे हैं। उनका कहना था कि आम लोग और विपक्षी दल लोकतंत्र की रक्षा की अपील कर रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष के लोग ज्ञानेश कुमार के समर्थन में लोकतंत्र बचाने का दावा कर रहे हैं।
सिनेमा जगत में सुरक्षा की स्थिति और भय का माहौल
महाराष्ट्र में सुरक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता ने हिंदी फिल्म उद्योग के माहौल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के जाने-माने अभिनेता अमिताभ बच्चन को आज बुलेटप्रूफ घेरे में रहना पड़ रहा है। महानायक का इस तरह पाबंदियों और भारी सुरक्षा में जीवन बिताना बेहद निंदनीय और शर्म की बात है। राउत ने आरोप लगाया कि पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री इस समय गंभीर भय और दहशत के साए में जी रही है।
अपराध जगत और सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए राउत ने कहा कि जिस शख्स की वजह से यह दहशत फैली है, वह साबरमती जेल के भीतर सरकारी पहरे में आराम से बंद है, जबकि जेल के बाहर बेखौफ तरीके से गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि अमिताभ बच्चन को धमकियां दी गईं, टाइगर श्रॉफ पर गोली चलाई गई और बाबा सिद्दीकी की जान ले ली गई। इसके अलावा बड़े बिल्डरों और कलाकारों को लगातार डराया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब नागरिक और कलाकार सुरक्षित नहीं हैं, तो पहले उनकी हिफाजत की जानी चाहिए, उसके बाद ही लोकतंत्र बचाने के बड़े दावे शोभा देते हैं।
बीएमसी प्रशासन और अदालत के निर्देशों की अवहेलना का आरोप
मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी के कामकाज पर हमला बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि स्थानीय निकाय में सत्ता पर बैठे लोगों को सत्ता का भारी घमंड हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां बैठे पदाधिकारी अदालत के आदेशों की बार-बार अनदेखी कर रहे हैं। राउत ने स्पष्ट किया कि दीया मिर्जा ने पटाखों और पर्यावरण से जुड़े प्रदूषण को लेकर जो चिंताएं सामने रखी थीं, उन्हें अदालत ने भी गलत नहीं माना है।
उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष मुल्क है और पर्यावरण की सुरक्षा सभी के लिए जरूरी है, लेकिन बीएमसी में काबिज भाजपा के प्रतिनिधि इन बातों को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखते। राउत ने चेतावनी दी कि यदि अदालत के निर्देशों और नियमों का इसी तरह उल्लंघन किया जाता रहा, तो यह सीधे तौर पर अवमानना का मामला बनेगा और इसके जिम्मेदार लोगों को जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।



















