उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी जमीनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। दिल्ली में आयोजित एक बड़ी राजनीतिक रैली के तुरंत बाद कांग्रेस पार्टी ने अपना पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश के सियासी दंगल पर केंद्रित कर दिया है। चुनावी तैयारियों का बिगुल फूंकते हुए प्रियंका गांधी ने मंगलवार को दिल्ली में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों के साथ व्यापक विचार विमर्श किया।
प्रियंका गांधी के आवास पर तीन घंटे चला सियासी मंथन
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रियंका गांधी के निजी आवास पर बुलाई गई यह महत्वपूर्ण बैठक लगभग 3 घंटे तक निरंतर चली। बैठक के दौरान प्रदेश संगठन की मौजूदा स्थिति और आगामी चुनौतियों पर बिंदुवार चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश प्रदेश कार्यकारिणी के नए सिरे से गठन को लेकर विभिन्न पदाधिकारियों से सुझाव मांगे गए, ताकि संगठनात्मक ढांचे को समय रहते मजबूत रूप दिया जा सके।
बैठक में जमीनी स्तर पर पकड़ बनाने के उद्देश्य से बूथ स्तर की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे ग्राम और वार्ड स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें, जिससे मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित किया जा सके। संगठन को धार देने के लिए आने वाले हफ्तों में कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं।
समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग पर विचार
इस उच्चस्तरीय बैठक में केवल आंतरिक सांगठनिक मुद्दों पर ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि चुनावी तालमेल पर भी गहरी बात हुई। समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन के पहलुओं और विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग के फार्मूले को लेकर भी नेताओं ने अपनी राय रखी। गठबंधन की स्थिति में किन सीटों पर पार्टी की दावेदारी मजबूत रहेगी, इस समीकरण को समझने का प्रयास किया गया।
उत्तर प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में विपक्षी एकता के समीकरण बेहद अहम माने जा रहे हैं। इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सीटों के बंटवारे और चुनावी साझा मंच को लेकर कोई असमंजस न रहे और समय रहते संयुक्त रणनीति पर सहमति बन सके।
अखिलेश यादव का विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान
एक तरफ जहां कांग्रेस अपने चुनावी तंत्र को मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बड़ा राजनीतिक फैसला सुनाया है। मंगलवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में खुद प्रत्याशी के रूप में नहीं उतरेंगे।
अखिलेश यादव ने अपने इस फैसले को अपने पिछले राजनीतिक अनुभवों से जोड़ते हुए कहा, "हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं, जब चुनाव नहीं लड़ते हैं। इसलिए वही करेंगे जो हमारे लिए शुभ है।" उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में भी वे प्रत्यक्ष विधानसभा चुनाव लड़े बिना मुख्यमंत्री बने थे और इस बार भी वे लोकसभा से सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पहुंचेंगे। इस घोषणा के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में विपक्षी खेमे की भविष्य की रणनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है।



















