उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक जमीन तैयार करने के मकसद से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 4 और 5 नवंबर को गोरखपुर के दो दिवसीय सांगठनिक प्रवास पर पहुंचे हैं। हालिया एमएलसी चुनाव परिणामों के बाद प्रदेश में उनका यह पहला दौरा माना जा रहा है। इस दौरान वे सड़क पर उतरकर पार्टी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा की अगुवाई करने के साथ ही वरिष्ठ नेताओं और संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठकों का दौर भी चलाएंगे। हालांकि, उनका यह दौरा ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रहा है जब पूरे पूर्वांचल में यूजीसी नीतियों, शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान मतपत्रों पर दर्ज विरोध और प्रयागराज में घटे थप्पड़ कांड को लेकर सामाजिक व राजनीतिक माहौल में काफी हलचल देखी जा रही है।
गोरखपुर में पदयात्रा और बैठकों का पूरा खाका
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अपने दो दिवसीय प्रवास के पहले दिन यानी 4 नवंबर को सीधे तौर पर जमीनी राजनीति और संगठनात्मक सक्रियता की शुरुआत कर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर गोरखपुर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह पदयात्रा महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के प्रांगण से आरंभ होकर शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र गोलघर स्थित ऐतिहासिक माता काली मंदिर से गुजरते हुए सरदार पटेल की प्रतिमा स्थल पर पहुंचकर संपन्न होगी।
इस पदयात्रा का सीधा उद्देश्य विपक्ष द्वारा राज्य की कानून व्यवस्था, हाल के छात्र आंदोलनों और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर बनाए जा रहे नैरेटिव का जवाब देना है। सड़क पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन करके पार्टी कार्यकर्ताओं में यह भरोसा पैदा करना चाहती है कि संगठन किसी भी मोर्चे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। पदयात्रा की समाप्ति के बाद नितिन नबीन एनेक्सी भवन में प्रबुद्ध वर्ग और शहर के बुद्धिजीवियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगे। इसके उपरांत देर शाम को उत्तर प्रदेश बीजेपी की कोर कमेटी की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई है, जिसमें मुख्यमंत्री और प्रदेश के शीर्ष नेताओं के साथ बंद कमरे में पूर्वांचल के सामाजिक संतुलन और आगामी चुनावी रोडमैप पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाएगा, जिसमें सवर्ण वर्ग की चिंताओं को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में उभरा आक्रोश
हाल ही में संपन्न हुए गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव के दौरान सामने आए अप्रत्याशित रुझानों ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींचा था। इस चुनाव में नीतिगत फैसलों से असंतुष्ट मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के बजाय सीधे तौर पर मतपत्रों पर बड़े अक्षरों में ‘UGC Roll Back’ लिखकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई। शिक्षकों और प्रबुद्ध मतदाताओं का यह कड़ा रुख विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों और आरक्षण व्यवस्था के प्रावधानों से जुड़ा हुआ था, जिसको लेकर सामान्य वर्ग और उच्च जातियों के युवाओं में लंबे समय से आंतरिक असंतोष देखा जा रहा है। मतपत्रों पर औपचारिक मतदान के स्थान पर इस तरह नीतिगत विरोध व्यक्त करने की घटना को संगठन के रणनीतिकार अपने पारंपरिक मतदाता आधार में आई बेचैनी के रूप में देख रहे हैं।
प्रयागराज का थप्पड़ कांड और गहराया विवाद
शिक्षक एमएलसी चुनाव के बाद इस सामाजिक तनाव को प्रयागराज में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम की घटना ने और हवा दे दी। एक नवंबर को प्रयागराज में ‘प्रबुद्ध महाकुंभ’ सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें राज्य के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मंच से उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उसी दौरान रोहित तिवारी उर्फ काका और एक अन्य व्यक्ति ने यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठा दिए। इसके तुरंत बाद जब पुलिस प्रशासन और सुरक्षाकर्मी उन युवकों को सभा स्थल से बाहर ले जा रहे थे, तभी स्थानीय बीजेपी पार्षद विनय मिश्रा उर्फ सिंटू ने रोहित तिवारी को खुलेआम थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से प्रसारित हो गया, जिससे सरकार की प्रबुद्ध वर्ग तक पहुंच बनाने की कवायद को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। यद्यपि पीड़ित रोहित तिवारी की शिकायत पर दरागंज थाने में बीजेपी पार्षद विनय मिश्रा के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई, लेकिन इस घटनाक्रम ने स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों के बीच रोष को और गहरा कर दिया।
विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी की टिप्पणी से बढ़ी आंतरिक खींचतान
प्रयागराज की घटना के तुरंत बाद बीजेपी के अपने ही जनप्रतिनिधि के सार्वजनिक रुख ने मामले को संगठनात्मक स्तर पर और संवेदनशील बना दिया। प्रयागराज शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी ने अपनी ही पार्टी के पार्षद के आचरण के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। विधायक वाजपेयी ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा कि यूजीसी की नीतियों का विरोध करना हर ब्राह्मण और सवर्ण का स्वाभाविक अधिकार है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए लिखा कि जिन लोगों ने अपने राजनीतिक संरक्षकों को खुश करने के लिए अपने ही समाज के व्यक्तियों के साथ हिंसा की है, उन्हें यह भलीभांति याद रखना चाहिए कि इतिहास में कोई भी अपने संतान का नाम ‘विभीषण’ नहीं रखता। एक सत्तारूढ़ विधायक द्वारा अपनी ही पार्टी के पदाधिकारी को सार्वजनिक मंच पर ‘विभीषण’ करार देने से यह स्पष्ट संकेत मिला कि पार्टी के भीतर सवर्ण वर्ग के मुद्दों और उनके सम्मान को लेकर असंतोष सतह पर आ चुका है। पूर्वांचल के राजनीतिक परिदृश्य में सवर्ण जातियां और प्रबुद्ध वर्ग लंबे समय से संगठन का आधार स्तंभ रहे हैं, ऐसे में इस वर्ग की असहमति को शांत करना राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए एक प्रमुख संगठनात्मक चुनौती बन गया है।



















