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बागी TMC सांसदों के मामले में फूंक-फूंककर कदम रखेंगे ओम बिरला, दोनों गुटों का पक्ष सुनने के बाद ही होगा फैसलाराजनीति
16 जून 2026, 12:32 pm (88 दिन पहले)· 2

बागी TMC सांसदों के मामले में फूंक-फूंककर कदम रखेंगे ओम बिरला, दोनों गुटों का पक्ष सुनने के बाद ही होगा फैसला

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला बागी TMC सांसदों के अलग गुट की मान्यता पर तभी फैसला लेंगे जब दोनों पक्षों की बात सुन ली जाएगी। यह निर्णय मानसून सत्र से पहले और केंद्रीय विधि मंत्रालय की कानूनी राय के आधार पर लिया जाएगा।

TMC के भीतर बनी टूट की स्थिति पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कोई हड़बड़ी में फैसला नहीं लेने जा रहे। उनका रुख साफ है कि बागी सांसदों से जुड़े मामले में अंतिम निर्णय तभी होगा, जब दोनों गुटों की बात विधिवत सुन ली जाएगी। इसी कड़ी में स्पीकर के कार्यालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC सांसदों के समूह को ईमेल भेजकर मीटिंग के लिए बुलाया है।

पहले ममता गुट की बात, फिर आगे का रास्ता

सूत्रों की मानें तो ममता गुट के सांसदों से मुलाकात के बाद ही बागी खेमे को लेकर कोई कदम उठाया जाएगा। दरअसल मामला तब गरमाया जब बागी गुट के 20 सांसदों ने स्पीकर से जाकर मुलाकात की और एक पत्र सौंपते हुए अपने गुट का NCPI में विलय कराने का अनुरोध किया।

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ममता खेमे से भी मांगी गई राय

सूत्रों के अनुसार, संतुलन बनाए रखने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से भी इस पूरे प्रकरण पर उसका पक्ष ईमेल के जरिये मांगा है। संसद से जुड़े सूत्रों ने पहले ही संकेत दिया था कि अलग हुए सांसदों को, अपेक्षाकृत कम चर्चित राजनीतिक दल 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय के बाद, एक स्वतंत्र समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर स्पीकर कानूनी राय ले सकते हैं।

मानसून सत्र से पहले आएगा निर्णय

सूत्रों का कहना है कि इस मांग पर फैसला संसद के मानसून सत्र शुरू होने से पहले ले लिया जाएगा। मानसून सत्र आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। अलग हुए गुट को मान्यता मिलेगी या नहीं, यह तय करने का आधार केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित राय होगी।

विधि मंत्रालय की भूमिका अहम

जानकारी के मुताबिक, मंत्रालय किसी वरिष्ठ कानूनी अधिकारी से परामर्श करने के बाद ही अपनी राय देगा। यह कानूनी राय इसलिए जरूरी मानी जा रही है ताकि अगर लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय को अदालत में चुनौती दी जाए, तो वह न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर टिक सके।

संविधान विशेषज्ञ की दो टूक

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पी.डी.टी. आचारी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा-4 का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विलय का अधिकार सिर्फ किसी राजनीतिक दल को है, अकेले सांसद या विधायक को नहीं। यानी कोई पार्टी ही दूसरी पार्टी में मिल सकती है।

आचारी ने TrendKia से बात करते हुए कहा, 'यदि किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व दूसरे दल में विलय का निर्णय करता है, तो उसके सांसदों और विधायकों को उस विलय से सहमत होना पड़ता है। लेकिन केवल सांसद या विधायक अपने स्तर पर किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय नहीं कर सकते। यही संवैधानिक प्रावधान है।'

कुल मिलाकर, बागी सांसदों का NCPI में विलय और अलग गुट के रूप में मान्यता का रास्ता अब इस बात पर टिका है कि विधि मंत्रालय की राय क्या कहती है और दोनों खेमों की दलीलें सुनने के बाद स्पीकर किस नतीजे पर पहुंचते हैं।

सवाल-जवाब

ओम बिरला बागी TMC सांसदों पर फैसला कब लेंगे?
सूत्रों के अनुसार यह फैसला संसद के मानसून सत्र शुरू होने से पहले लिया जाएगा, जो आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है।
बागी गुट की मांग क्या है?
बागी गुट के 20 सांसदों ने स्पीकर को पत्र सौंपकर अपने गुट का NCPI में विलय कराने और अलग समूह के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है।
फैसले का आधार क्या होगा?
अलग हुए गुट को मान्यता दी जाए या नहीं, यह केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित कानूनी राय के आधार पर तय होगा।
संविधान विशेषज्ञ इस पर क्या कहते हैं?
पी.डी.टी. आचारी के अनुसार दसवीं अनुसूची के पैरा-4 के तहत केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे दल में विलय कर सकता है, अकेले सांसद या विधायक नहीं।
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