तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा के भीतर घटे एक घटनाक्रम ने सियासी पारे को चढ़ा दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री विजय द्वारा सदन में दिए गए एक वक्तव्य के दौरान किए गए शारीरिक हाव-भाव को लेकर मुख्य विपक्षी दल डीएमके ने कड़ा विरोध जताया है। पुलिस विभाग के लिए अनुदान की मांगों पर हो रही चर्चा के समय मुख्यमंत्री विजय द्वारा अपने जबड़े को छूने के इशारे को विपक्ष ने डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की शारीरिक स्थिति पर टिप्पणी और उपहास के रूप में लिया। इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से स्थिति को स्पष्ट करते हुए किसी भी गलत मंशा से इनकार किया है।
सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री विजय का स्पष्टीकरण और सफाई
विधानसभा के भीतर पैदा हुए इस विवाद के बाद मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' का सहारा लेते हुए अपना पक्ष जनता और जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखा। उन्होंने अपने आधिकारिक संदेश में लिखा कि 7 सितंबर 2026 को विधानसभा सत्र के दौरान पुलिस विभाग की अनुदान मांगों पर जवाब देते समय उनसे जो हाव-भाव दिखा, वह पूरी तरह से स्वाभाविक और सहज प्रतिक्रिया थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस हाव-भाव के पीछे किसी भी तरह का छिपा हुआ मकसद या दुर्भावना शामिल नहीं थी।
मुख्यमंत्री विजय ने आगे अनुरोध करते हुए कहा कि उनके इस सहज हाव-भाव को किसी व्यक्ति विशेष को चोट पहुंचाने, अपमानित करने या नाराज करने के प्रयास के रूप में बिल्कुल न देखा जाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का वे पूरा सम्मान करते हैं और उनका इरादा कभी भी सदन के किसी सदस्य की शारीरिक बनावट या स्थिति का उपहास उड़ाना नहीं रहा है।
विपक्षी दलों का विरोध और आपातकाल के दौर का स्मरण
मुख्यमंत्री के इस इशारे पर वामपंथी दल सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता पी. शनमुगम ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि या मुख्यमंत्री द्वारा किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट या पुरानी चोट का उपहास उड़ाना अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय व्यवहार है। शनमुगम ने जोर देकर कहा कि विधानसभा जैसी पवित्र जगह को व्यक्तिगत हमलों या किसी के रूप-रंग पर टिप्पणी करने का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
अपने वक्तव्य के दौरान सीपीएम नेता ने देश में लागू हुए आपातकाल के कठिन दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार लोकतंत्र की रक्षा के लिए उस समय व्यापक स्तर पर जन-आंदोलन हुए थे, जिसके बाद दमनकारी नीतियां अपनाई गई थीं। उन्होंने एमके स्टालिन को 'मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट' (मीसा) के तहत हिरासत में लिए जाने और उस दौरान उन पर हुए शारीरिक हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले नेता की शारीरिक स्थिति का मजाक बनाना किसी भी लिहाज से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सरकारिया आयोग की रिपोर्ट और भ्रष्टाचार के आरोपों पर घमासान
सदन के भीतर केवल हाव-भाव पर ही नहीं, बल्कि अतीत के भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर भी सत्तापक्ष और विपक्ष में जबरदस्त जुबानी तीर चले। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के दस्तावेजों और दशकों पुरानी सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पिछली डीएमके सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि 1976 की जस्टिस सरकारिया आयोग की रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि पर अपने पद का दुरुपयोग करने के स्पष्ट निष्कर्ष शामिल थे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दावा किया कि सरकारिया आयोग की रिपोर्ट में सरकारी ठेकों और अनुबंधों के आवंटन के बदले में 'पार्टी फंड' की मांग करने के मामलों को उजागर किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत के वे तरीके आज भी जारी दिखते हैं। जब इन तीखे आरोपों का जवाब देने के लिए डीएमके नेता उदयनिधि ने अध्यक्ष से बोलने की अनुमति मांगी, तब सदन में जारी भारी हंगामे और शोर-शराबे के कारण स्पीकर ने उन्हें तुरंत अपनी बात रखने की इजाजत नहीं दी, जिससे विवाद और गहरा गया।
कांग्रेस संग रणनीतिक बैठक और जल्द उपचुनाव की मांग
विधानसभा के भीतर छिड़े इस सियासी संग्राम के साथ-साथ सत्ताधारी दल ने अपने राजनीतिक समीकरणों को साधने की दिशा में भी अहम कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री विजय की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार में शामिल अपनी प्रमुख सहयोगी पार्टी कांग्रेस के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य का आकलन करना और विधानसभा की खाली पड़ी सीटों पर आगामी रणनीति तय करना था।
बैठक के दौरान सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने राज्य में खाली पड़ी विधानसभा सीटों पर जल्द से जल्द उपचुनाव कराए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। गठबंधन ने भारत निर्वाचन आयोग से यह मांग करने का निर्णय लिया है कि उपचुनाव की तारीखों का ऐलान बिना किसी विलंब के किया जाए। नेताओं का मानना है कि समय पर चुनाव होने से सरकार द्वारा कराए गए विकास कार्यों और उसकी नीतियों के प्रति जनता का विश्वास मजबूती से सामने आ सकेगा।



















