उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाल ही में 'छात्रों की गूंज' नाम का एक आयोजन किया गया, जो काफी चर्चा में रहा। इस कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बड़ी संख्या में युवाओं और विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया। मौसम खराब होने और तेज बारिश के बावजूद, भारी तादाद में छात्र अपनी समस्याओं को रखने के लिए वहां पहुंचे। यह कार्यक्रम राजस्थान के कोटा में आयोजित होने वाले संवादों की तर्ज पर किया गया था, जिसका उद्देश्य सीधे छात्रों की परेशानियों को समझना था।
डिग्रियों की माला और व्यवस्था पर सवाल
इस संवाद में सबसे अधिक ध्यान पिथौरागढ़ के निवासी मनोज कुमार ने खींचा। मनोज अपने गले में डिग्रियों और तमाम प्रशस्ति पत्रों की एक लंबी माला पहनकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे। उन्होंने राहुल गांधी के सामने अपना दुख व्यक्त करते हुए बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से तंत्र की मार झेल रहे हैं। उन्होंने खुलासा किया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उन्हें कई बार सम्मानित किया है, लेकिन इन प्रशंसा पत्रों के बावजूद उन्हें आज तक रोजगार नसीब नहीं हुआ।
पेपर लीक ने तोड़े सपने
मनोज ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि उन्होंने उत्तराखंड चयन आयोग और पटवारी भर्ती परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण इम्तिहान दिए थे। उन्होंने कहा, 'पेपर लीक की घटनाओं ने मेरा सिस्टम से मोहभंग कर दिया और मैंने प्रतियोगिता परीक्षाएं देना छोड़ दिया।' मनोज ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह देहरादून में थे, तो उन्हें पुलिस द्वारा दर्ज एक झूठे मुकदमे का शिकार होना पड़ा। उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी, हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें पूरी तरह से बेदाग साबित किया।
कानूनी लड़ाई और मुआवजे की मांग
इस लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण मनोज के जीवन के कई कीमती वर्ष बर्बाद हो गए। उन्होंने सात साल तक फर्जी मुकदमे के खिलाफ संघर्ष किया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले गए। उन्होंने इस दौरान पिथौरागढ़ में 37 दिनों तक भूख हड़ताल भी की थी। उन्होंने कहा कि सुदूर सीमावर्ती गांवों से बड़े सपने लेकर शहर आने वाले युवाओं के साथ अगर ऐसा बर्ताव होता है, तो उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नौकरी और पिछले वर्षों में हुए आर्थिक नुकसान के एवज में मुआवजे की पुरजोर मांग की है।
अन्य युवाओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन
कार्यक्रम में पौड़ी के राठ क्षेत्र से आए दिगंबर सिंह नेगी ने भी शिरकत की, जो पिछले 26 वर्षों से कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं। नेगी ने बताया कि वह पार्टी के हर आयोजन में पूरी निष्ठा के साथ शामिल होते हैं। हालांकि यह कार्यक्रम मुख्य रूप से छात्रों की समस्याओं पर केंद्रित था, लेकिन नेगी ने पेपर लीक और महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों के खिलाफ छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई।
शिक्षा व्यवस्था और छात्र आत्महत्याओं पर चिंता
देहरादून की 12वीं कक्षा की छात्रा उन्नति ने भी कार्यक्रम में व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष जाहिर किया। उन्नति ने बताया कि वह भविष्य में सरकारी नौकरी के लिए तैयारी करना चाहती हैं। उन्होंने मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा देने के तुरंत बाद पेपर लीक की खबर आना किसी भी छात्र को मानसिक रूप से तोड़ देता है। उन्होंने कहा, 'आत्महत्या जैसे कदम तभी उठाए जाते हैं जब कोई व्यक्ति निराशा के गहरे गर्त में होता है।' उन्होंने देहरादून की रिया नाम की छात्रा का उदाहरण दिया जिसने हाल ही में अपनी जान दे दी थी। उन्नति ने राहुल गांधी के पास आने का कारण यह बताया कि वह छात्रों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाते हैं।


















