हिमाचल प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 के आखिर में होना है, यानी अभी इसमें करीब डेढ़ साल बाकी हैं। लेकिन इतने पहले से ही प्रदेश की सियासत में एक सवाल बार-बार उठ रहा है — अगर भाजपा सत्ता में लौटी तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा। इसी अटकलबाजी पर अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान बड़ा संकेत देकर तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है।
नड्डा ने किसके नाम पर लगाई मुहर
नड्डा ने दो टूक कहा कि उनकी सक्रिय जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजनीति में है। साथ ही उन्होंने यह भी इशारा कर दिया कि 2027 के चुनाव में प्रदेश भाजपा का मुख्य चेहरा नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ही होंगे। अपनी भूमिका को लेकर उन्होंने साफगोई से कहा, मैं हिमाचली हूं और दिल्ली में रहकर काम करूंगा।
यानी प्रदेश की कमान संभालने की चर्चाओं पर उन्होंने खुद ही विराम लगा दिया।
जनता के भरोसे का जिक्र
अपने संबोधन की शुरुआत में नड्डा ने देवभूमि हिमाचल प्रदेश की जनता के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों ने बार-बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व, भारतीय जनता पार्टी की विकासवादी राजनीति और सुशासन के मॉडल पर अपना अटूट विश्वास दिखाया है।
इस भरोसे का सबसे बड़ा उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि लगातार तीन लोकसभा चुनावों में हिमाचल की चारों सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। नड्डा के मुताबिक इससे साफ है कि प्रदेश की जनता विकास, राष्ट्रहित और जनकल्याण की राजनीति के साथ मजबूती से खड़ी है।
पंचायत और निकाय चुनाव को बताया जनमत-संग्रह
नड्डा ने हाल ही में हुए पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों का भी हवाला दिया, जिनमें भाजपा को व्यापक जनसमर्थन मिला। उन्होंने इसे महज चुनावी कामयाबी मानने से इनकार किया और कहा कि यह प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता का स्पष्ट जनमत-संग्रह है। उनका कहना था कि यह जनादेश एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रही विकास यात्रा पर लोगों के विश्वास को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस सरकार की नाकामियों के प्रति बढ़ते जनअसंतोष का सीधा प्रमाण भी है।
आखिर क्यों मायने रखता है यह बयान
हिमाचल में भाजपा के सीएम चेहरे को लेकर अक्सर कयास लगते रहे हैं। इन्हीं चर्चाओं में जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर के प्रदेश की कमान संभालने की बातें भी शामिल रहती थीं। नड्डा के ताजा बयान ने फिलहाल इन सभी अटकलों पर पानी फेर दिया है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि हिमाचल में भाजपा ने शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल को दो बार से ज्यादा मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं दिया। धूमल को तीसरी बार जरूर पार्टी का चेहरा बनाया गया था, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में वे खुद हार गए और इसी वजह से सीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंच सके। तब पार्टी ने जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी।













