मंगलवार को बिहार विधान परिषद की कार्यवाही की शुरुआत बेहद हंगामेदार रही। राज्य की वित्तीय व्यवस्था और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स लगाने के प्रस्ताव को लेकर सदन में भारी राजनीतिक घमासान देखने को मिला। मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ विधान पार्षद सुनील सिंह ने सरकार के इस कदम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के माध्यम से उन्होंने सदन के सभी निर्धारित कार्यों को रोककर तुरंत इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। विपक्षी विधायकों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए सरकार की नीतियों पर चौतरफा हमला बोल दिया और नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए।
कॉलोनियल राज से ग्रामीण कर नीति की तुलना
विपक्ष के इस विरोध का मुख्य चेहरा बने राजद नेता सुनील सिंह ने ग्रामीण इलाकों में संपत्ति कर लागू करने के प्रस्ताव को पूरी तरह से जनविरोधी करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि बिहार की अधिकांश आबादी गांवों में बसती है और वहां के किसान पहले से ही कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। सुनील सिंह ने अपना लहजा तीखा करते हुए इस नई कर नीति की तुलना सीधे तौर पर औपनिवेशिक काल से कर दी। उन्होंने कहा कि गांवों में घर-घर जाकर टैक्स वसूलने का यह नया नियम उसी तरह का है, जैसे कभी अंग्रेज यहां के गरीब और बेबस लोगों का आर्थिक शोषण किया करते थे। उनका आरोप था कि सरकार आम आदमी की जेब खाली करने के लिए यह योजना बना रही है।
आर्थिक संकट के आरोपों के बीच विपक्ष का विरोध प्रदर्शन
सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन का तरीका भी काफी आक्रामक रहा। विपक्ष के तमाम माननीय सदस्य अपने हाथों और कपड़ों पर काले बिल्ले लगाकर पहुंचे थे, जो सरकार के खिलाफ उनके कड़े असंतोष का प्रतीक था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार गहरे वित्तीय संकट से गुजर रही है और कई महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के पास विकास योजनाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक बजट ही नहीं बचा है। विधायकों का कहना था कि सरकार अपनी इस आर्थिक विफलता को छिपाने और खजाना भरने के लिए ग्रामीण जनता पर जबरन नए टैक्स थोपने का प्रयास कर रही है। अपनी मांगों को लेकर अड़े ये सदस्य मुख्य सभापति के आसन के बिल्कुल सामने वेल में उतर आए, जिसके कारण काफी देर तक सदन की सामान्य कार्यवाही बाधित रही।
सीएम सम्राट चौधरी का कड़ा स्पष्टीकरण
विपक्ष के लगातार बढ़ते आक्रोश और नारेबाजी के बीच, सत्ता पक्ष को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए आगे आना पड़ा। भारी हंगामे के बीच सीएम सम्राट चौधरी अपनी सीट पर खड़े हुए और उन्होंने विपक्षी सदस्यों को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए सरकार का बचाव किया। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि आम जनता और विशेष रूप से समाज के सबसे गरीब तबके पर कोई नया आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा। अपनी बात को विस्तार देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम क्षेत्रों और स्वच्छता सुविधाओं के लिए पहले से ही कुछ टैक्स लागू हैं, और वर्तमान चर्चा केवल उसी व्यवस्था को लेकर है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर प्रस्तावित नियमों से किसी को परेशानी होती है, तो सरकार उस पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि गरीबों पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा स्पष्ट है।
सदन की सहमति के बिना लागू नहीं होगा कोई नियम
स्थिति को पूरी तरह से शांत करने और सरकार की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने एक कड़ा और आधिकारिक आश्वासन देते हुए कहा कि लोकतंत्र में कोई भी कानून बिना पारदर्शिता और बहस के लागू नहीं किया जा सकता। डिप्टी सीएम ने सदन को स्पष्ट शब्दों में भरोसा दिलाया कि किसी भी नए कानून या संशोधन को बिना सदन की सहमति और गहन विचार-विमर्श के पारित नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि बिहार के ग्रामीणों पर किसी भी प्रकार का नया टैक्स लागू करने से पहले इस पवित्र सदन में एक-एक बिंदु पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, ताकि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो।

















