देश की राजधानी में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन के दौरान बीते दिन पुलिस और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच भारी टकराव देखने को मिला, जिसमें पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले पर सीधे तौर पर केंद्र सरकार को घेरते हुए तीखे सवाल किए हैं।
लोकसभा स्पीकर से मुलाकात और अस्पताल का दौरा
दिन की शुरुआत में राहुल गांधी ने संसद भवन पहुंचकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से खास मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सदन के भीतर NEET पेपर लीक मामले पर तुरंत चर्चा कराने का कड़ा आग्रह किया। इसके फौरन बाद, वह अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ उन घायल छात्रों का हाल जानने के लिए सीधे आरएमएल अस्पताल की ओर निकल गए, जो पुलिस के साथ हुई हिंसक झड़प में चोटिल हुए थे। वहां उन्होंने एक-एक कर सभी घायलों से बात की और उनकी स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। इस मुलाकात के बाद राहुल गांधी का रुख सरकार के प्रति और भी ज्यादा आक्रामक हो गया।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर खड़े किए सवाल
राहुल गांधी ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की हालत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा देश इस बात से वाकिफ है कि हमारा एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था को जस का तस चलाया जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर देश के प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि आखिर वह इस गंभीर मामले पर चुप क्यों बैठे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत आगे आकर पीड़ित छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस द्वारा छात्रों को पीटे जाने की घटनाओं पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की हरकतों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए, क्योंकि यह पूरी तरह से अनुचित और गलत है।
केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की जोरदार मांग
विपक्षी नेता ने केवल बयानबाजी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि जिम्मेदार मंत्रियों को पद से हटाने की भी जोरदार वकालत की। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान को केवल एक मध्यस्थ करार देते हुए कहा कि उन्हें हर हाल में अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि छात्रों पर जो लाठियां बरसी हैं, उसके पीछे धर्मेंद्र प्रधान का नहीं, बल्कि गृह मंत्री का हाथ है। इसलिए गृह मंत्री को भी अपनी जिम्मेदारी लेते हुए फौरन पद छोड़ना चाहिए। उन्होंने अपनी बात को और आगे बढ़ाते हुए तर्क दिया कि चूंकि गृह मंत्री सीधे प्रधानमंत्री के अधीन काम करते हैं और उन्हें ही रिपोर्ट करते हैं, इसलिए यह पूरी तरह से स्पष्ट होना चाहिए कि देश में आखिर क्या चल रहा है और इसके लिए शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदारी लेनी ही होगी।




















