उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में हुई मस्जिद की तोड़फोड़ का मामला अब सिर्फ सरकारी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने सूबे के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम के बीच मुस्लिम वोट बैंक के एकमात्र रहनुमा होने को लेकर सीधी जंग छिड़ गई है। सहारनपुर की इस मस्जिद पर उत्तर प्रदेश सरकार के बुलडोजर एक्शन के बाद एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कैराना से सपा की युवा सांसद इकरा हसन पर बेहद कड़े शब्दों में हमला बोला है। शादाब चौहान के इस आक्रामक तेवर ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
सपा नेताओं की चुप्पी पर खड़े किए गए सवाल
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने सहारनपुर ध्वस्तीकरण की पूरी घटना को लेकर समाजवादी पार्टी की भूमिका और उसकी सियासी नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा सवाल पूछा कि आज उत्तर प्रदेश विधानसभा और संसद में समाजवादी पार्टी के पास कुल 37 सांसद और 100 विधायक मौजूद हैं। जब सहारनपुर में एक मस्जिद पर बुलडोजर चलाया गया और मुस्लिम समुदाय के सामने एक बड़ा संकट पैदा हुआ, तब ये तमाम जनप्रतिनिधि आखिर कहां गायब हो गए? उन्होंने आगे सवाल किया कि क्या अखिलेश यादव अपने सभी सांसदों और विधायकों का बड़ा काफिला लेकर खुद सहारनपुर पहुंचेंगे या फिर सिर्फ अपने कमरों में बैठकर इस पूरे घटनाक्रम का तमाशा देखते रहेंगे?
मुस्लिम वोटों के एकतरफा समर्थन पर तकरार
शादाब चौहान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय लंबे समय से लगातार समाजवादी पार्टी को अपना एकतरफा और मजबूत वोट देता चला आ रहा है। इसके बावजूद जब-जब मस्जिदों पर सरकारी कार्रवाई होती है, मदरसों से जुड़े विवाद खड़े होते हैं, मुस्लिम युवाओं को शिकंजे में कसा जाता है, बुलडोजर का एक्शन होता है या फिर मॉब लिंचिंग जैसी संवेदनशील घटनाएं सामने आती हैं, तब-तब समाजवादी पार्टी और उसके बड़े नेताओं की आवाज बेहद धीमी पड़ जाती है। उनका कहना है कि संकट की हर घड़ी में यह पार्टी अल्पसंख्यक समाज की अपेक्षाओं पर खरी उतरने में नाकाम साबित हुई है।
सांसद इकरा हसन पर कड़ा तंज
एआईएमआईएम प्रवक्ता ने सपा की तेजतर्रार और युवा सांसद इकरा हसन की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की है। प्रशासनिक दावों के अनुसार, जब इकरा हसन सहारनपुर जाने का प्रयास कर रही थीं, तब उन्हें उनके आवास पर ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया था। इस स्थिति पर चुटकी लेते हुए शादाब चौहान ने कहा कि केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंस्टाग्राम पर अपने बयान जारी करने या छोटी-छोटी रील्स बनाने से राजनीति नहीं चलाई जा सकती। जीवन के मुश्किल वक्त में जमीन पर उतरकर पीड़ित लोगों के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा होना पड़ता है। उन्होंने इकरा हसन को रील मास्टर करार देते हुए सलाह दी कि उन्हें सोशल मीडिया की दुनिया से बाहर निकलकर एक असल और जमीन से जुड़ा हुआ नेता बनना चाहिए।
आंदोलन न करने पर उठाए गए सवाल
शादाब चौहान ने इस बात पर भी जोर दिया कि यदि एक चुनी हुई सांसद को प्रशासन द्वारा उनके घर में नजरबंद किया जा रहा था, तो पूरी समाजवादी पार्टी को इसके विरोध में सड़कों पर उतरकर एक बड़ा और प्रभावशाली आंदोलन खड़ा करना चाहिए था। पार्टी के नेताओं को शांति से चुपचाप बैठने के बजाय मुखर होकर विरोध जताना चाहिए था, लेकिन ऐसा कुछ भी जमीन पर देखने को नहीं मिला। इस दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शादाब चौहान ने एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी और सवाल किया कि क्या अब मुसलमानों के लिए देश में मजहबी आजादी का संवैधानिक हक भी नहीं बचा है तथा हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चलाया जा रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा सियासी समीकरण
आगामी वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस तीखी जुबानी जंग को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे हमले के पीछे एक गहरी चुनावी रणनीति छिपी हुई है। एक तरफ जहां अखिलेश यादव पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के समीकरण के जरिए एक बड़ा सामाजिक गठबंधन तैयार करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ओवैसी की पार्टी लगातार मुस्लिम मतदाताओं को यह एहसास कराने में जुटी है कि संकट के कठिन समय में समाजवादी पार्टी कभी उनके साथ खड़ी नहीं होती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पैठ बनाने की कोशिश
कैराना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ जैसे अहम जिलों में मुस्लिम आबादी चुनावी नतीजों में बेहद निर्णायक भूमिका निभाती है। इकरा हसन को विशेष रूप से निशाना बनाकर ओवैसी की पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पैठ और मजबूत करने की जुगत में है। ओवैसी की पार्टी लगातार ऐसा नैरेटिव गढ़ रही है कि खुद को सेक्युलर कहने वाली तमाम बड़ी पार्टियां मुसलमानों के वास्तविक और जरूरी मुद्दों पर बोलने से हमेशा कतराती हैं। सहारनपुर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण की इस घटना ने जहां एक तरफ योगी सरकार के कड़े रुख को स्पष्ट रूप से उजागर किया है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और ओवैसी की पार्टी के बीच छिड़े इस सियासी संग्राम ने आगामी चुनाव से पहले विपक्षी एकता में बड़ी सेंध लगा दी है।






















