कांच की बोतल में चमकता सुनहरा शहद देखकर खरीदार अक्सर मान लेते हैं कि सामान बिल्कुल शुद्ध है, जबकि हकीकत में सिर्फ रंग, बनावट या मिठास चखकर शहद की असलियत परखना मुमकिन नहीं है। बाजार में बिकने वाले कई ब्रांड के शहद में चीनी के घोल, कॉर्न सिरप या दूसरे सस्ते मीठे तत्व मिलाए जाने की शिकायतें पुरानी हैं, इसलिए ग्राहकों के मन में यह सवाल बार-बार उठता है कि घर लाई गई बोतल असली है या नकली। दुकान की चमकदार पैकिंग या ऊंची कीमत भी इस बात की गारंटी नहीं देती कि अंदर रखा शहद पूरी तरह शुद्ध ही होगा।
सोशल मीडिया पर पानी के गिलास, माचिस की तीली और अंगूठे पर बूंद टपकाकर शहद परखने के कई नुस्खे वायरल होते रहते हैं, मगर इनमें से कोई भी घरेलू तरीका आखिरी सबूत नहीं माना जा सकता। FSSAI खुद घर पर आजमाए जा सकने वाले कुछ त्वरित संकेत बताता है, लेकिन पूरी तरह पक्का फैसला वैज्ञानिक लैब जांच से ही निकलता है।
पानी में डालकर देखने वाला तरीका क्या कहता है
FSSAI के DART परीक्षणों में शक्कर के घोल की मिलावट भांपने के लिए यह सुझाव दिया गया है कि एक साफ गिलास पानी में शहद की एक बूंद छोड़ी जाए। एजेंसी के मुताबिक शुद्ध शहद पानी में जल्दी नहीं घुलता और अपनी बनावट बनाए रखता है, जबकि मिलावटी नमूना उसमें फैलने या घुलने लगता है। इसे केवल पहला संकेत मानना चाहिए, क्योंकि सिर्फ इसी एक जांच के आधार पर किसी बोतल को पूरी तरह शुद्ध घोषित कर देना जल्दबाजी होगी।
आग या माचिस से जलाने वाला परीक्षण कितना भरोसे लायक
शहद की जांच के लिए आग या माचिस की तीली इस्तेमाल करने का तरीका भी इंटरनेट पर खूब चलता है। FSSAI के पुराने DART संदर्भ में शहद लगी रुई को जलाने का जिक्र मिलता है, जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा होने पर नतीजा अलग निकलने की बात कही गई है। इसके बावजूद घर पर की गई यह आजमाइश मिलावट की पूरी और सटीक तस्वीर पेश नहीं करती, इसलिए इसी एक परीक्षण को आखिरी सबूत मानकर बोतल खरीदने या लौटाने का फैसला लेना ठीक नहीं होगा।
रंग और गाढ़ेपन के भरोसे फैसला न लें
हर बोतल का शहद एक जैसे रंग या एक जैसी गाढ़ी बनावट का हो, यह जरूरी नहीं। इसकी बनावट और रंगत उस इलाके के फूलों और पौधों पर निर्भर करती है जहां से मधुमक्खियां रस जुटाती हैं। FSSAI के तय मानकों में भी शहद परखने के लिए कई अलग-अलग भौतिक और रासायनिक पैमाने शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि गहरे रंग को असली और हल्के रंग को नकली समझना उचित तरीका नहीं है। इसी तरह बोतल में क्रिस्टल जम जाना भी अपने आप में मिलावट की निशानी नहीं माना जाना चाहिए, यह शहद की एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया भी हो सकती है, जो ठंड के मौसम में अक्सर देखने को मिलती है।
पक्की तस्दीक के लिए लैब जांच ही सबसे मजबूत रास्ता
शुद्धता को लेकर गंभीर शक हो तो वैज्ञानिक जांच ही सबसे विश्वसनीय विकल्प बचता है। FSSAI की 2024 वाली शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पाद मैनुअल में C3/C4 शुगर जांच, आइसोटोप अनुपात और फॉरेन ओलिगोसैकेराइड्स जैसी तकनीकों का उल्लेख मिलता है। एजेंसी ने शहद के लिए जो गुणवत्ता मानक बनाए हैं उनमें डायस्टेज एक्टिविटी, 13C/12C अनुपात और राइस सिरप से जुड़े मार्कर जैसे पैमाने शामिल हैं। इसका सीधा मतलब है कि घर पर किए गए छोटे-मोटे परीक्षण सिर्फ शुरुआती अंदाजा दे सकते हैं, अंतिम प्रमाण नहीं, और गंभीर मामलों में सैंपल को मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में भेजना ही सही रास्ता है।
खरीदते वक्त पैकिंग पर इन बातों पर नजर रखें
बोतल उठाने से पहले पैकिंग पर FSSAI लाइसेंस नंबर, लेबल पर लिखी सामग्री और निर्माता की पूरी जानकारी जरूर पढ़ें। बहुत सस्ते दाम में मिलने वाले उत्पाद को झटपट फायदे का सौदा मान लेना भी समझदारी नहीं है, क्योंकि कम कीमत अक्सर मिलावट की आशंका को बढ़ा देती है। आखिरकार शहद की असली पहचान उसकी चमकदार बोतल से नहीं, बल्कि सही लेबलिंग, भरोसेमंद ब्रांड और जरूरत पड़ने पर करवाई गई सही जांच से होती है।


















