दिल्ली स्थित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने शैक्षणिक जगत के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्थान की कई पीढ़ियां एक मंच पर एकत्र हुई हैं। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश की बदलती आर्थिक स्थिति, पूर्व की चुनौतियों और वर्तमान विकास यात्रा को विस्तार से रखा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान विपक्ष के रवैये पर तीखा प्रहार किया और राजनीतिक विरोधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
विपक्ष को बताया नाराज फूफा
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने विपक्ष की तुलना एक नाराज फूफा से करते हुए कहा कि ये लोग हर सकारात्मक पहल और विकास कार्यों में बाधा डालने की कोशिश करते रहते हैं। जिस तरह किसी समारोह में नाराज फूफा हर बात पर आपत्ति जताते हैं और अनावश्यक सवाल पूछते हैं, ठीक उसी तरह विपक्षी दल भी हर नए कदम पर अनर्गल सवाल खड़े करते हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी चुनौती के सामने झुकने वाले नहीं हैं और 'माई-बाप' संस्कृति को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ एक मजबूत दीवार बनकर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि उनके भीतर पूरी हिम्मत है और वे अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर जनता के सामने खड़े हैं।
आर्थिक सुधारों और पुरानी स्थितियों का जिक्र
देश के आर्थिक सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने वर्ष 2013 के दौर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस समय देश की विकास दर निचले स्तर पर थी और महंगाई आसमान छू रही थी। युवाओं को उस दौर की परिस्थितियों से अवगत होना चाहिए ताकि वे वर्तमान और अतीत के बीच के अंतर को समझ सकें। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत को दुनिया भर में कमजोर अर्थव्यवस्थाओं के समूह में गिना जाता था, लेकिन आज वही भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोण पर जोर देते हुए दोहराया कि वे गिलास को हमेशा आधा भरा हुआ यानी आधा पानी और आधा हवा से युक्त देखते हैं, जो निराशा से बाहर निकलकर आशा की किरण देखने का प्रतीक है।
सुरक्षा और दिमागी नक्सल पर बयान
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद के मोर्चे पर देश की सफलताओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद के खिलाफ कड़े और निर्णायक निर्णय लिए जाते हैं। जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक के क्षेत्रों में शांति का माहौल मजबूत हुआ है और नक्सलवाद की रीढ़ टूट चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए अपने उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने 'दिमागी नक्सल' शब्दावली का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह की मानसिकता को बढ़ावा दे रहे हैं और एक विशेष एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं, उन पर पैनी नजर रखी जा रही है। होम्योपैथिक दवा का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जब इस तरह की औषधि दी जाती है तो शुरुआत में बीमारी के लक्षण और अधिक स्पष्ट नजर आने लगते हैं, और उनके द्वारा इस शब्द का इस्तेमाल करते ही वे लोग स्वतः ही बेनकाब होकर सामने आ गए।



















