देशभर में शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग और नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन जी युवाओं द्वारा किए गए बड़े प्रदर्शनों के बाद युवा राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जैसे जेन जी समर्थित संगठन देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ राजस्थान में भी काफी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, राजस्थान की विशाल 200 सदस्यीय विधानसभा में इस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व बेहद सीमित है। 8.5 करोड़ से अधिक की कुल आबादी वाले राजस्थान में करीब 2.5 करोड़ युवा जेन जी श्रेणी में आते हैं, लेकिन राज्य की विधानसभा में इस पूरी पीढ़ी की ओर से सिर्फ एक विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ही सदन में पहुंचे हैं।
शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी: 200 सदस्यों वाली विधानसभा में इकलौता जेन जी प्रतिनिधि
वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे नागरिकों को जेन जी श्रेणी में गिना जाता है। वर्ष 2026 के वर्तमान समय के अनुसार, इस पीढ़ी के युवाओं की आयु 14 वर्ष से 29 वर्ष के बीच है। भारत को दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है और राजस्थान में भी जेन जी की आबादी ढाई करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। इतने बड़े जनसांख्यिकीय आधार के बावजूद, राजस्थान विधानसभा की 200 सीटों में से केवल एक सीट पर जेन जी विधायक का कब्जा है। बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने वाले रविन्द्र सिंह भाटी इस पीढ़ी का इकलौता चेहरा हैं। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार और बैठकों में भारी युवा भीड़ जुटाकर निर्दलीय के रूप में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
विधानसभा रिकॉर्ड और सबसे युवा विधायकों का आधिकारिक विवरण
राजस्थान विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध व्यक्तिगत रिकॉर्ड के अनुसार, रविन्द्र सिंह भाटी की जन्म तिथि 30 जनवरी 1998 है। इस रिकॉर्ड के मुताबिक, वह वर्तमान राजस्थान विधानसभा के सबसे युवा विधायक हैं। उनके बाद दूसरे सबसे कम उम्र के विधायक बीकानेर जिले की कोलायत विधानसभा सीट से अंशुमान सिंह भाटी हैं। अंशुमान सिंह भाटी का जन्म 12 दिसंबर 1995 को हुआ था। वे राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय देवी सिंह भाटी के पौत्र और दिवंगत पूर्व सांसद महेंद्र सिंह भाटी के पुत्र हैं। 1995 में जन्म होने के कारण अंशुमान सिंह भाटी 1997 से शुरू होने वाले जेन जी मानक से ठीक बाहर रह जाते हैं। वहीं, संसदीय राजनीति की बात करें तो राजस्थान से लोकसभा में एकमात्र जेन जी प्रतिनिधि भरतपुर की सांसद संजना जातव हैं। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित भरतपुर सीट से चुनी गईं संजना जातव का जन्म 1 मई 1998 को हुआ था।
युवा आंदोलनों के बाद राजनीतिक दलों के नजरिए में बड़ा बदलाव
हाल के दिनों में नीट परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ हुए जेन जी आंदोलनों और सीजेपी जैसी युवा संस्थाओं की लगातार बढ़ती सक्रियता ने मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को अपनी रणनीतियां बदलने पर मजबूर कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस सहित सभी प्रमुख दलों ने जेन जी को लेकर अपने पारंपरिक दृष्टिकोण में बदलाव किया है। अब इन युवाओं को महज एक वोट बैंक के बजाय नीति-निर्माण और संगठन में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर सरकारें इस युवा पीढ़ी के साथ सीधे संवाद के नए रास्ते तलाश रही हैं।
भजनलाल सरकार की पहल और आगामी चुनावों में युवाओं को साधने की होड़
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं को लोकतंत्र और शासन व्यवस्था से जोड़ने के लिए विशेष पहल शुरू की है। राज्य सरकार 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक नए मतदाता को ग्रीटिंग कार्ड के माध्यम से बधाई संदेश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए लिखित आमंत्रण भेज रही है। इसके साथ ही, आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों में भाजपा तथा कांग्रेस दोनों ही दल जेन जी युवाओं को आनुपातिक प्रतिनिधित्व देने के वादे कर रहे हैं। कांग्रेस ने युवाओं को धरातल पर आगे लाने के उद्देश्य से बाकायदा ‘पंचायत टास्क फोर्स अभियान’ की शुरुआत की है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जेन जी उम्मीदवारों की मांग काफी बढ़ेगी, क्योंकि बालिग हो रहे नए मतदाताओं की नाराजगी अब किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनावी नतीजों को प्रभावित करने का दम रखती है।



















