संसद के मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिल रहा है। विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाजी की वजह से संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। विपक्षी दल अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े विषय पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहे हैं और इस मामले पर गृह मंत्री के वक्तव्य की जिद पर अड़े हैं। इस जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के रवैये पर कड़ा एतराज जताया है।
सदन में मंत्रियों के जवाब देने के नियमों पर मंत्री का स्पष्टीकरण
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि संसदीय परंपराओं के अनुसार जिस विषय से संबंधित जो मंत्रालय होता है, उसके प्रभारी मंत्री ही सदन में उत्तर देने के लिए अधिकृत होते हैं। उन्होंने कहा कि कौन सा मंत्री कब सदन में आएगा और कौन किस सवाल का जवाब देगा, यह तय करना विपक्ष का काम नहीं है। सरकार की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि संसद का कामकाज सामान्य रूप से चल सके, परंतु विपक्षी दलों के अड़ियल रुख के कारण अब तक गतिरोध खत्म करने की सभी कोशिशें निष्फल साबित हुई हैं।
विपक्ष के हंगामे और मांगों पर केंद्रीय मंत्री का तीखा पलटवार
विपक्षी दलों की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि सदन के भीतर केवल नारेबाजी करना और शोर-शराबा पैदा करना विपक्ष की नियमित आदत बन चुका है। गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जब गृह मंत्री सदन में अपना वक्तव्य रखेंगे, तब विपक्षी दल उनका जवाब सुनने की स्थिति में नहीं रहेंगे। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि गृह मंत्री का नाम सुनते ही उग्रवादी और आतंकवादी कांपने लगते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन गृह मंत्री सदन में बोलना शुरू करेंगे, उस दिन विपक्ष के पास उनके तथ्यों का सामना करने का कोई रास्ता नहीं बचेगा।
संसदीय कार्यवाही और जारी गतिरोध की स्थिति
लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्षी सांसद अपनी मांगों को लेकर लगातार तख्तियां लेकर वेल में आकर नारेबाजी कर रहे हैं। सरकार की ओर से कार्यसूची के अनुसार विधायी कामकाज निपटाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन हंगामे के कारण बार-बार बैठकों को स्थगित करना पड़ रहा है। संसदीय कार्य मंत्री ने दोहराया है कि सरकार नियमानुसार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को यह अधिकार नहीं है कि वह अपनी शर्तों पर मंत्रियों की उपस्थिति तय करे।



















