बेमतलब जुमला 'वास्टेगुना हुइया' कैसे बना जेन Z आंदोलन का प्रतीक, धर्मेंद्र प्रधान को देना पड़ा इस्तीफामीन राशिफल 29 जुलाई 2026: खुद पर बेवजह दबाव न डालें, टाल दें बड़े आर्थिक फैसलेबेलेघाटा से तृणमूल कांग्रेस नेता राजू नस्कर पुलिस कस्टडी में, रंगदारी और धमकी के आरोपों पर बड़ा एक्शनवाइट हाउस वार्ता: यूक्रेन में पैट्रियट मिसाइल उत्पादन लाइसेंस के लिए वॉशिंगटन पहुंचे जेलेंस्की, ट्रंप से करेंगे अहम बैठकउत्तर प्रदेश में एक ही छत के नीचे बैठेंगे सभी जज, योगी आदित्यनाथ ने दिए एकीकृत कोर्ट परिसर के निर्देशकॉलेज में कैसे गढ़ा जाता है नैतिक चरित्र: शोध में छात्रों ने बताया क्लासरूम के अनुभवों का सचएनआईआई और नॉटिंघम के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, Ark1 एंजाइम को ब्लॉक कर मलेरिया परजीवी को खत्म करने की जगी उम्मीदअमेरिका में टी-मोबाइल का नेटवर्क हुआ ठप, 60 हजार से अधिक यूजर परेशानगूगल सर्च पर दिखे एंथ्रोपिक क्लॉड के प्राइवेट चैट लिंक, एआई डेटा सुरक्षा पर सामने आई बड़ी खामीयूरोप में जलते जंगलों के बीच फ्रांस के आसमान में पहली बार दिखे आग वाले खतरनाक बादल
खटीमा बनाम चंपावत: 2027 में किस सीट से ताल ठोकेंगे सीएम धामी, तीन दिवसीय दौरे ने तेज की अटकलेंराजनीति
18 जून 2026, 2:59 am (41 दिन पहले)· 0

खटीमा बनाम चंपावत: 2027 में किस सीट से ताल ठोकेंगे सीएम धामी, तीन दिवसीय दौरे ने तेज की अटकलें

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खटीमा दौरे और स्थानीय भाजपा नेताओं की अपीलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव वे चंपावत के बजाय खटीमा से लड़ सकते हैं।

उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव भले ही 2027 में होना है, लेकिन सियासी सरगर्मी अभी से तेज हो चली है। इसकी वजह बने हैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिनके खटीमा विधानसभा क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे ने प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। दौरे के दौरान भाजपा के कई नेताओं ने अलग-अलग मंचों से खुलकर मुख्यमंत्री से यह गुजारिश की कि वे 2027 में खटीमा से ही चुनावी मैदान में उतरें।

क्यों उठ रहा है सीट बदलने का सवाल

धामी ने इन अपीलों पर कोई दो-टूक राजनीतिक ऐलान तो नहीं किया, पर उनके तेवर और मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कयासों को हवा दे दी है। चर्चा यह है कि आने वाले चुनाव में वे चंपावत के बजाय अपने पुराने गढ़ खटीमा का रुख कर सकते हैं। मुख्यमंत्री का खटीमा में दोबारा सक्रिय होना ही इस अटकल की सबसे बड़ी बुनियाद बन गया है।

ये भी पढ़ें

खटीमा से धामी का पुराना रिश्ता

खटीमा मुख्यमंत्री के सियासी सफर की शुरुआती जमीन रही है। वर्ष 2012 में वे पहली बार इसी सीट से विधायक चुने गए और 2017 में दोबारा यहीं से जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2022 के चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने उन्हें प्रदेश की कमान सौंप दी। इसके बाद सरकारी जिम्मेदारियों के चलते क्षेत्र में उनकी आमद-रफ्त कुछ घट गई।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यही घटती सक्रियता और साथ में स्थानीय भाजपा नेताओं की आपसी गुटबाजी, दोनों मिलकर 2022 में खटीमा में उनकी हार की बड़ी वजह बनीं। हालांकि सीट हारने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा कायम रखा और एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी। इसके बाद धामी ने चंपावत विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर अपनी कुर्सी बरकरार रखी और एक नया रिकॉर्ड भी बनाया।

तीन दिनी दौरे ने बढ़ाया सियासी पारा

हाल ही में मुख्यमंत्री खटीमा क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने कई सरकारी कार्यक्रमों, पार्टी के आयोजनों और गैर-राजनीतिक समारोहों में हिस्सा लिया। इन्हीं मंचों से भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर उनसे 2027 में खटीमा से लड़ने की अपील दोहराई। दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री ने खटीमा में एक रोड शो भी किया, जिसकी गूंज खटीमा से लेकर देहरादून तक राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रही है।

नेताओं का न्योता और धामी का भावुक जवाब

इस दौरे में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या समेत भाजपा के कई नेताओं ने मुख्यमंत्री को 2027 के चुनाव में खटीमा से उतरने का औपचारिक न्योता दिया। जवाब में धामी ने भावुक होते हुए कहा कि खटीमा उनके लिए महज एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि उनके दिल में बसी हुई जगह है। मुख्यमंत्री के इस बयान और नेताओं की लगातार अपीलों के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या 2027 में धामी चंपावत छोड़कर खटीमा से चुनाव लड़ेंगे।

सवाल-जवाब

सीएम धामी 2027 में किन दो सीटों के बीच चर्चा में हैं?
चर्चा खटीमा और चंपावत विधानसभा सीटों को लेकर है, जिनमें से किसी एक से वे 2027 का चुनाव लड़ सकते हैं।
धामी का खटीमा से क्या पुराना रिश्ता है?
वे 2012 और 2017 में खटीमा से विधायक चुने गए थे, हालांकि 2022 में वे यह सीट हार गए थे।
धामी फिलहाल किस सीट से विधायक हैं?
2022 में खटीमा हारने के बाद उन्होंने चंपावत विधानसभा सीट से उपचुनाव जीता था।
किस नेता ने उन्हें खटीमा से लड़ने का न्योता दिया?
जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या समेत भाजपा के कई नेताओं ने उन्हें खटीमा से चुनाव लड़ने का औपचारिक न्योता दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR