अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद शीर्ष स्तर पर बड़ा राजनीतिक फेरबदल सामने आ रहा है। प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन सदन के रिपब्लिकन नेतृत्व से अलग होने जा रहे हैं। जॉनसन अगली कांग्रेस में सदन के अल्पसंख्यक नेता बनने की दौड़ में शामिल नहीं होंगे और न ही इस पद के लिए अपने साथियों का समर्थन जुटाएंगे। इस निर्णय की जानकारी बुधवार को ऐसे दो लोगों ने अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर साझा की जो पूरी प्रक्रिया से सीधे वाकिफ हैं। जॉनसन के इस कदम के साथ ही प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के सबसे बड़े पद को हासिल करने की नई होड़ छिड़ गई है।
साधारण सदस्य के तौर पर सदन में बने रहेंगे जॉनसन
शीर्ष कमान से हटने के बावजूद माइक जॉनसन प्रतिनिधि सभा से पूरी तरह बाहर नहीं हो रहे हैं। वह लुइसियाना राज्य से सदन के एक सामान्य सदस्य के तौर पर काम जारी रखेंगे। जॉनसन ने हालिया चुनाव में श्रेवेपोर्ट क्षेत्र वाले जिले से जीत हासिल की है और इस तरह वह अपने आठवें कार्यकाल के लिए सदन पहुंचे हैं। उनका यह फैसला ठीक ऐसे वक्त में आया है जब चुनाव परिणामों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी सदन में बहुमत का आंकड़ा पार कर सत्ता पक्ष बनने की ओर बढ़ चुकी है। सदन के नियंत्रण में आए इस बड़े बदलाव ने रिपब्लिकन पार्टी को अपनी रणनीति बदलने और विपक्ष में बैठने के लिए एक नया अल्पसंख्यक नेता चुनने के मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
नेतृत्व के लिए स्टीव स्केलिस और जिम जॉर्डन के बीच मुकाबला तय
वाशिंगटन में अगले सप्ताह होने वाली नवनिर्वाचित सदस्यों की बैठक में रिपब्लिकन सांसद अपने नए नेता के नाम पर मुहर लगाएंगे। इस नए मुकाबले में पार्टी के दो पुराने और जाने-माने चेहरे एक बार फिर आमने-सामने आने की संभावना है। लुइसियाना से सांसद स्टीव स्केलिस और ओहायो से सांसद जिम जॉर्डन दोनों ही इससे पहले भी सदन के सबसे ऊंचे पद की दावेदारी पेश कर चुके हैं। डेमोक्रेट्स की जीत के कारण सदन में अल्पमत में आने के बाद अब रिपब्लिकन गुटों के बीच आंतरिक खींचतान और भी तेज होने के आसार हैं।
हकीम जेफरीज के हाथ आ सकती है स्पीकर की जिम्मेदारी
नई कांग्रेस की शुरुआत के साथ ही सदन के स्पीकर का नियंत्रण औपचारिक रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों में जाने की पूरी तैयारी है। डेमोक्रेट्स न्यूयॉर्क से आने वाले सदन के डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफरीज को स्पीकर पद के लिए नामांकित करने की रूपरेखा बना रहे हैं। अमेरिकी शासन व्यवस्था में प्रतिनिधि सभा का स्पीकर राष्ट्रपति के बाद सत्ता क्रम में दूसरे पायदान पर आता है, जिससे इस पद की राजनीतिक ताकत बेहद अहम मानी जाती है। नई संसद में स्पीकर पद के चुनाव के लिए 3 जनवरी 2027 की तारीख तय की गई है।
कैलिफोर्निया के केविन मैक्कार्थी के हटने के बाद खुली थी जॉनसन की राह
माइक जॉनसन ने वर्ष 2023 में स्पीकर की जिम्मेदारी संभाली थी। यह मौका तब बना था जब सदन के रिपब्लिकन सदस्यों ने कैलिफोर्निया के केविन मैक्कार्थी को स्पीकर पद से हटा दिया था। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के इतिहास में किसी पदासीन स्पीकर को इस तरह हटाए जाने की घटना को अपनी तरह का पहला तख्तापलट माना गया था। मैक्कार्थी के हटने के वक्त जॉनसन पार्टी में निचले स्तर के नेता के रूप में सक्रिय थे। हालांकि जब पार्टी मैक्कार्थी के सीधे उत्तराधिकारी के नाम पर एकमत नहीं हो पाई, तब कई असफल प्रयासों के बाद जॉनसन का नाम एक साझा विकल्प के रूप में उभरा था।
डोनाल्ड ट्रंप के साथ नजदीकी और 2020 के दावों का दौर
राजनीतिक रूप से जॉनसन 6 जनवरी 2021 को कैपिटोल पर हुए हमले से पहले भी चर्चा में रहे थे। उस समय उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के 2020 के चुनावी धोखाधड़ी से जुड़े झूठे दावों के पक्ष में समर्थन जुटाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उस चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। बाद में जब जॉनसन स्पीकर की कुर्सी तक पहुंचे तो डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंध और प्रगाढ़ हो गए। जॉनसन ने स्वयं यह बताया था कि राष्ट्रपति के साथ उनकी लगभग रोजाना फोन पर बातचीत और चर्चाएं होती थीं।
मध्यावधि चुनाव के दावों की जमीनी हकीकत
मध्यावधि चुनाव से पहले जॉनसन ने यह तर्क दिया था कि उनकी पार्टी इस बार चुनावी इतिहास को झुठलाते हुए जीत दर्ज करेगी। आमतौर पर अमेरिकी चुनावों में मतदाता पदासीन राष्ट्रपति की पार्टी के खिलाफ वोट डालकर उसे सजा देने का रुख अपनाते हैं। जॉनसन का इतिहास बदलने का यह दावा चुनावी नतीजों में सही साबित नहीं हो सका। इसके विपरीत रिपब्लिकन पार्टी को भारी चुनावी हार झेलनी पड़ी और सदन का बहुमत डेमोक्रेट्स के पाले में चला गया। इस चुनावी झटके के बाद जॉनसन के पास पार्टी के भीतर अपनी कमान और असर को बरकरार रखने का कोई पुख्ता आधार नहीं बचा।
उथल-पुथल, बेहद कम अंतर और गुटबाजी का दौर
माइक जॉनसन का बतौर स्पीकर कार्यकाल लगातार विवादों, भारी उठापटक और बेहद मामूली बहुमत के दबाव के बीच गुजरा। राजनीतिक हलकों में अक्सर उन्हें एक आकस्मिक स्पीकर के तौर पर देखा जाता था। विपरीत हालात और आधुनिक समय के सबसे कम अंतर वाले बहुमत के बावजूद उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी करीबी साख को मजबूत बनाए रखा। अब उनकी विदाई से पार्टी के भीतर पारंपरिक रूढ़िवादी और धुर-दक्षिणपंथी गुटों का पुराना टकराव दोबारा सतह पर आ सकता है।
सदन के बहुमत दल के नेता स्टीव स्केलिस पारंपरिक रूढ़िवादी धड़े से तालमेल बिठाते रहे हैं, जिसमें व्यापारिक घरानों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सांसदों का समर्थन शामिल है। दूसरी ओर पूर्व पहलवान रहे जिम जॉर्डन, जो सदन की ज्यूडिशियरी कमेटी के प्रमुख रहे हैं, पार्टी के धुर-दक्षिणपंथी सदस्यों के बीच खासे लोकप्रिय माने जाते हैं। वर्ष 2023 में मैक्कार्थी के निष्कासन के बाद स्केलिस और जॉर्डन दोनों ने शीर्ष पद हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन तब दोनों में से कोई भी आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका था। मतों के इसी विभाजन के चलते जॉनसन को समझौते के तहत कुर्सी मिली थी। अब जब डेमोक्रेट्स सदन का नियंत्रण संभालने जा रहे हैं, तब रिपब्लिकन खेमे को नए सिरे से कड़े और बड़े बदलावों का सामना करना पड़ रहा है।



















