फ्रीज संपत्तियों से मुआवजा लेने वालों पर ईरान की चेतावनी, होर्मुज मार्ग रोकने का दिया सख्त निर्देशलाइव: अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर किया हमलाहगिंग फेस के अलावा कई बाहरी अकाउंट्स पर भी हुआ था ओपनएआई के बेकाबू एआई एजेंट का हमलाथप्पड़कांड में जांच से नहीं हटाए जाएंगे एडीसीपी संदीप लांबा, हाईकोर्ट की टिप्पणी अहमजिमीकंद के बेमिसाल चिकित्सकीय गुण, जानिए पाचन सुधारने से लेकर डायबिटीज नियंत्रण में यह सब्जी कैसे करती है कामघरेलू क्रिकेट में आशुतोष शर्मा ने रचा इतिहास, मात्र 11 गेंदों पर अर्धशतक ठोक तोड़ा युवराज सिंह का सालों पुराना रिकॉर्डसीजेपी प्रवक्ता सौरव दास पर बरसीं भाजपा सांसद कंगना रनौत, 28 साल की उम्र में दो नेशनल अवॉर्ड जीतने की बात रखकर कसा तंजइंडिया गॉट लेटेंट 2 के वायरल क्लिप्स का सच आया सामने, लीक की खबरों पर समय रैना ने नीट पर कसा तंजआषाढ़ पूर्णिमा पर महर्षि वेदव्यास और भगवान शिव की पूजा का विधान, जानिए इस पावन पर्व का पूरा धार्मिक महत्व और सरल पूजन विधिबेलेघाटा से तृणमूल कांग्रेस नेता राजू नस्कर पुलिस कस्टडी में, रंगदारी और धमकी के आरोपों पर बड़ा एक्शन
महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की सरगर्मी, शिंदे का दिल्ली में जमावड़ा और उद्धव खेमे का जवाबी दांवराजनीति
17 जून 2026, 6:59 am (42 दिन पहले)· 2

महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' की सरगर्मी, शिंदे का दिल्ली में जमावड़ा और उद्धव खेमे का जवाबी दांव

शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के पाला बदलने की अटकलों के बीच एकनाथ शिंदे दिल्ली पहुंचे, उधर उद्धव गुट ने स्पीकर को पत्र लिखकर ममता बनर्जी जैसी कानूनी चाल चल दी है।

महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के अलग राह पकड़ने की चर्चाएं इतनी तेज हो गई हैं कि अब मामला सिर्फ अटकलों तक सीमित नहीं रहा। हालत यह है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता खुद अपने ही सांसदों से फोन पर बात नहीं कर पा रहे। कई सांसदों के मोबाइल बंद बताए जा रहे हैं और इसी ने मातोश्री की बेचैनी कई गुना बढ़ा दी है।

सूत्रों के मुताबिक उद्धव ठाकरे और दूसरे शीर्ष नेता अब खुद मोर्चे पर उतर आए हैं और एक-एक सांसद को मनाकर पार्टी के साथ जोड़े रखने की कोशिश में जुटे हैं। ठीक इसी वक्त दिल्ली में तेजी से करवट लेते घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति का पारा और ऊंचा कर दिया है।

ये भी पढ़ें

दिल्ली में जुटान, 'ऑपरेशन टाइगर' का शोर

शिवसेना (यूबीटी) में जिस संभावित बिखराव की बात हो रही है, उसे सियासी हलकों में 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है। इसी बीच शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे दिल्ली पहुंच चुके हैं। उनके बेटे और शिवसेना संसदीय दल के नेता श्रीकांत शिंदे के भी आज दिल्ली पहुंचने की संभावना है। आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि श्रीकांत शिंदे संसद की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में हिस्सा लेने राजधानी आ रहे हैं, लेकिन पिता-पुत्र के इस दौरे को सीधे 'ऑपरेशन टाइगर' से जोड़कर देखा जा रहा है।

दावा किया जा रहा है कि उद्धव गुट के कुछ सांसद आज सुबह करीब 8:30 बजे श्रीकांत शिंदे के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक करेंगे, जिसमें शिंदे पिता-पुत्र दोनों मौजूद रहेंगे। चर्चा है कि इस बैठक के बाद कुछ सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मिल सकते हैं।

पहले अलग गुट, फिर विलय की रणनीति

राजनीतिक गलियारों में जो रणनीति बताई जा रही है, उसके मुताबिक पहले लोकसभा में एक अलग संसदीय समूह बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और बाद में उस समूह का विलय शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में करा दिया जाएगा। यानी सीधे पार्टी छोड़ने के बजाय पहले संसद के भीतर अलग पहचान गढ़ने की तैयारी है।

जिन सांसदों के नाम इस कथित कवायद में सबसे ज्यादा गूंज रहे हैं, उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल हैं। संभावित बागियों की सूची में राजाभाऊ वाजे का नाम भी जोड़ा जा रहा है।

हालांकि इनमें से कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पाला बदलने की बात से साफ इनकार किया है। नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे और मुंबई नॉर्थ ईस्ट के सांसद संजय दीना पाटिल ने दो टूक कहा है कि वे पूरी मजबूती के साथ उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं।

उद्धव गुट का जवाबी दांव, ममता वाली राह

इन तमाम अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने वही रास्ता अपनाया है जो कभी ममता बनर्जी ने अपनाया था। पार्टी के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पार्टी के किसी भी सांसद के अलग गुट बनाने या किसी दूसरे दल में विलय के दावे को मान्यता न दी जाए। बिल्कुल इसी तरह का पत्र पहले ममता बनर्जी की TMC भी स्पीकर ओम बिरला को लिख चुकी है।

सावंत के पत्र में तर्क दिया गया है कि शिवसेना यूबीटी एक ही राजनीतिक दल है और कानून की निगाह में वही मान्य है। पत्र के मुताबिक संसद में पार्टी का अस्तित्व मूल राजनीतिक दल से निकलता है, इसलिए अलग-अलग गुट बनाकर उसी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संविधान की दसवीं अनुसूची में वर्ष 2003 के संशोधन के बाद अलग गुट बनाने का प्रावधान खत्म हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए सावंत ने कहा कि किसी सांसद की वैधता राजनीतिक दल से आती है, न कि सिर्फ संसदीय दल से। उन्होंने आग्रह किया कि अगर कोई समूह खुद को अलग गुट बताए तो उसे किसी तरह की मान्यता, सुविधा या विशेष दर्जा न दिया जाए।

मातोश्री की अधूरी बैठक ने बढ़ाया सस्पेंस

इस पूरे घटनाक्रम की नींव रविवार को ही पड़ चुकी थी, जब उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में अपने सभी नौ लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई। लेकिन नौ में से सिर्फ चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से वहां पहुंचे, बाकी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या फोन के जरिए हिस्सेदारी निभाई। इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर इतने सांसद आमने-सामने क्यों नहीं आए। पार्टी ने इसे सामान्य बात बताया, जबकि विरोधी खेमे ने इसे भीतर पनप रहे असंतोष का संकेत करार दिया।

संजय देशमुख की मुलाकात से और गहराई चर्चा

इसके बाद सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात की, जिसने अटकलों को और हवा दे दी। दोनों नेताओं ने सफाई दी कि यह मेल-मुलाकात सिर्फ क्षेत्रीय विकास कार्यों को लेकर थी और इसका कोई सियासी अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित बदलाव से जोड़कर ही देखा जा रहा है।

दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रताप सरनाईक ने इशारों में दरवाजे खोल दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर उद्धव गुट के सांसद या विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं तो उनका स्वागत है। सरनाईक के मुताबिक जो नेता बालासाहेब ठाकरे के विचारों में यकीन रखते हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं, उनके लिए शिवसेना के द्वार खुले हैं और ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

संजय राउत का पलटवार, 'खरीद-फरोख्त' का आरोप

इसी बीच दिल्ली पहुंचे शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने टूट की खबरों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने की कोशिश हो रही है और कुछ लोगों को अपने पाले में करने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की जा रही है। राउत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महाराष्ट्र के सांसदों को तोड़ने के लिए प्रति सांसद 15 करोड़ रुपये तक का प्रलोभन दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ हैं।

दिलचस्प यह है कि यह सारी हलचल ठीक उसी मौसम में हो रही है, जब करीब चार साल पहले वर्ष 2022 में इसी समय एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। तब के झटके की याद अब फिर से मातोश्री की धड़कनें बढ़ा रही है।

सवाल-जवाब

'ऑपरेशन टाइगर' क्या है?
यह शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के संभावित टूटकर एकनाथ शिंदे गुट में जाने की कथित कवायद को दिया गया नाम है।
रविवार की मातोश्री बैठक में कितने सांसद पहुंचे?
उद्धव ठाकरे ने अपने सभी नौ लोकसभा सांसदों को बुलाया था, लेकिन केवल चार ही व्यक्तिगत रूप से पहुंचे, बाकी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या फोन से हिस्सा लिया।
संजय राउत ने क्या आरोप लगाया है?
उन्होंने दावा किया कि सांसदों को तोड़ने के लिए प्रति सांसद 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है और पार्टी पूरी तरह एकजुट है।
उद्धव गुट ने स्पीकर को क्या लिखा है?
सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि किसी भी अलग गुट या विलय के दावे को मान्यता न दी जाए, जैसा पत्र पहले ममता बनर्जी की TMC ने भी लिखा था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR