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मल्लिकार्जुन खरगे के ‘खुशियों की ईद’ वाले बयान पर गरमाई राजनीति, बीजेपी ने साधा निशानाराजनीति
8 नव॰ 2026, 6:53 pm (1 घंटे पहले)· 0

मल्लिकार्जुन खरगे के ‘खुशियों की ईद’ वाले बयान पर गरमाई राजनीति, बीजेपी ने साधा निशाना

दिवाली पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिए गए एक बयान पर सियासी घमासान मच गया है, जिसमें उन्होंने त्योहार को ‘खुशियों की ईद’ कहा था। बीजेपी ने इस टिप्पणी को तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया है।

दीपावली के पावन अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिए गए एक बयान ने देश की राजनीतिक फिजा में गर्माहट पैदा कर दी है। नागरिकों को रोशनी के इस पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने इस महान त्योहार को एक अलग ही संदर्भ में परिभाषित किया और इसे ‘खुशियों की ईद’ करार दिया। उनके इस कथन के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और विपक्षी खेमे की ओर से तीखे तेवर देखने को मिल रहे हैं।

सद्भाव का संदेश और राजनीतिक घमासान

मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संदेश में प्रकाश पर्व को कई दिनों तक चलने वाला ऐसा उत्सव बताया जो लोगों को एकजुट करता है तथा अपनों से मिलने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने समाज में शांति बनाए रखने, पुरानी दूरियों और गलतफहमियों को मिटाने तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए मिलकर आगे बढ़ने की अपील की थी। उनका मुख्य जोर भाईचारे और आपसी मेल-मिलाप पर टिका हुआ था, ताकि देशवासी इस पर्व को पूरी सकारात्मकता के साथ मना सकें।

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बीजेपी का तीखा प्रहार और एंटी-सनातनी आरोप

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए कड़ा एतराज जताया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी को तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस पार्टी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी पावन पर्व के दिन भी वोट बैंक की राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है और सनातन संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर इस तरह के बयान जानबूझकर दिए जाते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रदीप भंडारी ने लिखा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने दिवाली को खुशियों की ईद बता दिया है। उन्होंने इसके साथ ही पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद से जुड़े पुराने बयानों का भी हवाला दिया और तंज कसते हुए आरोप लगाया कि एक तरफ जहां संवेदनशीलता दिखाई जाती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे बयानों से तुष्टीकरण की बू आती है।

शांति स्थापना और राजनीतिक लड़ाई पर बयान

अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने केवल उत्सव की बधाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज में व्याप्त वैमनस्य को मिटाने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग आपस में किसी बात को लेकर उलझे हुए हैं, उन्हें अपनी गलतफहमियों को भुलाकर शांति का मार्ग अपनाना चाहिए। राष्ट्र की रक्षा करने और उसे अखंड बनाए रखने की जिम्मेदारी हर नागरिक के कंधों पर है, जिसके लिए सबको मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री मोदी और नेतृत्व पर तंज

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई बहस की चुनौती का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को खुली बहस के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन प्रधानमंत्री ने अभी तक इस पर कोई कदम नहीं बढ़ाया है, हालांकि यह उनकी अपनी मर्जी पर निर्भर करता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी पार्टी का संघर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सत्तारूढ़ बीजेपी की नीतियों के खिलाफ है, न कि किसी साधारण व्यक्ति के विरुद्ध।

सवाल-जवाब

मल्लिकार्जुन खरगे ने दिवाली को क्या कहा था?
खरगे ने दिवाली को ‘खुशियों की ईद’ और कई दिनों तक चलने वाला खुशियों का त्योहार बताया था।
बीजेपी की तरफ से इस बयान पर किसने प्रतिक्रिया दी?
बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कांग्रेस पर निशाना साधा।
बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
बीजेपी ने कांग्रेस पर दिवाली के दिन भी तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया।
खरगे ने अपने संदेश में शांति को लेकर क्या कहा था?
उन्होंने देश में शांति बनाए रखने, आपसी गलतफहमियां दूर करने और राष्ट्रीय एकता के लिए मिलकर काम करने की अपील की थी।
खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर क्या मुद्दा उठाया?
उन्होंने राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की चुनौती दिए जाने का मुद्दा उठाया।
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