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उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 के लिए मायावती की बड़ी तैयारी, छह दिसंबर को अंबेडकर पार्क से तय होगी बसपा की सियासी चालराजनीति
8 नव॰ 2026, 4:30 pm (1 घंटे पहले)· 0

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 के लिए मायावती की बड़ी तैयारी, छह दिसंबर को अंबेडकर पार्क से तय होगी बसपा की सियासी चाल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के तहत बहुजन समाज पार्टी छह दिसंबर को लखनऊ में महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर बड़ा सियासी संदेश देने जा रही है। इस आयोजन में पार्टी प्रमुख मायावती की रणनीति और बूथ स्तर की मजबूती पर खास नजर रहेगी।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है और अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन को दोबारा हासिल करने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में छह दिसंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लखनऊ स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर होने वाला यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा तक सीमित नहीं रहने वाला है। पार्टी सुप्रीमो इस मंच का उपयोग अपने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और आने वाले चुनावी रण के लिए अपनी रणनीति का एलान करने के लिए कर सकती हैं। इस बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान राज्य के सभी पचहत्तर जिलों के अध्यक्षों की मौजूदगी में बूथ प्रबंधन और संभावित प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया की गहन समीक्षा की जाएगी। हालांकि अभी तक पार्टी की तरफ से किसी विस्तृत घोषणापत्र या आधिकारिक उम्मीदवारों की सूची का सार्वजनिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन हाल ही में हुई बैठकों और पार्टी अध्यक्ष के रुख से कई बड़े राजनीतिक संकेत साफ तौर पर मिल रहे हैं।

वोट और सत्ता में हिस्सेदारी का बड़ा संदेश

पार्टी की सर्वोच्च नेता पहले ही अपने खास नारे ‘वोट हमारा, राज भी हमारा’ के राजनीतिक विजन को आगे बढ़ाने की बात कह चुकी हैं। इस आगामी आयोजन के जरिए वह दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और समाज के अन्य वंचित तबकों को पूरी एकजुटता के साथ पार्टी के साथ जोड़ने की जोरदार अपील कर सकती हैं। उनका मुख्य जोर इस बात पर रहेगा कि बहुजन समाज को केवल एक साधारण वोट बैंक के रूप में सीमित न रहकर प्रदेश की सत्ता में सीधी हिस्सेदारी हासिल करने वाली एक मजबूत राजनीतिक ताकत बनना चाहिए। इस तरह के संदेशों के माध्यम से वह अपने पारंपरिक आधार वोट को वापस साधने की पुरजोर कोशिश में जुटी हैं।

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बूथ स्तर पर संगठन को धार देने की तैयारी

पचहत्तर जिलों से आए पार्टी अध्यक्षों के साथ हुई हालिया उच्चस्तरीय बैठकों में मुख्य रूप से बूथ प्रबंधन की स्थिति, सांगठनिक मोर्चे की कमियों और प्रत्याशियों के चयन के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा चुकी है। ऐसी स्थिति में छह दिसंबर के इस मंच से मायावती जिला और विधानसभा स्तर के सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दे सकती हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बूथवार जिम्मेदारी तय करें, निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को बाहर का रास्ता दिखाएं और चुनावी तैयारी के सभी कामों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करें। संगठन की जमीनी पकड़ को मजबूत करना ही पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है।

प्रत्याशियों के चयन और समयसीमा पर अहम संकेत

चुनावी वैतरणी पार करने के लिए पार्टी की रणनीति में हमेशा से प्रत्याशियों का सही चयन एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक कदम रहा है। इस बार पार्टी चुनाव के ठीक आखिरी वक्त पर उम्मीदवार घोषित करने की पुरानी परंपरा को छोड़कर काफी पहले से ही मजबूत और जिताऊ चेहरों की पहचान करने के काम में जुटी हुई है। छह दिसंबर के इस बड़े कार्यक्रम के दौरान संभावित उम्मीदवारों के नाम तय करने को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा या सख्त सांगठनिक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति न रहे।

ईवीएम और चुनावी व्यवस्था पर आक्रामक रुख

अपनी पिछली बैठकों के दौरान भी पार्टी प्रमुख ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के इस्तेमाल पर अपनी तीखी आपत्ति दर्ज कराई थी और इसकी जगह पारंपरिक बैलेट पेपर से निष्पक्ष चुनाव कराने की जोरदार मांग उठाई थी। इसके साथ ही उन्होंने पूरी चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हुए धनबल, बाहुबल और सरकारी मशीनरी के कथित बेजा इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। ऐसे में यह पूरी संभावना है कि छह दिसंबर को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में वह चुनाव आयोग के साथ-साथ केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के खिलाफ अपनी पार्टी का पक्ष और अधिक आक्रामक और मुखर तेवर के साथ जनता के सामने रखेंगी।

अकेले चुनाव लड़ने के फैसले पर मुहर

आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में यह बात पहले ही साफ हो चुकी है कि पार्टी किसी भी दल के साथ गठबंधन करने के मूड में नहीं है और वह अपने दम पर मैदान में उतरेगी। सितंबर 2026 के दौरान सामने आई विभिन्न रिपोर्टों से भी इस बात के संकेत मिले थे कि पार्टी प्रमुख ने बिना किसी बैसाखी के अकेले ही चुनावी समर में उतरने का कड़ा मन बना लिया है। यही वजह है कि छह दिसंबर के इस ऐतिहासिक मंच से वह अपनी इस सोची-समझी रणनीति को एक बार फिर दोहरा सकती हैं और पार्टी के तमाम कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को यह कड़ा संदेश दे सकती हैं कि वे किसी अन्य दल पर निर्भर रहने के बजाय अपने बलबूते पर ही राज्य की सत्ता में वापसी की मु मुस्तैदी से तैयारी करें।

विरोधी दलों की बढ़ी सियासी धड़कनें

राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस पार्टी की संभावित वापसी की चर्चाएं इसलिए भी काफी तेजी से हो रही हैं क्योंकि उत्तर प्रदेश का पूरा दलित मतदाता समीकरण सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी दोनों के लिए बहुत अहमियत रखता है। सत्ताधारी दल ने पिछले कुछ चुनावों में गैर-जाटव दलित जातियों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं, जबकि विपक्षी दल पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के सहारे दलित वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में इस पार्टी की सक्रियता दोनों ही प्रमुख दलों के लिए सियासी चिंता का बड़ा सबब बन सकती है।

आकाश आनंद की भूमिका पर टिकी हैं सबकी निगाहें

संगठन में आकाश आनंद की वापसी होने के बाद और उन्हें राष्ट्रीय संयोजक का अहम पद सौंपे जाने के बाद से ही पार्टी के भीतर उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। खासकर युवा मतदाताओं और पार्टी की नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं तक अपनी सीधी पहुंच बनाने में उनकी मौजूदगी बेहद अहम साबित हो सकती है। छह दिसंबर के इस बड़े आयोजन के दौरान उनकी सक्रियता और पार्टी सुप्रीमों के साथ उनकी राजनीतिक मंच पर उपस्थिति पर राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर रहेगी। हालांकि इस बात की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि इस कार्यक्रम में उनका कोई औपचारिक भाषण होगा या उन्हें कोई नई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

तीन मोर्चों पर कड़ी परीक्षा

यदि पार्टी सुप्रीमो दलित मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को फिर से अपने पाले में लाने में कामयाब हो जाती हैं, तो इसका सीधा असर सत्ताधारी दल के गैर-जाटव वोट बैंक और विपक्षी दल के पीडीए समीकरण दोनों पर पड़ना तय है। हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं निकाला जा सकता कि पूरा दलित समाज एकमुश्त होकर फौरन वापस लौट आएगा, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों के मतदाताओं की पसंद और प्राथमिकताएं काफी भिन्न हो सकती हैं। छह दिसंबर का यह पूरा आयोजन पार्टी के लिए एक साथ तीन मोर्चों पर अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है, जिसमें पहला मोर्चा भारी भीड़ जुटाना है, दूसरा मोर्चा अपनी सांगठनिक ताकत का खुला प्रदर्शन करना है और तीसरा मोर्चा दलित समाज के साथ-साथ सर्वसमाज के अन्य कमजोर वर्गों तक पुख्ता राजनीतिक संदेश पहुंचाना है। पार्टी सुप्रीमो के सामने वर्ष 2007 जैसी ऐतिहासिक सफलता दोहराने का बड़ा लक्ष्य अवश्य है, लेकिन इसके लिए सिर्फ एक बड़ा आयोजन कर देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि इसके वास्ते बूथ स्तर पर लगातार सक्रिय रहना, मजबूत और टिकाऊ उम्मीदवार उतारना, स्थानीय स्तर पर नेतृत्व खड़ा करना और सबसे बढ़कर अपने पक्ष के वोटों को सही सलामत सीटों में तब्दील करने की चाक-चौबंद रणनीति तैयार करना बेहद जरूरी होगा।

सवाल-जवाब

छह दिसंबर को कौन सा प्रमुख आयोजन होने जा रहा है?
लखनऊ के डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर बसपा का बड़ा राजनीतिक आयोजन होने जा रहा है।
इस आयोजन में मुख्य रूप से किन विषयों की समीक्षा की जाएगी?
इस रैली के दौरान सभी 75 जिलों के अध्यक्षों के साथ बूथ प्रबंधन, संगठन की कमियों और उम्मीदवारों के चयन की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
क्या बसपा ने आगामी चुनाव के लिए किसी गठबंधन का ऐलान किया है?
नहीं, पार्टी ने किसी भी गठबंधन के बिना अकेले ही 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
मायावती ने चुनावी व्यवस्था को लेकर क्या चिंता जताई है?
मायावती ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
इस राजनीतिक गतिविधि का किन दलों पर असर पड़ सकता है?
बसपा के सक्रिय होने से भारतीय जनता पार्टी के गैर-जाटव दलित वोट बैंक और समाजवादी पार्टी के पीडीए समीकरण दोनों पर असर पड़ सकता है।
क्या आकाश आनंद इस कार्यक्रम में कोई बड़ी भूमिका निभाएंगे?
पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी संभालने के बाद इस आयोजन में उनकी सक्रियता और मायावती के साथ उनकी मौजूदगी पर सबकी नजर रहेगी।
क्या इस कार्यक्रम में उम्मीदवारों की कोई सूची जारी होगी?
अभी तक पार्टी की तरफ से किसी विस्तृत घोषणापत्र या उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन संभावित उम्मीदवारों पर दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
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