बस्तर अंचल के जगदलपुर में ऐतिहासिक बस्तर दशहरा और आगामी त्योहारों के आगमन से पहले उत्सव का माहौल पूरी तरह तैयार हो चुका है। शहर भर में आकर्षक दुर्गा पूजा पंडाल तेजी से खड़े किए जा रहे हैं, जिसके साथ ही दुर्गा प्रतिमाओं की मांग भी जबरदस्त उछाल पर है। अलग-अलग इलाकों में समितियां 80 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक की भव्य और नक्काशीदार प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए ऑर्डर दे रही हैं, जिससे स्थानीय मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में दिन-रात हलचल मची हुई है।
बारीक कारीगरी और आंखों को तराशने में लगता है सबसे ज्यादा वक्त
दुर्गा प्रतिमाओं को गढ़ना केवल शारीरिक श्रम नहीं, बल्कि अत्यधिक धैर्य और एकाग्रता की परीक्षा माना जाता है। मूर्तिकार प्रतिमा के शुरुआती ढांचे से लेकर उसके अंतिम साज-श्रृंगार तक कई कठिन चरणों से गुजरते हैं। सामान्य तौर पर एक प्रतिमा को पूरी तरह तैयार करने में 5 से 6 दिन का समय लगता है। निर्माण प्रक्रिया में सबसे नाजुक और समय लेने वाला काम रंग-रोगन के दौरान माता की आंखों को जीवंत स्वरूप देना होता है, जहां जरा सी चूक पूरे चेहरे के भाव को बदल सकती है।
12 साल की उम्र से मिट्टी को रूप दे रहे 64 वर्षीय जुरखान लाल
जगदलपुर के वरिष्ठ मूर्तिकार जुरखान लाल प्रजापति पिछले 52 वर्षों से लगातार इस पारंपरिक शिल्प को जीवंत रखे हुए हैं। उन्होंने महज 12 वर्ष की अल्पायु में मिट्टी की मूर्तियां गढ़ना आरंभ किया था और अब 64 वर्ष की उम्र में भी पूरी ऊर्जा के साथ नई प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। वे प्रतिवर्ष गणेश उत्सव से लेकर दुर्गा पूजा तक अनवरत काम करते हैं। वर्तमान समय में भक्त और पूजा समितियां अपनी पसंद की तस्वीरें लाकर भी विशेष प्रतिमाएं तैयार करवाती हैं, जिन्हें वे हूबहू रूप देते हैं।
सितंबर से ही बुक हो गईं 36 मूर्तियां, आकार के हिसाब से तय होती है कीमत
त्योहारी सीजन के लिए जुरखान लाल प्रजापति को सितंबर के महीने से ही मूर्तियों की बुकिंग मिलनी शुरू हो गई थी। इस बार उनके पास कुल 35 से 36 प्रतिमाओं के अग्रिम ऑर्डर आ चुके हैं। इन प्रतिमाओं का मूल्य उनके आकार, ऊंचाई और सजावट की जटिलता को देखकर तय किया जाता है। उन्हें इस सत्र में 13 फीट ऊंची एक विशाल प्रतिमा तैयार करने का काम 80 हजार रुपये में मिला है, जबकि 12 फीट ऊंची एक अन्य भव्य प्रतिमा का ऑर्डर भी वे पूरा कर रहे हैं।



















