प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दुनिया की बदलती परिस्थितियों और भारत की बढ़ती भूमिका पर बड़ा बयान दिया। एक वैश्विक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के समय में दुनिया को ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें ताकतवर देश अन्य कमजोर राष्ट्रों पर अपनी मर्जी न थोप सकें। इस स्थिति को समझाने के लिए उन्होंने मत्स्य न्याय की अवधारणा का विशेष रूप से उल्लेख किया। इसका सीधा अर्थ उस अवस्था से है जहाँ बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है, यानी शक्तिशाली लोग या देश अपनी ताकत के बल पर दूसरों पर हावी रहते हैं। उनके अनुसार, पूरी दुनिया को इस संकीर्ण मानसिकता से मुक्त कराने और प्रत्येक देश को उसका उचित स्थान दिलाने की सख्त जरूरत है।
ग्लोबल साउथ को वैश्विक व्यवस्था में मिलना चाहिए उचित स्थान
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि वैश्विक परिदृश्य में काफी तेजी से बदलाव आ रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और निर्णय लेने वाली व्यवस्थाएं उसी रफ़्तार से खुद को नहीं ढाल पाई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज की समकालीन चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक संस्थाओं को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की वकालत करते हुए कहा कि इन्हें वैश्विक शासन और व्यवस्था में यथोचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी रोशनी डाली कि आपसी सहयोग सिर्फ अच्छे और अनुकूल समय तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि संकट की घड़ी में भी पूरी तरह से मददगार साबित होना चाहिए। भारत की लगातार यही कोशिश रही है कि दुनिया की तमाम समस्याओं के समाधान में हर देश की सक्रिय भागीदारी हो और किसी एक राष्ट्र की ताकत ही फैसलों का एकमात्र आधार न बने।
बैक ऑफिस से निकलकर ब्रेन ऑफिस बन रहा है भारत
नरेंद्र मोदी ने देश की बदलती हुई कार्यशैली और क्षमताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब केवल दुनिया भर के लिए सेवाएं देने वाला राष्ट्र मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह नई सोच, अत्याधुनिक तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में भी अपनी एक नई पहचान बना रहा है। उन्होंने भारत की इस शानदार प्रगति को बैक ऑफिस से ब्रेन ऑफिस बनने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि आज भारत में दुनिया के चिप-डिजाइन से जुड़े कुल कार्यबल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर काम कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी गर्व के साथ साझा किया कि भारतीय छात्र अब तक 325 से अधिक उन्नत चिप डिजाइन तैयार कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश अपनी तकनीकी क्षमता और स्वदेशी प्रतिभा के दम पर वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है।
निर्यात, डिजिटल भुगतान और स्टार्टअप्स में देश की ऐतिहासिक छलांग
देश की मजबूत होती आर्थिक स्थिति और तकनीकी सफलताओं का ब्योरा देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि सितंबर के महीने में देश के निर्यात में लगभग 25 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दुनिया भर के आधे से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भारत की धरती पर ही संचालित हो रहे हैं। ये वे प्रमुख केंद्र हैं जहाँ बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां तकनीक, अनुसंधान और अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक सेवाओं से जुड़े कार्यों को अंजाम देती हैं। इसके अलावा, रियल टाइम डिजिटल भुगतान के मामले में भारत पूरी दुनिया में पहले पायदान पर काबिज है। वहीं दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के मामले में भी भारत दुनिया के शीर्ष तीन देशों में मजबूती से शामिल हो चुका है। ये सभी आंकड़े देश के विकसित होते डिजिटल बुनियादी ढांचे और तकनीकी पराक्रम की गवाही देते हैं।
रिसर्च, पेटेंट और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बढ़ती ताकत
अनुसंधान और नवाचार के मोर्चे पर भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के भीतर महज एक वर्ष के दौरान 1.5 लाख से अधिक पेटेंट दाखिल किए गए हैं। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी दक्षता को भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद आवश्यक करार दिया। प्रधानमंत्री ने देश की युवा शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को अपनी प्रतिभा का दोहन वृहद स्तर पर करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब देश केवल दूसरे देशों को बड़े पैमाने पर प्रतिभा उपलब्ध कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह खुद बड़े पैमाने पर सोचने और मौलिक तकनीकों को विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पेनिसिलिन-G का घरेलू उत्पादन और आत्मनिर्भरता
औषधि और फार्मा सेक्टर का उदाहरण देते हुए नरेंद्र मोदी ने बताया कि भारत में अब पेनिसिलिन-G का घरेलू उत्पादन एक बार फिर से शुरू हो चुका है, जिसे उन्होंने देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता का एक जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कोरोना महामारी के उस दौर को याद किया जब भारत ने अपनी सीमाओं से परे जाकर 100 से अधिक देशों को जीवन रक्षक दवाइयां पहुंचाई थीं। इस विशिष्ट उदाहरण के माध्यम से उन्होंने यह समझाया कि भारत विकट और संकटपूर्ण समय में भी दूसरे जरूरतमंद देशों की सहायता करने का सामर्थ्य रखता है। उन्होंने कहा कि भारत की यह आत्मनिर्भरता केवल अपनी आंतरिक जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संपूर्ण वैश्विक सप्लाई चेन को भी उल्लेखनीय मजबूती मिल रही है.
ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ तकनीक की दिशा में कदम
देश की ऊर्जा क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट के आंकड़े को पार कर चुकी है। इस प्रकार की गैर-जीवाश्म ऊर्जा में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे स्रोत आते हैं, जो पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर देश की निर्भरता को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित होते हैं। उन्होंने देश के भीतर हाइड्रोजन ट्रेन के परिचालन की शुरुआत और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल करने की ऐतिहासिक घटना का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। क्रिटिकलिटी का मतलब यह होता है कि परमाणु रिएक्टर के भीतर नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया स्वतः जारी रहने की स्थिति में पहुंच चुकी है। उन्होंने इन तमाम उपलब्धियों को विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में भारत के बढ़ते हुए दबदबे से जोड़ा।
खेलों के मैदान में भारत का बढ़ता स्वर्णिम सफर
देश में खेल संस्कृति और खिलाड़ियों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने एशियाई खेलों में 85 पदक जीतने की बड़ी उपलब्धि का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय एथलीटों ने इस बार कई ऐसे मुकाम हासिल किए जो इससे पहले कभी देश के नाम नहीं जुड़े थे। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि बॉक्सिंग के इतिहास में भारत ने एक ही एशियाई खेलों के दौरान पहली बार 3 स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसके अलावा सिपक टकरॉ जैसे खेलों में भी भारत ने पहली बार पदक जीतकर नया इतिहास रचा। प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल के मैदानों में मिल रही ये सफलताएं देश के युवाओं में बढ़ते आत्मविश्वास और उनकी प्रतिभा के निरंतर निखरने का स्पष्ट प्रमाण हैं।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और रोजगार के नए अवसर
महिला सशक्तीकरण की दिशा में हो रहे बदलावों की चर्चा करते हुए नरेंद्र मोदी ने बताया कि देश के ग्रामीण इलाकों में 3.5 करोड़ से अधिक महिलाएं अब 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं, और सरकार का आगामी लक्ष्य इस आंकड़े को बढ़ाकर 6 करोड़ तक ले जाने का है। लखपति दीदी योजना के अंतर्गत महिलाओं को विभिन्न लाभकारी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जाता है ताकि उनकी वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये या उससे अधिक हो सके। इसके साथ ही उन्होंने देश में रोजगार के बढ़ते अवसरों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में 70 लाख नए रोजगार सृजित हुए हैं और विकसित भारत रोजगार योजना के माध्यम से इस प्रक्रिया को और अधिक गति दी जा रही है।
मध्यम वर्ग को राहत और मजबूत होती बिजली व्यवस्था
आम नागरिकों और करदाताओं के संदर्भ में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग को दी गई कर राहत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कर के शून्य हो जाने से आम जनता को बहुत बड़ी राहत मिली है। यह बात उन्होंने देश की बदलती हुई आर्थिक तस्वीर और नागरिकों के जीवन स्तर में आए सुधार के परिप्रेक्ष्य में कही। इसके अलावा उन्होंने देश में बिजली की बढ़ती मांग का जिक्र करते हुए मजबूत बिजली ग्रिड प्रबंधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले बिजली की मांग में थोड़ा भी उछाल आने पर पूरा ग्रिड ठप होने का खतरा बना रहता था, लेकिन अब देश की व्यवस्था इतनी मजबूत हो चुकी है कि वह हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
भारत की प्रगति से पूरी दुनिया को मिल रहा लाभ
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत की यह तेज विकास यात्रा केवल भारतीयों के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व समुदाय के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिरता प्रदान कर सकता है और जरूरत पड़ने पर संकट के समय अन्य देशों की मदद के लिए हमेशा तैयार रह सकता है। विकसित भारत के इस विराट संकल्प पर जोर देते हुए उन्होंने आह्वान किया कि देश के सामने आने वाली हर एक चुनौती को एक नए अवसर में तब्दील करना होगा। उन्होंने वैश्विक सहयोग, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार सृजन और सामाजिक सहभागिता को भारत की भविष्य की यात्रा के सबसे मुख्य आधार स्तंभ के रूप में रेखांकित किया।
























