अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय कुछ समूहों की कार्यशैली को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें भारत और फ्रांस के विरोध प्रदर्शनों के बीच एक साझा पैटर्न की ओर इशारा किया गया है। अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के कई देशों में युवाओं को सड़कों पर उतारकर माहौल खराब करने की योजना पर काम चल रहा है। इस पूरी व्यवस्था को एक खास नेटवर्क के जरिए संचालित किए जाने की बात कही जा रही है, जो विभिन्न देशों की आंतरिक व्यवस्था को प्रभावित करने की मंशा रखता है। रिपोर्ट में उन तमाम संगठनों और उनके कामकाज के तरीकों का विस्तार से उल्लेख किया गया है, जो इस प्रकार की गतिविधियों को बढ़ावा देने में जुटे हुए हैं।
ग्लोबल केस इंक और सौ से अधिक संगठनों का जाल
फॉक्स न्यूज की इस रिपोर्ट का शीर्षक ग्लोबल केस इंक ग्रोज टू 101 ग्रुप्स विद प्लांस फॉर न्यू राउंड्स ऑफ डेमोंस्ट्रेशन है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 101 ऐसे संगठन सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रदर्शनों का आयोजन करना और उन्हें बढ़ावा देना है। इन समूहों का काम युवाओं और छात्रों को भड़काकर सड़कों पर लाना और विरोध प्रदर्शनों को सुनियोजित तरीके से अंजाम देना है। इन 101 संगठनों में से 33 संगठनों का नेतृत्व सीधे तौर पर युवाओं या छात्रों के हाथों में है, जो विभिन्न अभियानों की कमान संभाल रहे हैं।
रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम का खुलासा
सामने आई रिपोर्ट में इस पूरे नेटवर्क को रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम का नाम दिया गया है। इसमें रेड शब्द का संबंध कम्युनिस्ट और समाजवादी समूहों से जोड़ा गया है, जबकि ग्रीन शब्द का इस्तेमाल इस्लामी संगठनों के संदर्भ में किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि वामपंथी, समाजवादी और छात्र संगठनों के साथ मिलकर ये समूह आपसी तालमेल के जरिए विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा तैयार करते हैं। यह नेटवर्क नौ देशों में फैला हुआ है और इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जो दुनिया के विभिन्न इलाकों में सुनियोजित माहौल तैयार करने में लगा हुआ है।
क्या ये प्रदर्शन स्वतःस्फूर्त हैं या सुनियोजित?
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि दुनिया भर में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन क्या पूरी तरह स्वाभाविक हैं या फिर इन्हें किसी खास रणनीति के तहत प्रायोजित किया जा रहा है। क्या युवाओं को जानबूझकर भ्रमित कर सड़कों पर उतारा जा रहा है? फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में ऐसे पांच प्रमुख संगठनों के नाम उजागर किए गए हैं, जिनके जरिए दिल्ली में हुए प्रदर्शनों का सीधा संबंध फ्रांस की घटनाओं से जोड़ा जा रहा है। इन संगठनों की गतिविधियां और उनके आपसी संपर्क इस बात की गवाही देते हैं कि इनके तार एक ही सूत्र से जुड़े हुए हैं।
वे पांच संगठन जो सुर्खियों में आए
रिपोर्ट में जिन पांच संगठनों की मुख्य भूमिका बताई गई है, उनमें पहला नाम इंडिया अलायंस पेरिस यानी IAP का है। फ्रांस का यह संगठन दिल्ली के प्रदर्शनों से जुड़ा हुआ है और दोनों देशों के बीच विरोध प्रदर्शनों से जुड़े संदेशों का आदान-प्रदान करता है। दूसरा संगठन प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल यानी PI है, जो एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संगठन है। इस संगठन ने सोलह अक्टूबर की अपनी ब्रीफिंग में फ्रांस, भारत, स्पेन और अल्बानिया के आंदोलनों का विशेष रूप से जिक्र किया था और आपसी सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया था। तीसरा संगठन पीपल्स फोरम है, जो न्यूयॉर्क स्थित एक राजनीतिक और सामाजिक शिक्षा से जुड़ा संगठन है और इंडिया अलायंस पेरिस में अपनी हिस्सेदारी रखता है। चौथे और पांचवें संगठन के रूप में कोड पिंक और ब्रेकथ्रू न्यूज का नाम सामने आया है, जिन्हें अमेरिकी कारोबारी नेविल राय सिंघम द्वारा आर्थिक सहायता और फंडिंग मुहैया कराई जाती है।
राजनीतिक गलियारों में भूचाल और भाजपा का हमला
इस अमेरिकी खुलासे के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है और भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। भाजपा का आरोप है कि इस पूरी साजिश के तार कांग्रेस पार्टी और विशेषकर राहुल गांधी से जुड़े हुए हैं। पार्टी का कहना है कि फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में जिन पांच संगठनों का जिक्र है, उनमें से कुछ के साथ कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व की नजदीकियां जगजाहिर हैं। भाजपा ने दो तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने अप्रैल 2025 में दस जनपथ पर प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। पार्टी का तर्क है कि यह कोई सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश छिपी है। भाजपा ने सवाल उठाया है कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उस बैठक में क्या चर्चा हुई थी, इन प्रदर्शनों का खर्च कौन उठा रहा है और देश के खिलाफ रची जाने वाली हर साजिश में मुख्य विपक्षी दल की संलिप्तता क्यों पाई जाती है।
भविष्य के प्रदर्शनों की खतरनाक योजना
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि ये 101 संगठन यहीं नहीं रुकने वाले हैं, बल्कि वे आगे भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों की पूरी योजना तैयार कर रहे हैं। इन गतिविधियों के लिए एक व्यवस्थित कैलेंडर बनाया जा रहा है। फ्रांस में चौबीस अक्टूबर को एक्ट-टू नाम से बड़े प्रदर्शन की तैयारी है, जिसके तहत फ्रांस में एक साथ दो सौ बारह जगहों पर भीड़ जुटाने की योजना बनाई जा रही है। डिजिटल मैप के जरिए इन सभी विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा तय की जा रही है। इसके बाद इकतीस अक्टूबर को फ्रांस में एक्ट-थ्री के तहत एक और बड़े प्रदर्शन की योजना है, जिसमें फ्रांस के राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग किए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा बीस नवंबर को इंटरनेशनल यूथ स्ट्राइक करने का प्रस्ताव है, जिसके माध्यम से पूरे यूरोप में बड़े पैमाने पर हड़ताल, नाकेबंदी और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की साजिश रची जा रही है।
घरेलू मोर्चे पर बदलाव और प्रशांत भूषण का मार्च
दूसरी तरफ देश के भीतर भी ऐसी ही गतिविधियों से जुड़े घटनाक्रम तेजी से बदले हैं। तेईस अक्टूबर को प्रशांत भूषण ने पालमपुर में एक प्रदर्शन मार्च बुलाया है, जिसे मार्च फॉर डेमोक्रेसी का नाम दिया गया है। यह वही चेहरा हैं जो पहले भी व्यवस्था परिवर्तन और उग्र आंदोलनों की वकालत कर चुके हैं। हालांकि जैसे ही यह अंतरराष्ट्रीय साजिश बेनकाब हुई, स्थानीय स्तर पर विरोध का दावा करने वालों के तेवर भी बदलते नजर आए। तिहाड़ जेल में सात दिन बिताने के बाद कानूनी शिकंजे में आए सौरव दास और आशुतोष रांका के सुर पूरी तरह बदल चुके हैं। जो लोग पहले किसी भी समझौते को तैयार नहीं थे, वे अब हाथ में तिरंगा थामकर देश के पक्ष में नारे लगाते नजर आ रहे हैं।
कानूनी शिकंजा और आगे की कानूनी कार्रवाई
सौरव दास और आशुतोष रांका की वर्तमान स्थिति संकेत देती है कि वे अब किसी भी तरह की अनियंत्रित गतिविधि से दूर रहना चाहते हैं। शांति बनाए रखने का मुचलका भरकर जेल से बाहर आने वाले इन दोनों व्यक्तियों से जब मीडिया ने उनके अगले कदम के बारे में जानना चाहा, तो वे बिना कोई जवाब दिए वहां से निकल गए। हालांकि वे जेल से बाहर जरूर आ चुके हैं, लेकिन कानून का शिकंजा अभी पूरी तरह से ढीला नहीं हुआ है। जेल से बाहर आते ही अपराध शाखा ने दोनों को आधिकारिक नोटिस थमा दिया है, और आगे की पूछताछ तथा उनके बयान दर्ज करने की प्रक्रिया लगातार जारी है ताकि इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुंचा जा सके।
























