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लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किए पुराने संस्मरण, लिखी खास बातराजनीति
8 नव॰ 2026, 10:03 am (1 घंटे पहले)· 0

लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किए पुराने संस्मरण, लिखी खास बात

लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लेख के जरिए उनके जीवन और योगदान को याद किया है। प्रधानमंत्री ने उनके साथ बिताए दशकों पुराने पलों को साझा करते हुए उन्हें अपना अभिभावक बताया।

लालकृष्ण आडवाणी 8 नवंबर को अपने जीवन के 99वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष आलेख लिखकर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से इस बात का जिक्र किया कि यह बेहद सुखद संयोग है कि उनके जन्मदिवस के दिन ही दीपावली का पावन पर्व भी पड़ रहा है। प्रभु श्रीराम के इस उत्सव के साथ एक वरिष्ठ राजनेता के जीवन का यह पड़ाव इस दिन को और भी खास बना देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को अपने लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद भावुक क्षण बताया है। उन्होंने खुद को भाग्यशाली मानते हुए कहा कि उन्हें हमेशा लालकृष्ण आडवाणी का स्नेह और मार्गदर्शन मिलता रहा है। उनके साथ बीते हुए अनगिनत पल और यादें आज मन में उमड़ रही हैं। सार्वजनिक जीवन में शुरुआती दौर से ही उनके संपर्क में आने का मौका मिला था और धीरे-धीरे यह रिश्ता एक अभिभावक जैसा बन गया।

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राजनीति की बारीकियों को सीखने और हर कदम पर मार्गदर्शन पाने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने उनकी वैचारिक स्पष्टता को सराहा है। कठिन समय में उनका अनुभव हमेशा संबल बना। जब भी उनसे मिलने का अवसर मिलता है, वह मुलाकात नई ऊर्जा और प्रेरणा से भर देती है। उनके दीर्घायु होने की कामना करते हुए यह प्रार्थना की गई है कि वह स्वस्थ जीवन आएं।

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को देव दीपावली के दिन हुआ था। युवावस्था में ही 1947 के दौरान उन्हें देश के विभाजन की भयंकर पीड़ा का सामना करना पड़ा था। सिंध में अपना घर और परिवेश छोड़कर उन्हें शून्य से नई शुरुआत करनी पड़ी थी। हालांकि इस मुश्किल दौर के बाद भी उनके भीतर कभी कोई कड़वाहट या पछतावा नहीं देखा गया।

शुरुआत से ही हर परिस्थिति में कुछ नया खड़ा करने का उनका संकल्प जीवनभर उनके साथ रहा। जनसंघ को मजबूत करने से लेकर भारतीय जनता पार्टी के निर्माण तक उनका यही जुझारू रवैया देखने को मिला। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान भारतीय राजनीति ने बड़े मोड़ देखे। वर्ष 1989 में कांग्रेस की सीटें काफी कम हो गईं और 1996 में भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। उन्होंने कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया और राष्ट्र प्रथम की नींव रखी।

लालकृष्ण आडवाणी के व्यक्तित्व की दो प्रमुख विशेषताएं उन्हें अलग पहचान देती हैं। पहली उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक प्रखरता है, जो उनके भाषणों और लेखों में साफ झलकती थी। दूसरी विशेषता भारतीय राजनीति में लंबे समय तक प्रभावी रही छद्म धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ उनका निर्भीक और स्पष्ट रुख था।

आरएसएस के प्रचारक के रूप में उन्होंने राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया और बाद में दिल्ली आकर अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर काम संभाला। दोनों नेताओं का यह साथ पांच दशकों से अधिक समय तक अटूट बना रहा। राजनीति में जहां अक्सर महत्वाकांक्षाएं टकरा जाती हैं, वहीं इन दोनों दिग्गजों की यह जोड़ी आपसी विश्वास और सम्मान की एक अनोखी मिसाल पेश करती है।

जब लालकृष्ण आडवाणी दिल्ली आए थे, तब यह शहर विभाजन के दर्द से उबर रहा था। वर्ष 1967 में वह दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष बने और विजय कुमार मल्होत्रा के साथ मिलकर काम किया। 1970 के दशक से उनकी संसदीय यात्रा शुरू हुई, जहां उन्होंने दोनों सदनों में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों में अपनी अलग छाप छोड़ी। व्यस्तता के बावजूद वह लगातार देश के कोने-कोने में जनता से संवाद करते रहे।

सवाल-जवाब

लालकृष्ण आडवाणी ने अपने जीवन का कौन सा वर्ष शुरू किया है?
लालकृष्ण आडवाणी 8 नवंबर को अपने जीवन के सौवें वर्ष यानी 99 वर्ष के हो गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जन्मदिन पर क्या संदेश दिया?
प्रधानमंत्री ने एक आलेख लिखकर उनके योगदान को याद किया और उनके साथ बिताए संस्मरण साझा किए।
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 8 नवंबर 1927 को देव दीपावली के दिन हुआ था।
उन्होंने दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में कब कार्यभार संभाला था?
वह 1967 में दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष बने थे।
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