विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर NSUI समेत कई संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस बीच यह पूरा विवाद देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच गया है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और इस याचिका पर अगले हफ्ते विस्तृत सुनवाई होनी तय है। राजनीतिक तनाव के इसी माहौल में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनके दावों का औपचारिक फैक्ट चेक जारी कर स्थिति स्पष्ट की है।
राहुल गांधी के आरोपों और दावों की पृष्ठभूमि
विपक्षी गठबंधन की ओर से SIR व्यवस्था को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह बात बिना किसी संदेह के साबित हो चुकी है कि ज्ञानेश कुमार ने गैर-कानूनी और एकतरफा ढंग से फॉर्म 6 में बदलाव किए हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह कदम BJP को चुनावी लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने आगे कहा कि देश के लोकतंत्र पर हुए इस कथित हमले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को जवाबदेह बनाया जाएगा। अपने बयान के समर्थन में उन्होंने निर्वाचन सदन की एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के तीसरे बिंदु को साझा किया, जिसमें दर्ज था कि SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ संलग्न घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने उचित ठहराया है, जबकि सामान्य अवधि के लिए मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत तय फॉर्म लागू रहेंगे।
चुनाव आयोग का आधिकारिक फैक्ट चेक और स्पष्टीकरण
राहुल गांधी के इन आरोपों के तुरंत बाद निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए फैक्ट चेक में इन दावों को पूरी तरह भ्रामक करार दिया। आयोग ने क्रमवार विवरण देते हुए दो प्रमुख बिंदु रेखांकित किए। सबसे पहले आयोग ने स्पष्ट किया कि बिहार में SIR संचालन के लिए 24 जून 2025 को जो आदेश पारित हुआ था, वह मुख्य चुनाव आयुक्त का कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि पूरे आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिया गया संस्थागत फैसला था। आयोग ने आगे यह भी रेखांकित किया कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इसी आदेश की वैधानिकता को पूरी तरह सही ठहराया था।
दूसरे बिंदु में निर्वाचन आयोग ने अपने 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट संख्या 120 के पैरा 1(iii) का हवाला दिया। आयोग ने दोहराया कि प्रेस नोट में साफ तौर पर दर्ज किया गया था कि SIR प्रक्रिया के तहत फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपनी विधिक मान्यता दे चुका है। आयोग के अनुसार, शीर्ष अदालत के पूर्व निर्णय और आयोग की साझा सहमति से हुई प्रक्रिया को एकतरफा या गैर-कानूनी बताना तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है।
सड़क पर उतरने की तैयारी में कांग्रेस, 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' का ऐलान
दूसरी तरफ, पिछले 4 दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और SIR को वापस लेने की मांग पर सियासी संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस आलाकमान ने इस मुद्दे पर दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस संगठनात्मक मंथन के बाद कांग्रेस ने राष्ट्रव्यापी 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' आयोजित करने का निर्णय लिया है। योजना के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ता और नेता पूरे देश में बाइक रैली, साइकिल रैली और पदयात्राएं निकालकर उन मतदाताओं के नाम एकत्र करेंगे जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
इस जमीनी मुहिम के बाद 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विपक्षी इंडिया गठबंधन के तमाम शीर्ष नेता मंच साझा करेंगे। इसके अलावा 25 और 26 नवंबर को देश के 6 अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली के लिए विशेष यात्राएं निकाली जाएंगी। विरोध के तात्कालिक कदम के तहत संसद भवन से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक एक विरोध मार्च निकालने का भी फैसला किया गया है।





















