नई दिल्ली। देश के केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के सक्रिय राजनीति से किनारा करने या संन्यास लेने की तमाम अटकलों पर उनके आधिकारिक कार्यालय ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। दफ्तर की ओर से जारी एक स्पष्टीकरण में यह साफ किया गया है कि नई पीढ़ी को आगे लाने और उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां सौंपने को लेकर दिया गया उनका बयान पूरी तरह से गैर-राजनीतिक था। कार्यालय के मुताबिक, यह पूरा बयान केवल लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों और उसकी कार्यप्रणाली के दायरे में दिया गया था। इसका देश की राजनीति, आगामी कैबिनेट विस्तार या उनके खुद के भविष्य के किसी भी राजनीतिक फैसले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
क्यों उड़ी थीं सियासी गलियारों में संन्यास की अफवाहें?
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और मंत्रियों के विभागों में बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नितिन गडकरी के एक बयान को उनके सियासी संन्यास से जोड़कर देखा जाने लगा था। मीडिया के एक वर्ग में लगातार चल रही इन तमाम अटकलों और चर्चाओं को खारिज करते हुए उनके कार्यालय ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के सेवा कार्यों को और गति देने के लिए उन्होंने युवाओं को आगे बढ़ाने की बात कही थी। इस साधारण सी बात को बेवजह राजनीतिक रंग दे दिया गया और इसे गलत संदर्भ में पेश किया गया।
ट्रस्ट और आदिवासी विकास से जुड़ा था पूरा संदर्भ
नितिन गडकरी के कार्यालय के अनुसार, मंत्री महोदय मूल रूप से लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के बारे में बात कर रहे थे। इस ट्रस्ट की स्थापना खुद नितिन गडकरी द्वारा की गई थी और यह संगठन देश के दूरदराज के आदिवासी इलाकों के विकास के लिए सक्रिय रूप से काम करता है। यह ट्रस्ट आदिवासी क्षेत्रों में एकल विद्यालय चलाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। कार्यालय ने जानकारी दी कि गडकरी लंबे समय से इस ट्रस्ट से गहराई से जुड़े रहे हैं और उनकी टिप्पणियां केवल इसी संगठन के कामकाज और भविष्य के नेतृत्व के संदर्भ में थीं। कुछ टेलीविजन चैनलों द्वारा इन बातों को उनके मूल संदर्भ से अलग करके एक राजनैतिक बयान के रूप में प्रसारित किया जा रहा था। गडकरी ने अपनी शारीरिक कार्यक्षमता में आए बदलाव और युवा पीढ़ी को अधिक जिम्मेदारी सौंपने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे थे।
नागपुर के कार्यक्रम में कही थी यह बात
नागपुर जिले के काटोल में आयोजित एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कक्षा को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा था, “मैं किसी के लिए प्रेरणा नहीं हूं। आजकल मैं उस तरह काम नहीं कर पाता जैसे पहले करता था। अब मैं सबसे यही कहता हूं कि हमें नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। नए लोग आगे आएंगे और पुरानी पीढ़ी उन्हें गाइड करेगी। इसी तरह काम आगे बढ़ेगा और बढ़ेगा। मैं चाहता हूं कि यह काम इस स्तर तक पहुंचे कि महाराष्ट्र का कोई भी आदिवासी गांव बिना बिजली के न रहे।” उनके इस संबोधन के बाद ही राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने शुरू हो गए थे।
मराठी में दिए गए भाषण का निकाला गया गलत मतलब
विभिन्न रिपोर्ट्स में गडकरी के उस भाषण का विशेष रूप से जिक्र किया गया था जिसमें उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपने लंबे सफर और अब युवा पीढ़ी को मौका देने की बात कही थी। मराठी भाषा में दिए गए उनके संबोधन का सामान्य अर्थ यह था कि वह पिछले तीस वर्षों से लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और इस दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखने के साथ-साथ कई पुरस्कार भी हासिल किए हैं, लेकिन अब वह पहले की तरह अत्यधिक काम नहीं कर सकते और नई पीढ़ी को जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। इन पंक्तियों के सामने आते ही सियासी हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और कुछ लोगों ने इसका अर्थ यह निकाल लिया कि वह राजनीति को अलविदा कहने का मन बना रहे हैं। बहरहाल, कार्यालय की ओर से आए इस ताज़ा और स्पष्ट बयान ने सभी अटकलों का अंत कर दिया है।



















