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राजेंद्र नगर वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण आया सामने, बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के आरोपों को बताया भ्रामकराजनीति
9 सित॰ 2026, 12:05 am (3 दिन पहले)· 2

राजेंद्र नगर वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण आया सामने, बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के आरोपों को बताया भ्रामक

दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा का नाम शामिल किए जाने को लेकर मचे सियासी घमासान पर चुनाव आयोग और बीजेपी ने स्थिति स्पष्ट की है। मुख्य चुनाव अधिकारी ने प्रक्रिया को नियमसंगत बताया, जबकि राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र संख्या 39 की मतदाता सूची को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच भारत निर्वाचन आयोग और भारतीय जनता पार्टी की चुनाव सेल ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। आम आदमी पार्टी की ओर से मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर उठाए गए गंभीर सवालों के बाद दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी कर सभी आरोपों का खंडन किया है। चुनाव निकाय ने साफ किया है कि मतदाता सूची में किसी भी नागरिक का नाम जोड़ना अथवा हटाना पूरी तरह से वैधानिक प्रावधानों और तय दिशानिर्देशों के तहत संपन्न किया जाता है। इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर पलटवार किया है और उनके रुख की आलोचना की है।

चुनाव आयोग ने दी मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी

आम आदमी पार्टी द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। इसके जवाब में दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक किया। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज करने, संशोधन करने अथवा नाम हटाने का कार्य केवल निर्धारित फॉर्म के माध्यम से ही किया जाता है। इसके लिए फॉर्म 6, फॉर्म 7 और फॉर्म 8 की निर्धारित व्यवस्था है। यह संपूर्ण प्रक्रिया निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 तथा मतदाता पंजीकरण नियम 1960 में निहित प्रावधानों के अनुसार ही पूरी की जाती है। आयोग ने कहा कि इन नियमों का पालन प्रत्येक चरण में सुनिश्चित किया जाता है और किसी भी स्तर पर प्रक्रियागत उल्लंघन की गुंजाइश नहीं रहती।

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निर्वाचन आयोग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार मतदाता सूची के अद्यतनीकरण के लिए 30 जून से 17 अगस्त तक गणना चरण आयोजित किया गया था। इस चरण में प्राप्त आंकड़ों और आवेदनों के आधार पर ही 31 अगस्त 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। आयोग ने जोर देकर कहा कि प्रारूप सूची का प्रकाशन वैधानिक समय सीमा और स्थापित प्रशासनिक मानकों के अनुपालन में हुआ है। चुनाव निकाय के अनुसार किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची में शामिल होने का अधिकार है और इसके लिए वर्ष में किसी भी समय आवेदन जमा करने का अवसर उपलब्ध रहता है।

सीरियल नंबर 747 को लेकर उठे सवालों पर बीजेपी इलेक्शन सेल का जवाब

आम आदमी पार्टी ने अपने दावों में कहा था कि राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र की ड्राफ्ट लिस्ट में कुल 746 मतदाताओं के नाम दर्ज थे। ऐसे में राघव चड्ढा का नाम सीरियल नंबर 747 पर दर्ज होना एक बड़ी अनियमितता को दर्शाता है। इस दावे पर भारतीय जनता पार्टी की इलेक्शन सेल के संयोजक एडवोकेट संकेत गुप्ता ने तथ्यात्मक विवरण पेश करते हुए स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में पूरक सूची का स्पष्ट और नियमित प्रावधान शामिल होता है।

संकेत गुप्ता के अनुसार 16 जून को प्रारूप मतदाता सूची को फ्रीज किया गया था। इस तिथि के बाद प्राप्त होने वाले सभी स्वीकृत आवेदनों को नियमानुसार पूरक सूची में शामिल किया जाता है। यदि मूल प्रारूप सूची 746 नंबर पर समाप्त होती है, तो उसके बाद स्वीकृत होने वाला नया आवेदन स्वतः ही 747 नंबर पर दर्ज होगा। इसमें किसी भी प्रकार का संशय या तकनीकी त्रुटि नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि चुनाव आयोग के डिजिटल पोर्टल पर नया मतदाता पहचान पत्र नंबर तभी जनरेट होता है जब संबंधित आवेदन पत्र को सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत कर लिया जाता है। 8 सितंबर 2026 तक दिल्ली की विभिन्न विधानसभाओं में लगभग 700 फॉर्म 6 स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रक्रियाधीन आवेदनों का निस्तारण निरंतर जारी है और 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की कार्यशैली पर साधा निशाना

वोटर लिस्ट विवाद के बीच बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दृष्टिकोण पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी का नेतृत्व उनके प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त है और लगातार उनके खिलाफ भ्रामक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। राघव चड्ढा ने कहा कि जब से उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ी है, तब से पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रहा है।

अपनी प्रतिक्रिया में राघव चड्ढा ने कहा, “वे एक बिटर एक्स की तरह बर्ताव कर रहे हैं जिसे अभी अभी डंप किया गया हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल ने उनके खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने के लिए एक तंत्र विकसित कर लिया है। उनके अनुसार आम आदमी पार्टी की रणनीति पहले बिना किसी साक्ष्य के आरोप तय करने और फिर उनके समर्थन में मनगढ़ंत तर्क गढ़ने की रही है। राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मतदाता पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन किया है और उनका नाम मतदाता सूची में पूरी तरह वैध तरीके से दर्ज हुआ है।

संवैधानिक संस्थाओं की साख और राजनीतिक विमर्श पर बीजेपी का रुख

भारतीय जनता पार्टी के कानूनी एवं चुनाव प्रकोष्ठ ने आम आदमी पार्टी द्वारा चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की है। एडवोकेट संकेत गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और स्वायत्त निकायों की निष्पक्षता पर बिना किसी ठोस सबूत के सवाल खड़ा करना एक अस्वस्थ राजनीतिक परंपरा है। बीजेपी का तर्क है कि इस प्रकार के निराधार दावों का मुख्य उद्देश्य आम जनता और मतदाताओं के बीच चुनावी व्यवस्था के प्रति अविश्वास उत्पन्न करना है।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची किसी राजनीतिक दल का निजी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार का आधार है। चुनाव आयोग द्वारा स्थापित व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी है और इसमें किसी भी स्तर पर पक्षपात की संभावना नहीं रहती। पार्टी ने जोर देकर कहा कि दिल्ली की राजनीति में तथ्यों से परे जाकर अफवाह फैलाने की प्रवृत्ति का विरोध किया जाना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।

नागरिकों के लिए मतदाता सूची पंजीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया

चुनाव आयोग ने आम जनता की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मतदाता पंजीकरण की पूरी व्यवस्था को सार्वजनिक रूप से सुलभ रखा है। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रारूप मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई है, जिसे कोई भी नागरिक देख सकता है। इसके अलावा सभी मतदान केंद्रों और बूथ लेवल अधिकारियों के पास भी यह सूची निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहती है।

नियमों के अनुसार मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरना अनिवार्य होता है। यदि किसी नागरिक को मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम पर आपत्ति दर्ज करानी हो, तो उसके लिए फॉर्म 7 का उपयोग किया जाता है। दर्ज विवरणों में किसी भी प्रकार का संशोधन कराने के लिए फॉर्म 8 की व्यवस्था की गई है। अनिवासी भारतीय नागरिकों के लिए फॉर्म 6A के माध्यम से पंजीकरण का विशेष प्रावधान रखा गया है। आयोग ने 31 अगस्त से 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय निर्धारित किया है, जिससे सभी पात्र नागरिक अपनी प्रविष्टियों की जांच कर सकें और आवश्यक सुधार करा सकें।

सवाल-जवाब

राजेंद्र नगर वोटर लिस्ट विवाद का मुख्य कारण क्या था?
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया था कि ड्राफ्ट लिस्ट 746 पर खत्म होने के बावजूद राघव चड्ढा का नाम सीरियल नंबर 747 पर गलत तरीके से जोड़ा गया, जिसे चुनाव आयोग और बीजेपी ने नियमानुसार पूरक सूची का हिस्सा बताया।
चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के क्या नियम बताए?
चुनाव आयोग के अनुसार नाम जोड़ने का कार्य जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और वोटर रजिस्ट्रेशन नियम 1960 के तहत फॉर्म 6 स्वीकृत होने पर ही होता है।
सीरियल नंबर 747 कैसे जनरेट हुआ?
16 जून को ड्राफ्ट रोल फ्रीज होने के बाद स्वीकृत नए आवेदन पूरक सूची में जुड़ते हैं, इसलिए 746 के बाद नया नाम अपने आप 747 नंबर पर दर्ज हुआ।
दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट कब पब्लिश होगी?
दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
वोटर लिस्ट में नाम सुधारने या जोड़ने के लिए कौन से फॉर्म भरे जाते हैं?
नया नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6, आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म 7, विवरण सुधार के लिए फॉर्म 8 और एनआरआई वोटर्स के लिए फॉर्म 6A भरा जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·2 दिन पहले

राजेंद्र नगर वोटर लिस्ट विवाद तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर राजनीतिक बयानबाज़ी का एक स्पष्ट उदाहरण है। हालांकि यह मामला सीधे तौर पर टेक्नोलॉजी से जुड़ा नहीं है, लेकिन डिजिटल गवर्नेंस और डेटा मैनेजमेंट के दौर में वोटर सूचियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शी प्रबंधन की मांग लगातार बढ़ रही है। भविष्य में इस तरह के विवादों से बचने के लिए चुनाव आयोग को डेटा प्रविष्टि की डिजिटल ट्रैकिंग को और अधिक पारदर्शी बनाना होगा, ताकि किसी भी सीरियल नंबर या डेटा प्रविष्टि पर उठने वाले तकनीकी सवालों का समाधान वास्तविक समय में डेटा ऑडिट के ज़रिए तुरंत किया जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सीरियल नंबर 747 को लेकर उपजा यह विवाद तकनीकी प्रक्रियाओं और वैधानिक प्रावधानों की सही समझ न होने का परिणाम प्रतीत होता है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत फॉर्म 6, 7 और 8 के माध्यम से नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी स्पष्टीकरण के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई की जाती है या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर यहीं थमता है।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·2 दिन पहले

मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद, इस विवाद का राजनीतिक असर आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और सीरियल नंबर से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर राजनीतिक दलों का आमने-सामने आना यह दर्शाता है कि चुनावी मशीनरी की विश्वसनीयता पर हर छोटे बदलाव से बहस छिड़ जाती है। अब यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग के नियमों का हवाला दिए जाने के बाद क्या आम आदमी पार्टी इन दावों पर अपने रुख में कोई बदलाव लाती है या गतिरोध जारी रहता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

राजेंद्र नगर मतदाता सूची विवाद और सीरियल नंबर 747 पर मचा सियासी घमासान केवल एक स्थानीय प्रशासनिक बहस नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी पारदर्शिता और डिजिटल ऑडिट की अनिवार्यता को रेखांकित करता है। जब राजनीतिक दल वैधानिक नियमों और फॉर्म-आधारित प्रणाली पर सवाल उठाते हैं, तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर पड़ता है। चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के प्रावधानों के बावजूद, भविष्य में ऐसी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं की रियल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शी सार्वजनिक डैशबोर्ड की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है ताकि राजनीतिक बयानबाजी और भ्रामक आरोपों के लिए कोई गुंजाइश न बचे।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

मैदानी रिपोर्टिंग के अनुभव से यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सीरियल नंबर से जुड़े तकनीकी विवाद अक्सर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की समझ की कमी या रणनीतिक राजनीति का परिणाम होते हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और नियत फॉर्म प्रक्रिया के बावजूद, यदि चुनाव आयोग और जिला प्रशासन ड्राफ्ट प्रकाशन के समय ही अतिरिक्त प्रेस ब्रीफिंग और बूथ-वार डेटा का सहज विश्लेषण साझा करें, तो इस तरह के भ्रामक राजनीतिक बवंडर को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।

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